Sajjan Singh Death News: तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सज़ा काट रहे सज्जन कुमार को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है. सज्जन कुमार को 1984 के सिख-विरोधी दंगों में पांच लोगों की हत्या का दोषी ठहराया गया था.
सज्जन कुमार की मौत
Sajjan Singh Death News: कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को 1984 के सिख-विरोधी दंगों में पांच लोगों की हत्या का दोषी ठहराया गया था. शुक्रवार को उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. डॉक्टर्स का कहना है कि अस्पताल लाने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी. हालांकि अस्पताल ने अभी तक उनकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं किया है.
तीन बार लोकसभा सदस्य रहे कुमार ने बाहरी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था और वह कांग्रेस के एक प्रमुख नेता थे. 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था. आपको जानकर हैरानी होगी कि दिल्ली में एक समय ऐसा था, जब सज्जन कुमार की तूती बोलती थी. बड़े-बड़े तुर्रम खां भी उनके सामने बोलने की हिम्मत नहीं करते थे.
दिल्ली में 31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों – सतवंत सिंह और बेअंत सिंह द्वारा हत्या के बाद दंगे भड़के थे. हथियारों से लैस लोगों के समूहों ने पूरी दिल्ली में सिखों को निशाना बनाया और उनके घरों व दुकानों पर हमले किए. पूरे भारत में और मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 3,000 से ज़्यादा सिख मारे गए थे.
तीन दशकों से भी ज़्यादा समय तक, कुमार को हिंसा से जुड़े कई आपराधिक मामलों का सामना करना पड़ा, जिनके नतीजे अलग-अलग अदालतों में बरी होने और दोषी ठहराए जाने के बीच बदलते रहे. 17 दिसंबर, 2018 को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में कुमार को बरी करने वाले ट्रायल कोर्ट के 2013 के फ़ैसले को पलट दिया. इसके बाद उन्हें दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई.
यह मामला राज नगर पार्ट-I, पालम कॉलोनी में पांच सिख पुरुषों की हत्या और व्यापक हिंसा के दौरान एक गुरुद्वारे को जलाने से जुड़ा था. हाई कोर्ट ने कुमार को आपराधिक साज़िश और उकसावे का दोषी माना और निर्देश दिया कि वह अपनी बची हुई पूरी ज़िंदगी जेल में बिताएं. अपने फ़ैसले में, अदालत ने 1984 की सिख-विरोधी हिंसा को ‘मानवता के ख़िलाफ़ अपराध’ बताया था.
अपनी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ कुमार की अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. इस साल की शुरुआत में, दिल्ली की एक अदालत ने कुमार को दो अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था. इन मामलों में आरोप था कि उन्होंने 1984 के दंगों के दौरान जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हिंसा भड़काई थी. हालांकि, बरी होने के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया गया क्योंकि हिंसा से जुड़े अन्य मामलों में उन्हें मिली उम्रकैद की सज़ा जारी थी.
फरवरी 2025 में, राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने सरस्वती विहार मामले में कुमार को एक और उम्रकैद की सज़ा सुनाई. उन्हें भीड़ के हमले में शामिल होने का दोषी ठहराया गया था, जिसमें कथित तौर पर एक पिता और पुत्र, जसवंत सिंह और तरनदीप सिंह को ज़िंदा जला दिया गया था. अभियोजन पक्ष ने कुमार के लिए मौत की सज़ा की मांग की थी. हालांकि अदालत ने उन्हें बुजुर्ग और स्वास्थ्य की स्थिति जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी.
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