BSEB Science Topper 2026: बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा के नतीजे आज घोषित कर दिए गए हैं, जिसमें समस्तीपुर ज़िले के रहने वाले आदित्य प्रकाश अमन साइंस स्ट्रीम में टॉपर बनकर उभरे हैं. यह खबर मिलते ही उनके स्कूल और घर, दोनों जगह जश्न का माहौल छा गया. यह बात ध्यान देने लायक है कि आदित्य प्रकाश अमन के पिता एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां, रिंकू कुमारी, एक गृहिणी हैं.
ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि आदित्य प्रकाश अमन कौन हैं उन्होंने कितने अंक प्राप्त किये और कहां से पढ़ाई की. 12वीं को लेकर उन्होंने क्या रणनीति बनाई थी, जिसके कारण उन्हें सफलता मिली और बेटे के टॉप करने पर उनकी मां ने क्या कहा.
कौन हैं आदित्य प्रकाश अमन?
आदित्य प्रकाश अमन समस्तीपुर ज़िले के रहने वाले हैं. उनके पिता एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां, रिंकू कुमारी, एक गृहिणी हैं. आदित्य बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार रहे हैं; इसी लगन की बदौलत उन्होंने पूरे बिहार राज्य में पहला स्थान हासिल करके समस्तीपुर ज़िले का नाम रोशन किया है. साइंस टॉपर आदित्य प्रकाश अमन ने कुल 481 अंक हासिल किए हैं.
आदित्य प्रकाश अमन कितने अंक प्राप्त हुए?
आदित्य प्रकाश अमन ने बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट साइंस परीक्षा (2026) में कुल 481 अंक हासिल किए. उनके शानदार प्रदर्शन ने उन्हें पूरे बिहार राज्य में (साइंस स्ट्रीम में) पहला स्थान दिलाया है. आदित्य का भविष्य का लक्ष्य एक सफल डॉक्टर बनना और देश की सेवा करना है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के आशीर्वाद और अपने शिक्षकों द्वारा दिए गए सही मार्गदर्शन को दिया है.
अमन ने अपनी शुरुआती शिक्षा (कक्षा 6 से कक्षा 10 तक) सिमुलतला आवासीय विद्यालय से पूरी की. अपनी कक्षा 10 की परीक्षाओं के दौरान भी उन्हें सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था; हालांकि, उस समय वह शीर्ष 10 रैंकों में जगह बनाने से बाल-बाल चूक गए थे. आज, कक्षा 12 में राज्य टॉपर बनकर उन्होंने अपनी माँ का सपना सफलतापूर्वक पूरा कर दिया है.
आदित्य प्रकाश अमन ने पैपर के लिए कैसे तैयारी की
अमन ने कहा कि जीवन के सफर में उतार-चढ़ाव आना लाज़मी है, और इसी रास्ते से गुज़रते हुए वह अपनी मौजूदा मंज़िल तक पहुंचे हैं. नतीजे घोषित होने पर उन्होंने अपार खुशी ज़ाहिर की और बताया कि उनकी मां की आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे. आदित्य प्रकाश ने बताया कि अपनी कड़ी मेहनत और परीक्षा के दौरान लिखे गए जवाबों की गुणवत्ता को देखते हुए, उन्हें पूरा भरोसा था कि वे निश्चित रूप से टॉप 10 रैंक में अपनी जगह बना लेंगे.
आदित्य का पक्का मानना है कि इंसान को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ लगातार मेहनत करते रहना चाहिए, और अंतिम परिणाम भगवान के हाथों में छोड़ देना चाहिए. आदित्य ने आगे बताया कि उनकी तैयारी की रणनीति के मुख्य आधार ‘सेल्फ-स्टडी’ (खुद से पढ़ाई) और निरंतरता थे. किसी बड़े कोचिंग संस्थान पर निर्भर रहने के बजाय, उन्होंने अपने स्कूल के शिक्षकों के सहयोग और घर पर रोज़ाना 7–8 घंटे की अनुशासित पढ़ाई पर भरोसा किया. मुश्किल विषयों के लिए, उन्होंने डिजिटल संसाधनों का भी समझदारी से इस्तेमाल किया.
अपने बेटे के टॉपर बनने पर उनकी मां ने क्या कहा?
अमन की मां कहती हैं कि आदित्य बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बहुत होशियार रहा है. आज हमें बहुत अच्छा लग रहा है, यह देखकर कि उसकी कड़ी मेहनत आखिरकार रंग लाई है. आदित्य ने सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया, और उसके पिता ने भी उसकी पढ़ाई में उसकी मदद की. आदित्य की मां, रिंकू कुमारी, याद करते हुए बताती हैं कि 10वीं कक्षा की परीक्षाओं के दौरान भी उसे वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था, हालांकि उस समय वह टॉप टेन की सूची में जगह नहीं बना पाया था. फिर भी, हमने लगातार उसका हौसला बढ़ाया, उसे यकीन दिलाया कि वह सचमुच एक टॉपर है और उस हौसलाअफज़ाई का ही नतीजा है कि आज, वह सचमुच एक टॉपर बन गया है.