School Education News: कर्नाटक के चिंतामणि स्थित रेजिडेंशियल स्कूल में 10वीं की छात्रा के गर्भवती पाए जाने से हड़कंप मच गया, जिसके बाद लापरवाही के आरोप में प्रिंसिपल और हॉस्टल वार्डन को सस्पेंड कर दिया गया है.
School Education News: कर्नाटक के चिंतामणि तालुका स्थित कित्तूर रानी चेन्नम्मा रेजिडेंशियल स्कूल से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां कक्षा 10वीं की एक छात्रा के गर्भवती पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया. मामले की जानकारी मिलते ही कर्नाटक रेजिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस सोसाइटी (KREIS) के डायरेक्टर पी. एस. कंथाराजू ने तत्काल सख्त कदम उठाते हुए स्कूल की प्रिंसिपल डी. वी. नागरत्नम्मा और इंचार्ज हॉस्टल वार्डन बी. एस. सविथाकुमारी को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया. यह कार्रवाई छात्र सुरक्षा और निगरानी में हुई कथित लापरवाही को लेकर की गई है.
आदेश में साफ कहा गया है कि दोनों अधिकारियों पर ड्यूटी में लापरवाही का आरोप है. यह मामला तब उजागर हुआ जब स्कूल स्टाफ ने छात्रा के शरीर में असामान्य बदलाव महसूस किए. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्थिति को गंभीरता से लेते हुए छात्रा के माता-पिता की मौजूदगी में उसे चिंतामणि सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां मेडिकल जांच में उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई. इस घटना के बाद स्कूल और हॉस्टल प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे.
KREIS द्वारा 2022 में तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, रेजिडेंशियल स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों द्वारा किया जाना अनिवार्य है. इसके अलावा, छुट्टियों से लौटने के बाद मेडिकल चेकअप भी नियमों में शामिल है. जांच में सामने आया कि इस स्कूल में इन नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया गया, जिसकी वजह से समय रहते छात्रा की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा सका.
KREIS डायरेक्टर द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि छात्राओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और निगरानी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यही वजह है कि प्रारंभिक जांच के आधार पर प्रिंसिपल और हॉस्टल वार्डन को सस्पेंड किया गया है. फिलहाल छात्रा की देखरेख मेडिकल और पारिवारिक स्तर पर की जा रही है. प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई होगी.
यह घटना रेजिडेंशियल स्कूलों में निगरानी, स्वास्थ्य जांच और छात्र सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की मांग करती है. छात्राओं की सुरक्षा केवल नियमों से नहीं, बल्कि उनके सख़्त और ईमानदार पालन से सुनिश्चित की जा सकती है.
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