Monsoon 2026 Forecast: मौसम विभाग ने दक्षिण पश्चिम मानसून से पहले गहरी चिंता व्यक्त की है. दरअसल, 2026 के मानसून सीजन के लिए अपना पूर्वानुमान जारी किया है. जिसमें कहा गया है कि इस साल बारिश सामान्य से 8 प्रतिशत कम रह सकती है.
इस बार मानसून में सामान्य से 8 प्रतिशत कम बारिश होगी
Monsoon 2026 Forecast: दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में भीषण गर्मी का कहर शुरू हो गया है. लोग अभी से ही बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं. इस बीच, मौसम विभाग ने मानसून को लेकर एक चिंताजनक अपडेट जारी किया है. मौसम विभाग ने इस पूरे मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए 2026 के मानसून सीजन के लिए अपना पूर्वानुमान जारी किया है.
मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति ‘सामान्य’ से थोड़ी धीमी हो सकती है और कुल बारिश ‘दीर्घकालिक औसत’ (LPA) का केवल 92% रहने का अनुमान है.
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल बारिश सामान्य से 8 प्रतिशत कम रहने की उम्मीद है. इसके पीछे की वजह अल नीनो को बताया जा रहा है. शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि इस साल देश के कई हिस्सों में बादल उतने मेहरबान नहीं हो सकते, जितनी शुरू में उम्मीद थी. हालांकि, मौसम विभाग मई में एक अपडेटेड पूर्वानुमान जारी करने वाला है.
मौसम विभाग के अनुसार, जून और सितंबर के बीच आने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसून में इस साल सामान्य से कम बारिश हो सकती है. पूरे देश में औसत मानसून बारिश ‘दीर्घकालिक औसत’ (LPA) का 92% रहने का अनुमान है. आईएमडी के अनुसार, 96% और 104% के बीच रहने वाली बारिश को ‘सामान्य’ श्रेणी में रखा जाता है.
मौसम विभाग ने चेतावनी देते हुए बताया कि मानसून सीजन के दौरान प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जो बारिश को कमज़ोर करने में एक बड़ा कारक बन सकता है. जहां उत्तर-पश्चिम भारत, पूर्वोत्तर और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है, वहीं मध्य भारत और देश के कई अन्य क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रहने की बहुत अधिक संभावना है.
IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि हमारा अनुमान है कि जून तक अल नीनो की स्थिति तटस्थ बनी रहेगी. हालांकि, चिंता इस बात की है कि मानसून पर इसका सबसे ज़्यादा असर अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान महसूस किया जाएगा. भारत में ज्यादातर खरीफ फसलों की बुवाई आमतौर पर जून और जुलाई के महीनों में होती है. जिसको देखते हुए हमें उम्मीद है कि इस वर्ष के दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम में औसत से कम बारिश का प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा.
महिला के भड़कने पर बस ड्राइवर ने भी मनचले की जमकर धुनाई कर दी. यह…
Prahlad Joshi Education Qualification: पूरे भारत में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच धर्मेंद्र प्रधान का…
पत्नी की लाश को नलकूप पर छोड़कर पति सीधा थाने पहुंचा और वहां पुलिस के…
Tara Begum: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में तारा बेगम अपने बेटे की मौत के…
Who Is Gen Z: चाहे काम की जगह पर होने वाली बहस हो, सोशल मीडिया…
Abhishek Sharma Record: जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में भले ही अभिषेक शर्मा फ्लॉप…