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भगवान की आरती करते हुए क्यों बजाई जाती है घंटी? कैसे शुरू हुई इसकी परंपरा, तिलक लगाने का क्या है महत्व? जानें धार्मिक-वैज्ञानिक कारण

पूजा के दौरान आरती करते हुए कई लोग घंटी बताजे है, लेकिन ऐसा क्यों किया जाता है?, पूजा में घंटी बजाने की परंपरा कब से शुरू हुई? इसके अलावा माथे तिलक क्यों लगाया जाता है? इसका क्या कारण हैं, अइये जानते हैं यहां इन सभी बातों से जुड़ी धार्मिक और वैज्ञानिक कारण और समझे यहां विस्तार में

Written By: Chhaya Sharma
Last Updated: 2025-12-11 16:16:13

आपने देखा होगा की पूजा में भगवान की आरती के दौरान घंटी बजाई जाती है, लेकिन इसके पीछे का क्या रहस्य है, आखिर क्यों लोग पूजा में आरती करते हुए घंटी बजाती हैं, यह सवाल आपके मन में भी जरूर उठा होगा, क्योंकि बेहद कम लोग जानते हैं ऐसा क्यों की जाती हैं, कई लोगो पूजा में घंटी दूसरों की देखा देखी बजाते हैं, उन्हें नहीं पता है कि आखिर भगवान की आरती करते समय घटी बजाने का क्या कारण है? आइये जानते हैं यहां सब विस्तार में

पूजा में घंटी बजाने को लेकर है कई मान्यताएं

वैसे तो पूजा में आरती के समय घंटी बजाने को लेकर हिंदू धर्म कई पौराणिक कथाएं भी काफी प्रचलित है और अनेकों मान्यताएं भी है. जैसे कही लिखा है कि पूजा में घंटी बजाने से मन शांत होता है और ध्यान लगता है. वही कई लोग ये भी कहते है कि पूजा में आरती के समय घंटी बजाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है. आइये जानते हैं यहां पूजा में भगवान की आरती के दौरान घंटी बजाने के पीछे की कहानी, साथ ही धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

घंटी में होता है भगवान गरुण का वास- कहानी

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, पूजा में भगवान की आरती करते हुए घंटी बजाने से  देवता जाग जाते हैं और भक्तों की मनोकामना सुनते हैं. कहा जाता हैं कि कलयुग में भगवान साक्षात रूप में नहीं आ सकते है, इसलिए वो प्रतिमा के रूप में रहकर अपने भक्तों पर दृष्टि बनाए रखते हैं. कथाओं के अनुसारा जब भगवान श्री नारायण प्रतिमा के रूप में धरती में आ रहे थे, तब गरुड़ ने उनसे प्रार्थना की, कि हमें भी अपनी सेवा के लिए साथ ले जाए. तब भगवान ने गरुड़ से कहा कि आप किसी न किसी रूप में मेरे साथ मेरी सेवा के लिए वहां उपस्थित ही रहेंगे, जिसके बाद गरुड़ ने घंटी का रूप धारण कर लिया. इसलिए माना जाता है कि घंटी में भगवान गरुण का वास होता है, नारायण के परम भक्त और वाहन माने जाते हैं. 

घंटी बजाने का धार्मिक कारण क्या है

मंदीरों में घर में भगवान की पूजा करते हुए, आरती करते हुए घंटे और घंटियां बजाई जाती हैं. इसके पीछे का कारण बेहद खास है. स्कंद पुराण के अनुसार घंटी बजाने से जो ध्वनि निकलती है, वह ‘ॐ’ की ध्वनि जैसी होती है, इसलिए कहा जाता है कि जब मंदिर में या फीर घर में पूजा के दौरान घंटी बजाता है तो उसको ‘ॐ’ उच्चारण के समान पुण्य प्राप्त होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान की मूर्तियों में चेतना जागृत करने के लिए घंटी बजाई जाती है और आरती करते हुए घंटी बजाने से पूजा का प्रभाव बढ़ जाता है. 

घंटी बजाने का वैज्ञानिक कारण क्या है 

घंटी बजाने का वैज्ञानिक कारण की बात करी जाए, तो घंटी की आवाज़ से वातावरण में कंपन होती है, जिससे एक विशेष प्रकार की तरंगे निकलती हैं, जो वायुमंडल में उपस्थित सभी हानिकारक सूक्ष्म जीवों और विषाणुओं को नष्ट करती हैं. इसके अलावा घंटी की आवाज से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा आती है. चिकित्सा विज्ञान के अनुसार घंटी की ध्वनि से व्यक्ति के मन, मस्तिष्क और शरीर की ऊर्जा अच्छी होती है. 

कब से शुरू हुई घंटी बजाने की परंपरा

घंटी बजाने की परंपरा लगभग 3000 ईसा पूर्व से है. कहा जाता है कि जब सृष्टि का सृजन हुआ उस समय एक आवाज गूंजी थी और घंटी की आवाज को उसी नाद का प्रतीक माना मानी जाती है. इसलिए बहुत ही प्राचीन समय से पूजा में आरती करते समय घंटी बजाने का प्रचलन शुरू हुआ, जो ध्यान आकर्षित करने और वातावरण को शुद्ध करने के लिए था. मंदीर में पूजा के दौरान घंची बजाना देवताओं को जगाने इंद्रियों को जगाने और वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने का प्रतीक होता है. घंटी की गोलाकार गति चेतना के निरंतर प्रवाह और ब्रह्मांडीय ऊर्जा को दर्शाती है. 

क्यों जलाया जाता है मंदिर में दीपक ? धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

मंदिर में दीपक (दीया) जलाना ईश्वर की उपस्थिति का संकेत होता है और दीपक देवताओं के प्रति सम्मान, प्रार्थनाओं के साक्षी के रूप में जलाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही ज्ञान और समृद्धि में वृद्धि होती है व अंधकार और अज्ञानता दूर होती है. दीपक जलाना शुभ कार्यों की शुरुआत करना और वातावरण को शुद्ध करने का प्रतिक मावा जाता है. पूजा में भगवान के सामने दीपक जलाने से पूजा सफल मानी जाती है. मंदिर में दीपक जलाने का वैज्ञानिक भी है. वैज्ञानिक दृष्टि के अनुसार गाय के घी का दीया जलाने वातावरण का शुद्ध होता है और से क्योंकि इसमें रोगाणुनाशक गुण होते है, अग्नि से निकलने वाली गर्मी और प्रकाश से सकारात्मक ऊर्जा का संचार और दीपक की लौ पर ध्यान केंद्रित करने से मानसिक एकाग्रता बढ़ती है.

माथे पर तिलक क्यों लगाया जाता है? धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

आपने देखा होता जब भी पूजा करने बैठते है, तो सबसे पहनेपंडिता या जो पूजा कर रहा कोई भी व्यक्ति माथे पर तिलक लगाता है. कहा जाता है कि पूजा में स्थित सभी लोगों को टीका जरूर लगवाना चाहिए. कहा जाता है कि यह मन को शांत रखता है, पूजा मे एकाग्रता को बढ़ाता है और दैवीय आशीर्वाद दिलाता है, जिससे सभी कार्य सफल होते हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं भी दूर हो जाती है.

माथे पर तिलक लगाने का धार्मिक कारण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माथे पर तिलक लगाना ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक होता है. इसके अवाला माथे पर तिलक लगाना आज्ञा चक्र को सक्रिय करना आध्यात्मिक चेतना जगाना और मानसिक शांति लाना का भी तरीका है, जिससे जीवन में सौभाग्य आता है।

माथे पर तिलक लगाने का वैज्ञानिक कारण

माथे पर तिलक लगाने का वैज्ञानिक कारण भी है, माथे के बीचों-बीच जहा तिलक लगाया जाता है, उस स्थान को ‘आज्ञाचक्र’ कहा जाता है, जो मस्तिष्क का एक महत्वपूर्ण तंत्रिका बिंदु होता है और एकाग्रता व स्मृति से जुड़ा है. मानव शरीर विद्युत-चुंबकीय तरंगों के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित करता है और तिलक इस ऊर्जा के क्षय को रोकने में मदद करता है. इसके अलावा कुमकुम या फिर चंदन तिलक माथेपर दबाव डालकर स्नायु तंत्र को शांत करता है. जिससे तनाव नहीं होता है और सिरदर्द से राहत मिलती है. इसके अलाव कुमकुम, चंदन, हल्दी जैसी सामग्रियों में एंटीसेप्टिक (Antiseptic) और ठंडक देने वाले गुण होते हैं, जिनका तिलक लगाने से स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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