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बहन ने भेजी राखी तो भाई किससे बंधवाए? ज्योतिषाचार्य ने बताया सही तरीका, इन सवालों का जानें सही जवाब

Raksha Bandhan Par Rakhi Bandhne Ka Shubh Muhurt: रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा. ज्योतिषाचार्याें ज्योतिषाचार्याें के अनुसार, अगर बहन किसी कारण से भाई के पास नहीं आ पाती और राखी भेजती है तो भाई बेटी या चचेरी बहन से राखी बंधवा सकता है. बेटी अपने पिता को भी राखी बांध सकती है. राखी बांधते समय भाई का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखने, रोली-अक्षत से तिलक करने, आरती और मिठाई खिलाने की परंपरा बताई गई है. राखी बांधते समय “येन बद्धो बलि राजा...” मंत्र का जाप किया जा सकता है. राखी को 7 या 15 दिन तक रखने और कुछ स्थानों पर जन्माष्टमी तक रखने की परंपरा बताई गई है.

Raksha Bandhan Par Rakhi Bandhne Ka Shubh Muhurt: रक्षाबंधन का त्योहार अब नजदीक है और भाई-बहन इस खास दिन की तैयारियों में जुटे हैं. इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा. यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती है, जबकि भाई बहन की रक्षा करने का वचन देता है. हालांकि, रक्षाबंधन को लेकर हर साल कई सवाल लोगों के मन में रहते हैं. अगर बहन किसी वजह से भाई के पास नहीं पहुंच पाए और राखी भेज दे तो भाई को राखी किससे बंधवानी चाहिए? क्या बेटी अपने पिता की कलाई पर राखी बांध सकती है? राखी बांधने की सही विधि क्या है? राखी बांधते समय कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए और राखी उतारने के बाद उसका क्या करना चाहिए? इन तमाम सवालों को लेकर ज्योतिषाचार्याें ने जानकारी दी है.

बहन नहीं आ पाए तो किससे बंधवाएं राखी?

कई बार पढ़ाई, नौकरी, शादी या किसी दूसरी वजह से बहन रक्षाबंधन के दिन अपने भाई के पास नहीं पहुंच पाती. ऐसे में बहन पहले से ही भाई के लिए राखी भेज देती है. अब सवाल उठता है कि बहन की गैरमौजूदगी में भाई वह राखी किससे बंधवाए? ज्योतिषाचार्याें के अनुसार, अगर बहन ने राखी भेजी है और वह खुद रक्षाबंधन पर मौजूद नहीं हो सकती तो भाई अपनी बेटी या चचेरी बहन से वह राखी बंधवा सकता है. इस तरह बहन की ओर से भेजी गई राखी को पर्व की भावना के साथ स्वीकार किया जा सकता है. यानी अगर दूरी या किसी मजबूरी के कारण बहन खुद भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध पा रही है तो इसे लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है. परिवार में उपलब्ध करीबी सदस्य के माध्यम से राखी बंधवाने की परंपरा निभाई जा सकती है.

क्या बेटी अपने पिता को राखी बांध सकती है?

रक्षाबंधन को आमतौर पर भाई-बहन के त्योहार के रूप में जाना जाता है. लेकिन कई परिवारों में बेटियां अपने पिता की कलाई पर भी राखी बांधती हैं. इसे लेकर भी लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या ऐसा करना धार्मिक रूप से उचित है? ज्योतिषाचार्याें का कहना है कि रक्षाबंधन केवल भाई और बहन के रिश्ते तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, स्नेह और सुरक्षा के भाव से भी जुड़ा हुआ है. इसलिए बेटी अपने पिता को राखी बांध सकती है. पिता भी बेटी की रक्षा, सुख और कल्याण की कामना कर सकते हैं. इस तरह बेटी और पिता के बीच राखी बांधने की परंपरा को प्रेम और सुरक्षा के भाव के रूप में देखा जा सकता है. इसमें पिता और बेटी दोनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है.

राखी बांधने के बाद भाई का पैसे देना जरूरी है?

रक्षाबंधन पर राखी बांधने के बाद भाई की ओर से बहन को उपहार या पैसे देने की परंपरा कई परिवारों में होती है. हालांकि, क्या भाई के लिए पैसे देना जरूरी है? इस सवाल पर ज्योतिषाचार्याें बताते हैं कि राखी बांधने के बाद भाई का बहन को पैसे देना अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है. भाई अपनी आर्थिक स्थिति और सामर्थ्य के अनुसार बहन को उपहार दे सकता है. वह बहन की पसंद की कोई चीज, कपड़े, मिठाई या पैसे दे सकता है. इसका मुख्य भाव बहन के प्रति प्रेम, सम्मान और स्नेह व्यक्त करना है. इसलिए अगर कोई भाई अपनी बहन को पैसे की जगह कोई उपहार देता है या सिर्फ स्नेह और आशीर्वाद देता है तो भी रक्षाबंधन का मूल भाव बना रहता है. उपहार की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण भाई-बहन के रिश्ते की भावना मानी जाती है.

राखी बांधने की सही विधि क्या है?

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधते समय पूजा की थाली तैयार करने की परंपरा है. ज्योतिषाचार्याें के अनुसार, भाई को राखी बांधते समय उसका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. राखी की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखी जा सकती है. सबसे पहले बहन भाई के माथे पर रोली से तिलक लगाए और उसके बाद अक्षत लगाए. इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है. राखी बांधने के बाद भाई की आरती की जाती है और अंत में उसे मिठाई खिलाई जाती है. इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा करने का संकल्प लेता है. इस पूरी विधि का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना भी है.

राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोलें?

ज्योतिषाचार्याें के अनुसार, भाई की कलाई पर राखी बांधते समय बहन को एक विशेष मंत्र का जाप करना चाहिए. धार्मिक परंपरा में इस मंत्र का उल्लेख रक्षाबंधन से जोड़ा जाता है.
राखी बांधते समय यह मंत्र बोला जा सकता है—“येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः. तेन त्वाम् प्रतिबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल.. इस मंत्र के जरिए भाई की रक्षा और उसके जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंत्र का जाप करते हुए राखी बांधना शुभ माना जाता है.

राखी कितने दिन तक कलाई पर बांधे रखें?

राखी बांधने के बाद इसे कितने समय तक कलाई पर रखना चाहिए, इसे लेकर भी अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं. ज्योतिषाचार्याें के अनुसार, राखी को 7 दिन या 15 दिन तक कलाई पर बांधे रखा जा सकता है. वहीं कुछ स्थानों पर राखी को जन्माष्टमी तक रखने की परंपरा भी बताई जाती है. यानी राखी उतारने का समय स्थानीय परंपरा और परिवार की मान्यता के अनुसार अलग हो सकता है. राखी उतारने के बाद उसे इधर-उधर या कूड़ेदान में फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक रखने की सलाह दी जाती है. ज्योतिषाचार्याें के अनुसार, राखी को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित किया जा सकता है या जमीन में गड्ढा खोदकर रखा जा सकता है.

राखी उतारने के बाद क्या नहीं करना चाहिए?

राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते और रक्षाबंधन की भावनाओं का प्रतीक मानी जाती है. इसलिए इसे उतारने के बाद ऐसे ही सड़क, कूड़ेदान या किसी गंदे स्थान पर फेंकना उचित नहीं माना जाता. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी को सम्मानपूर्वक रखने या विसर्जित करने की परंपरा है. अगर परिवार में कोई विशेष परंपरा चली आ रही है तो उसका पालन किया जा सकता है. पवित्र नदी में प्रवाहित करने की स्थिति में पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे, इसका भी ध्यान रखना चाहिए.

क्या रक्षाबंधन पर भाई-बहन दोनों को व्रत रखना चाहिए?

रक्षाबंधन के दिन व्रत रखने को लेकर भी कई लोगों के मन में भ्रम रहता है. क्या सिर्फ बहन को उपवास रखना चाहिए या भाई को भी व्रत रखना जरूरी है? ज्योतिषाचार्याें के अनुसार, रक्षाबंधन पर भाई और बहन दोनों व्रत रख सकते हैं, लेकिन इसे लेकर कोई ऐसा विशेष नियम नहीं बताया गया है कि दोनों के लिए उपवास करना अनिवार्य हो. भाई-बहन अपनी इच्छा, स्वास्थ्य और सुविधा के अनुसार व्रत रख सकते हैं.
अगर कोई व्रत रखता है तो अपनी स्वास्थ्य स्थिति और जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक उपवास नहीं करना चाहिए.

रक्षाबंधन में सबसे अहम है भाई-बहन के रिश्ते का भाव

रक्षाबंधन की रस्मों और परंपराओं का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, लेकिन इस त्योहार की सबसे बड़ी खूबसूरती भाई-बहन के रिश्ते में छिपे प्रेम और विश्वास में है. बहन की राखी सिर्फ भाई की कलाई पर बंधा धागा नहीं, बल्कि उसके लिए मंगलकामना और स्नेह का प्रतीक मानी जाती है. वहीं भाई की ओर से दिया गया वचन केवल रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव में बहन का साथ देने के भाव को भी दर्शाता है. इसलिए अगर किसी वजह से बहन खुद भाई के पास नहीं पहुंच पाती और राखी भेजती है, तो दूरी के बावजूद इस रिश्ते की भावना कायम रहती है.

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