मनुष्य जीवन का परम उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति है. इन चारों पुरुषार्थों को पाने के लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने अनेक तप, व्रत और अनुष्ठानों का विधान बताया है. इन्हीं में से एक अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी व्रत है भीष्म पंचक व्रत, जिसकी महिमा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने बताई है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को सच्चे मन और श्रद्धा से करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं, कष्टों का अंत होता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह व्रत कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक किया जाता है. वर्ष 2025 में यह व्रत 1 नवंबर (देवप्रबोधिनी एकादशी) से प्रारंभ होकर 5 नवंबर (पूर्णिमा) के दिन संपन्न होगा.
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मनुष्य जीवन का परम उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति है. इन चारों पुरुषार्थों को पाने के लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने अनेक तप, व्रत और अनुष्ठानों का विधान बताया है. इन्हीं में से एक अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी व्रत है भीष्म पंचक व्रत, जिसकी महिमा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने बताई है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत को सच्चे मन और श्रद्धा से करता है, उसके पाप नष्ट होते हैं, कष्टों का अंत होता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह व्रत कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक किया जाता है. वर्ष 2025 में यह व्रत 1 नवंबर (देवप्रबोधिनी एकादशी) से प्रारंभ होकर 5 नवंबर (पूर्णिमा) के दिन संपन्न होगा.
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