IIT Kanpur Suicide Case: आईआईटी कानपुर में एक PhD छात्र की आत्महत्या के बाद छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने एक अहम कदम उठाया है.
IIT Kanpur Suicide Case: देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में से एक IIT कानपुर में हाल ही में सामने आई एक दुखद घटना ने एक बार फिर उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस हफ्ते की शुरुआत में एक PhD स्कॉलर द्वारा बिल्डिंग से कूदकर जान देने की घटना के बाद शिक्षा मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामले की गहन समीक्षा के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है.
बीते चार महीनों में IIT कानपुर में यह तीसरी छात्र आत्महत्या की घटना बताई जा रही है. लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने न केवल संस्थान प्रशासन, बल्कि नीति-निर्माताओं और समाज को भी झकझोर कर रख दिया है. छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, मानसिक तनाव और सहायता तंत्र की प्रभावशीलता अब चर्चा के केंद्र में आ गई है.
शिक्षा मंत्रालय द्वारा गठित इस कमेटी की अध्यक्षता नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम (NETF) के चेयरमैन अनिल सहस्रबुद्धे करेंगे. पैनल में मूलचंद अस्पताल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल और शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी शामिल किया गया है. यह कमेटी आत्महत्या की घटनाओं से जुड़े हालात, संस्थान की आंतरिक नीतियों, शिकायत निवारण प्रणाली, काउंसलिंग सुविधाओं और अन्य छात्र सहायता व्यवस्थाओं की विस्तार से जांच करेगी.
कमेटी को यह भी परखने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है कि क्या IIT कानपुर छात्रों की भावनात्मक और मानसिक भलाई को लेकर शिक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2023 में जारी किए गए फ्रेमवर्क दिशानिर्देशों का सही तरीके से पालन कर रहा है या नहीं. इस समीक्षा के दौरान मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मौजूदा ढांचे में मौजूद कमियों, सुधार की ज़रूरत वाले क्षेत्रों और बेहतर हस्तक्षेप के उपायों की पहचान की जाएगी.
कमेटी का उद्देश्य केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह मंत्रालय को ऐसे व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव भी देगी, जिससे भविष्य में छात्रों को समय पर मानसिक सहायता मिल सके और ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके.
शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि यह कमेटी 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और नीतिगत सुधारों पर फैसला लिया जाएगा. यह पहल इस बात का संकेत है कि अब उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत को प्राथमिकता देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि प्रतिभा दबाव में न टूटे, बल्कि सुरक्षित माहौल में आगे बढ़ सके.
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