UGC Kya New Guidelines: उच्च शिक्षा में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए UGC के नए नियम अब विवादित हो गए हैं. सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर उनके एक प्रावधान को असंवैधानिक बताया गया.
UGC New Guidelines: उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा बनाए गए नए नियम अब कानूनी और सामाजिक बहस का केंद्र बन गए हैं. इन नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें इनके एक अहम प्रावधान को असंवैधानिक बताया गया है.
यह याचिका “हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस में इक्विटी को बढ़ावा देने वाले रेगुलेशन, 2026” के सेक्शन 3(C) के खिलाफ दाखिल की गई है. यह नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था. याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह प्रावधान मनमाना और भेदभावपूर्ण है, जिससे कुछ वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर किए जाने का खतरा पैदा हो सकता है.
याचिका में कहा गया है कि नियम 3(C) संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है. साथ ही यह भी तर्क दिया गया है कि यह प्रावधान UGC अधिनियम, 1956 की भावना के खिलाफ है, जिसका उद्देश्य सभी छात्रों को समान अवसर देना है.
UGC के नए रेगुलेशन के तहत सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को समान अवसर केंद्र, इक्विटी कमेटियां, 24×7 हेल्पलाइन और इक्विटी स्क्वॉड स्थापित करना SC, ST और OBC छात्रों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए अनिवार्य होगा. नियमों का पालन न करने पर संस्थानों को मान्यता और फंडिंग खोने तक का जोखिम हो सकता है.
इन नियमों को लेकर खासतौर पर जनरल कैटेगरी के छात्रों में नाराज़गी देखी जा रही है. उनका कहना है कि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर कार्रवाई से जुड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं. इक्विटी कमेटियों में जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है. “भेदभाव” की परिभाषा बहुत व्यापक है, जिससे सामान्य बातचीत भी जांच के दायरे में आ सकती है.
नियमों के विरोध में सोशल मीडिया पर #UGCRollback जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं. छात्र संगठनों का कहना है कि यह ढांचा समानता लाने के बजाय नई असमानता पैदा कर सकता है.
UGC ने इन नियमों को सही ठहराते हुए 2020 से 2025 के बीच बढ़ी भेदभाव संबंधी शिकायतों और रोहित वेमुला व पायल तडवी जैसे मामलों का हवाला दिया है. आयोग का कहना है कि यह कदम न्यायालयों के निर्देशों और सामाजिक ज़िम्मेदारी के तहत उठाया गया है.
अब यह देखना अहम होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस नियम की संवैधानिक वैधता पर क्या रुख अपनाता है. फैसला जो भी हो, इसका असर देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था और लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा.
khatron ke khiladi 15 winner Avinash Mishra: रोहित शेट्टी के शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’…
Dhirendra Shastri Appeal: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं…
Assam espionage case: असम पुलिस की STF ने गुवाहाटी से बिहार निवासी 31 वर्षीय अभिषेक…
Delivery boy assaulted: सिकंदराबाद के वासवी नगर में खाना पहुंचाने में देरी को लेकर Zomato…
Premanand Maharaj Ashram: वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य बताए जा रहे दीपक लोधी उर्फ…
Salman Khan controversy: बिग बॉस 20’ के ‘वीकेंड का वार’ में अपना नाम लिए जाने…