Mauni Amavasya 2026 Snan Daan Niyam: मौनी अमावस्या आज यानी 18 जनवरी रविवार को है. इस बार की मौनी अमावस्या अधिक फलदायी साबित होती दिख रही है. क्योंकि, इसबार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है. आपको भी मौनी अमावस्या पर स्नान और दान करना है तो गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी से जानते हैं इसकी विधि और नियम के बारे में-
जानिए, अमावस्या पर स्नान-दान करने का महत्व? (Canva)
Mauni Amavasya 2026 Snan Daan Niyam: मौनी अमावस्या आज यानी 18 जनवरी रविवार को मनाई जा रही है. इस बार की मौनी अमावस्या अधिक फलदायी साबित होती दिख रही है. क्योंकि, इसबार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है. बता दें कि, सर्वार्थ सिद्धि योग के दिन गंगा स्नान करना अच्छा माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. स्नान के बाद दान करते हैं. मौनी अमावस्या माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है. इस दिन नियमपूर्वक जरूरतमंद को दान करना चाहिए. आपको भी मौनी अमावस्या पर स्नान और दान करना है तो गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी से जानते हैं इसकी विधि और नियम के बारे में-
ब्रह्म मुहूर्त में उठें: मौनी अमावस्या को ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं और दैनिक क्रियाओं से निवृत्त हो जाएं. इसके बाद स्नान की तैयारी करें.
गंगा स्नान करें: इस दिन गंगा स्नान कर रहे हैं तो बहुत अच्छा है. यदि गंगा स्नान नहीं कर पा रहे हैं तो नहाने के पानी में गंगाजल और काला तिल मिलाकर स्नान करें. उसके बाद साफ कपड़े पहनें.
मंत्रों का जाप करें: मौनी अमावस्या पर सुबह में उठें तो कुछ न बोलें, स्नान करने तक आपको मौन रखना है. स्नान के बाद ही बोलें. उसमें भी आपको भजन, मंत्र जाप, नाम जाप आदि करना चाहिए.
संकल्प के साथ व्रत: यदि आपको पूरे दिन मौन व्रत रखना है तो इसके लिए संकल्प कर लें. संकल्प के बिना किया गया व्रत फलदायी नहीं माना जाता है. संकल्प के साथ मौन व्रत का प्रारंभ करें.
विष्णुजी की पूजा करें: स्नान के बाद आप भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें. फिर अपनी क्षमता के अनुसार किसी गरीब ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को काला तिल, अन्न, गरम कपड़े, कंबल आदि का दान करें. ऐसा करने से व्यक्ति के पाप मिटते हैं और पुण्य लाभ होता है.
पितरों को जल से तर्पण करें: जब स्नान कर लें, उसके बाद कुश की पवित्री से अपने पितरों को जल से तर्पण दें. जब दान करें तो पितरों का स्मरण करके उनके लिए भी दान करें. इससे वे खुश होंगे और उनका आशीर्वाद आपके भाग्योदय में सहायक होगा.
धार्मिक महापुराणों में बताया गया है कि माघ माह में स्नान और दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है. जो लोग मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान करते हैं, उनको मोक्ष मिलता है और मृत्यु के बाद वे स्वर्ग प्राप्त करते हैं.
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