Hanuman Jayanti: वास्तु शास्त्र के अनुसार हनुमान जी की पंचमुखी तस्वीर या मूर्ति को घर में स्थापित करना अत्यंत शुभ माना जाता है. खासकर हनुमान जन्मोत्सव के दिन इसे घर लाकर सही तरीके से स्थापित करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है. इसके साथ ही यह उपाय घर में मौजूद वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा को भी दूर करने में सहायक माना जाता है.
साल 2026 में हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल को मनाया जाएगा. इस दिन अगर श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पंचमुखी हनुमान जी की स्थापना की जाए, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. आइए जानते हैं इसे स्थापित करने की सही प्रक्रिया और इसके लाभ.
पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर स्थापित करने की सही विधि
- हनुमान जन्मोत्सव के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, विशेष रूप से लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें और वहां हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति रखें.
- तस्वीर को स्थापित करने से पहले गंगाजल से उसकी शुद्धि करें और हनुमान चालीसा या मंत्रों का पाठ करें. इसके बाद जिस स्थान पर तस्वीर लगानी है, उसे भी गंगाजल से पवित्र करें.
- वास्तु के अनुसार पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर को उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में लगाना सबसे शुभ माना जाता है. इस दिशा में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है.
- तस्वीर को सही स्थान पर लगाने के बाद धूप-दीप जलाकर पूजा करें और फल-फूल अर्पित करें. ध्यान रखें कि तस्वीर ऐसी ऊंचाई पर लगाई जाए जहां आपकी नजर आसानी से उस पर पड़ सके. इससे बार-बार दर्शन करने पर मन में सकारात्मकता बनी रहती है.
कब करें स्थापना?
- हनुमान जयंती का दिन पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर स्थापित करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. इसके अलावा मंगलवार का दिन भी इस कार्य के लिए शुभ माना जाता है.
- पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर लगाने के लाभ
- घर में पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर लगाने से वास्तु दोष कम होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घटता है. साथ ही शनि और मंगल से जुड़े दोषों में भी राहत मिलती है.
- यह माना जाता है कि हनुमान जी की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. इसके अलावा व्यक्ति को मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है.
ध्यान रखने वाली जरूरी बातें - तस्वीर लगाने के बाद नियमित रूप से या कम से कम हर मंगलवार को हनुमान जी की पूजा अवश्य करें. श्रद्धा और नियम के साथ की गई पूजा ही शुभ फल देती है.