JEE IIT Success Story: आंध्र प्रदेश के 17 वर्षीय एक लड़के ने कड़ी मेहनत से JEE Advanced में AIR 85 हासिल करके IIT बॉम्बे में दाखिला पाने में कामयाब रहे हैं.
JEE IIT Success Story: आंध्र प्रदेश के अमलापुरम के रहने वाले 17 वर्षीय छात्र भरद्वाज तोराटी (Bharadhwaj Torati) ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धि हासिल की है. एक साधारण किसान परिवार से आने वाले भरद्वाज ने JEE Advanced 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए AIR 85 रैंक हासिल की और अब उन्हें IIT बॉम्बे के कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में एडमिशन मिल गया है. उनका यह सफर लगातार मेहनत, अनुशासन और सही रणनीति का बेहतरीन उदाहरण है.
भरद्वाज ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अमलापुरम के सर सी.वी. रमन स्कूल से की. यहां उन्होंने 10वीं कक्षा में 600 में से 558 अंक हासिल कर करीब 93 प्रतिशत स्कोर किया. इसके बाद उन्होंने विजयवाड़ा के नारायणा जूनियर कॉलेज में दाखिला लिया, जहां 12वीं कक्षा में उन्होंने 989/1000 (98.9 प्रतिशत) अंक प्राप्त किए. यहीं से उन्होंने JEE की तैयारी को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया.
भरद्वाज का मानना है कि JEE जैसी परीक्षा में सफलता पाने के लिए आखिरी समय में रटने से काम नहीं चलता. उनके अनुसार, नियमित अभ्यास और कॉन्सेप्ट की गहरी समझ ही असली सफलता की कुंजी है. वे कहते हैं कि अगर कोई टॉपिक पूरी तरह समझ में नहीं आता था, तो वे तब तक आगे नहीं बढ़ते थे जब तक उसे अच्छे से समझ न लें. उनका फोकस कम विषयों को सही तरीके से समझने पर था, न कि हर चीज को जल्दी-जल्दी पढ़ने पर.
JEE की तैयारी के दौरान भरद्वाज का रोज़ का शेड्यूल काफी अनुशासित था. वे लगभग 12 घंटे पढ़ाई करते थे और बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेकर अपने दिमाग को ताज़ा रखते थे. उन्हें खास तौर पर Inorganic Chemistry चुनौतीपूर्ण लगती थी, क्योंकि इसमें काफी हद तक याददाश्त की जरूरत होती है. लेकिन उन्होंने लगातार अभ्यास और बार-बार सवाल हल करके इस विषय पर भी मजबूत पकड़ बना ली.
शुरुआत में भरद्वाज हर सवाल को क्रम से हल करने की कोशिश करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी. उन्होंने पहले आसान सवालों को हल करना और कठिन सवालों को बाद में देखने का तरीका अपनाया. इस रणनीति ने उन्हें परीक्षा के दबाव को बेहतर तरीके से संभालने और अपने अंक बढ़ाने में काफी मदद की.
भरद्वाज ने अलग-अलग नोट्स बनाने के बजाय NCERT की किताबों, क्लास नोट्स और नारायणा कॉलेज के स्टडी मटीरियल पर भरोसा किया. उनका मानना है कि बहुत सारे संसाधन इकट्ठा करने के बजाय भरोसेमंद सामग्री को अच्छी तरह समझना ज्यादा जरूरी होता है.
भरद्वाज की मां पुष्पावती गृहिणी हैं, जबकि उनके पिता शिवा रामम किसान हैं. वह अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार के समर्थन और विश्वास को देते हैं. आज IIT बॉम्बे में पढ़ते हुए भरद्वाज मानते हैं कि अमलापुरम से यहां तक का सफर सिर्फ पढ़ाई की उपलब्धि नहीं, बल्कि हिम्मत, स्मार्ट वर्क और लगातार प्रयास की कहानी है, जो यह साबित करती है कि मेहनत से कोई भी सपना सच हो सकता है.
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