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NEET PG 2026: नीट पीजी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जारी किया नोटिस? जानिए क्या है पूरा मामला

NEET PG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG 2025-26 कट-ऑफ में की गई भारी कमी को चुनौती देने वाली PIL पर नोटिस जारी किया है.

NEET PG 2026: सुप्रीम कोर्ट ने NEET PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल में की गई भारी कटौती को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर मंगलवार को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई की तारीख शुक्रवार 13 फरवरी 2026 तय की है. इस फैसले के बाद मेडिकल छात्रों और शिक्षा जगत में बहस और तेज़ हो गई है.

किस नोटिफिकेशन को दी गई है चुनौती?

यह याचिका नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी नोटिफिकेशन के खिलाफ दायर की गई है. इस नोटिफिकेशन में NEET PG काउंसलिंग के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल को सभी कैटेगरी में काफी कम कर दिया गया था. इसमें जीरो पर्सेंटाइल और यहां तक कि नेगेटिव मार्क्स पाने वाले उम्मीदवारों को भी योग्य मानने का प्रावधान शामिल है, जिसे लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं.

NEET PG कट-ऑफ विवाद आखिर है क्या?

NEET PG परीक्षा के बाद मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों के आवंटन की प्रक्रिया संभालती है. NBEMS द्वारा कट-ऑफ घटाने का तर्क यह दिया गया कि बड़ी संख्या में PG मेडिकल सीटें खाली रह जा रही थीं. हालांकि, छात्रों और मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला अब तक लागू रहे योग्यता-आधारित चयन प्रणाली के खिलाफ है और इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है.

याचिका में क्या दलीलें दी गई हैं?

याचिका में कहा गया है कि क्वालिफाइंग कट-ऑफ में इतनी बड़ी ढील देना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम मानकों को कमजोर करता है. याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया है कि इससे:
मेडिकल ट्रेनिंग की गुणवत्ता प्रभावित होगी
मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है
नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 का उल्लंघन होता है

इसके अलावा, याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के खिलाफ बताया गया है.

सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई है?

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि 13 जनवरी 2026 के NBEMS नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए. साथ ही NEET PG एडमिशन प्रक्रिया में न्यूनतम क्वालिफाइंग मानकों की रक्षा और मेडिकल शिक्षा में योग्यता आधारित चयन प्रणाली को कमजोर होने से भी रोका जाए.

अब सभी की नजरें 13 फरवरी 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सुप्रीम कोर्ट इस अहम मुद्दे पर आगे की दिशा तय करेगा. यह फैसला देश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

Munna Kumar

11+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल में SEO-आधारित कंटेंट, डेटा इनसाइट्स और प्रभावी स्टोरीटेलिंग में विशेषज्ञ. रणनीति, क्रिएटिविटी और टेक्निकल स्किल्स के साथ उच्च-गुणवत्ता, आकर्षक और विश्वसनीय कंटेंट तैयार करना शामिल है. अभी इंडिया न्यूज में कार्यरत हूं. इससे पहले नेटवर्क18, जी मीडिया, दूरदर्शन आदि संस्थानों में कार्य करने का अनुभव रहा है.

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