<
Categories: धर्म

Mahashivratri 2026: पहली बार शिवलिंग का प्राकट्य कब हुआ था? इसकी सबसे पहले पूजा किसने की थी? पढ़ें सबकुछ…

Mahashivratri 2026: सनातन के सबसे बड़े त्योहारों में से एक महाशिवरात्रि का पर्व आज मनाया जा रहा है. महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि, शिवलिंग पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट दूर होते हैं. अब सवाल है कि आखिर, शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई? शिवलिंग की सबसे पहले किसने पूजा की थी? आइए जानते हैं इससे जुड़ी रोचक जानकारियां-

Mahashivratri 2026: सनातन के सबसे बड़े त्योहारों में से एक महाशिवरात्रि का पर्व आज मनाया जा रहा है. भक्त इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे होते हैं. हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक माना गया है. बता दें कि, महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. धर्म शास्त्रों में शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और विभिन्न पूजन सामग्रियों से अभिषेक करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि, शिवलिंग पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट दूर होते हैं. घर में हमेशा सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है. लेकिन, कुछ सवालों को लेकर भक्त अक्सर भ्रम में रहते हैं. जैसे- शिवलिंग की उत्पत्ति कैसे हुई? शिवपुराण में क्या है इसका वर्णन? शिवलिंग की सबसे पहले किसने पूजा की थी? शिवलिंग पूजा क्यों करना चाहिए?आइए जानते हैं इससे जुड़ी रोचक जानकारियां-

पहली बार शिवलिंग का प्राकट्य कब हुआ था?

शिवपुराण के खंड 1 के नवें अध्याय में शिवलिंग की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा वर्णित है. इस कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया. दोनों के बीच यह द्वंद फैलते ही देवता और ऋषि-मुनि चिंतित हो उठे और उन्होंने इस विवाद का समाधान खोजने के लिए दोनों को भगवान शिव के पास जाने का सुझाव दिया. देवताओं के साथ ब्रह्मा और विष्णु महादेव के समक्ष पहुंचे. महादेव को पहले से ही पता था कि दोनों देवों के बीच श्रेष्ठता का विवाद चल रहा है. उन्होंने देवताओं से कहा कि उनके द्वारा प्रकट की जाने वाली दिव्य ज्योत के अंतिम छोर तक जो पहले पहुंचेगा, वही अधिक शक्तिशाली माना जाएगा. महादेव की इस शर्त को ब्रह्मा और विष्णु ने स्वीकार कर लिया. तुरंत ही शिव के तेजोमय शरीर से एक अत्यंत विशाल और अगाध ज्योत प्रकट हुई, जो पाताल से लेकर नभ तक फैली हुई थी.

भगवान विष्णु उस ज्योत के पाताल छोर की खोज में निकल पड़े और ब्रह्मा जी आकाश की ओर बढ़े. लंबे प्रयास के बाद भी न तो विष्णु को उसका अंत मिला और न ही ब्रह्मा जी अंतिम छोर तक पहुंच सके. विष्णु जी ने अपनी असफलता स्वीकार कर महादेव से क्षमा मांगी, लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोलते हुए दावा किया कि वे ज्योत के अंत तक पहुंच गए हैं. उन्होंने कहा कि ज्योत का अंतिम बिंदु पाताल में स्थित है. ब्रह्मा जी के इस असत्य पर महादेव ने उन्हें ताड़ना दी और स्पष्ट कहा कि वे झूठ बोल रहे हैं. इसके बाद भगवान शिव ने विष्णु जी को श्रेष्ठ घोषित किया. जिस दिव्य ज्योत से यह परीक्षा ली गई थी, उसी ज्योत स्वरूप को बाद में शिवलिंग कहा जाने लगा और तब से उसकी पूजा-अर्चना सनातन धर्म में अनादि काल से होती आ रही है.

शिवलिंग की सबसे पहले किसने की थी पूजा

पौराणिक कथाओं और शिव महापुराण के अनुसार, शिवलिंग की सबसे पहली पूजा भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु ने की थी. जब भगवान शिव एक अनंत अग्नि स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में प्रकट हुए, तब उनके आदि और अंत का पता लगाने में असमर्थ होने पर, ब्रह्मा और विष्णु ने उस ज्योति स्तंभ की पूजा की थी. कथा के अनुसार, बात उस समय की है जब विष्ण और ब्रह्मा के बीच श्रेष्ठता व आपस मे पूजनीयता की बहस हुई. तब उन दोनो के मध्य एक विशाल ज्योतिर्मय शिव का अग्नि पुंज समान प्रकाशमान ज्योतिलिंग प्रकट हुआ. फिर दोनों में तय हुआ कि जो इसके सिरे को पा लेगा वही पूजनीय है. तब विष्णु नीचे की तरफ वाराह रूप में गये और ब्रह्मा ऊपर की तरफ हंस रूप में गए. किन्तु सत्य में दोनों में से कोई भी उस ज्योतिर्लिंग का सिरा/छोर नहीं पा सका.

तब ब्रह्मा ने केतकी के पुष्प गाय व कईयो से झूठ बुलवाया कि ब्रह्मा ने इस ज्योतिलिंग का सिरा पा लिया है. फिर विष्णु ज्यों ही ब्रह्मा को श्रेष्ठ व पूजनीय मान कर उसकी पूजा करने लगे तभी ज्योतिर्लिंग से भगवान शिवजी प्रकट हुए. फिर भगवान शिव शंकर ने झूठ बोलने वाले ब्रह्मा का पांचवां मुख काट दिया. तब से ब्रह्मा चतुर्मुखी हो गए और भगवान शिव शंकर महादेव ने विष्णु को अपनी समानता दे दी. तब उस समय भगवान विष्णु ने सबसे पहले उस प्रकाशमान शिव लिंग के रूप मे भगवान शिव शंकर महादेव की पूजा की. वह दिन फाल्गुन मास की महा शिव रात्रि का था. 

शिवलिंग पूजा क्यों करना चाहिए?

  • शिवलिंग की विधिपूर्वक पूजा करने से मनुष्य संतान, धन-धान्य, ज्ञान, और मोक्ष को प्राप्त करता है. जिस स्थान पर शिवलिंग का पूजा होता है वह तीर्थ न होने पर भी तीर्थ बन जाता है.
  • जो मनुष्य किसी तीर्थ की मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उसका हजार बार, लाख बार, या फिर करोड़ बार पूजन करता है वह साधक पुण्य प्रभाव से शिवस्वरुप हो जाता है. वहीं, जो मनुष्य तीर्थ की मिट्टी, भस्म, गोबर और बालू का शिवलिंग बनाकर एक बार भी उसकी विधि पूर्वक पूजा करता है वह व्यक्ति स्वर्ग में निवास करता है.
  • जिस स्थान पर हमेशा शिव पूजन किया जाता है उस स्थान पर मनुष्य की मृत्यु होती है. वह शिवलोक को प्राप्त करता है और जो मनुष्य शिव, शिव, शिव इस प्रकार हमेशा भगवान शिव का जप करता रहता है वह परम पवित्र और परम श्रेष्ठ हो जाता है और वह मोक्ष को प्राप्त होता है. शिव शब्द के उच्चारण से ही मनुष्य समस्त प्रकार के पापों से मुक्त हो जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.)

Lalit Kumar

9 साल से ज्यादा के लंबे करियर में ललित कुमार ने दैनिक जागरण, दैनिक भाष्कर, हिन्दुस्तान और नेटवर्क 18 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, समाज, कला व संस्कृति के अलावा जटिल स्वास्थ्य विषयों और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण उनकी विशेषता है। खबरों का डीप एनालिसिस उनकी पहचान है। हर खबर को आसान भाषा में पाठक तक पहुंचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्तमान में वे देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थानों में एक इंडिया न्यूज (डिजिटल) में लाइफस्टाइल, हेल्थ, धर्म और एस्ट्रो टीम का हिस्सा हैं।

Recent Posts

UP Crime: छोटा भाई पहन रहा था बड़े भाई का जूता, दोनों के बीच हो गई मारपीट, फिर कैंची से हमला कर एक ने ली दूसरे की जान

UP Crime: यूपी के महाराजगंज में सोमवार को नए जूते पहनने को लेकर हुए झगड़े…

Last Updated: April 20, 2026 23:29:39 IST

पति-पत्नी के रिश्तों में बढ़ने लगी दूरियां, हर वक्त होती है किचकिच, इन 3 टिप्स से दूर होंगे गिले-शिकवे!

Relationship tips For Couples: शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं दो परिवारों का बंधन होता…

Last Updated: April 20, 2026 23:22:21 IST

GT vs MI Match Highlights: मुंबई का बड़ा कमबैक! गुजरात को 100 रनों पर समेटा, तिलक ने लगाई नैया पार

GT vs MI Match Highlights: अहमदाबाद में तिलक वर्मा का तूफान! शानदार शतक जड़कर तिलक…

Last Updated: April 20, 2026 23:27:03 IST

पीएम मोदी ने की दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के साथ बैठक, 2030 तक के लिए रखा ये लक्ष्य, बोले- ‘हम चिप से लेकर चिप्स…’

पीएम मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ बैठक के बाद…

Last Updated: April 20, 2026 23:08:55 IST