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हाथ में चाय की गिलास हो, शूटिंग करता रहूं और गिर जाऊं, फिर…. जब अमजद खान ने जाहिर की थी अंतिम इच्छा

Amjad Khan: फिल्म 'शोले' में गब्बर सिंह के किरदार ने अमजद खान को बहुत ज़्यादा शोहरत दिलाई और उनके करियर को एक बिल्कुल ही अलग मुकाम पर पहुंचा दिया था. अभिनेता अब इस दुनिया में तो नहीं हैं, लेकिन एक बार उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा जाहिर की थी.

सिनेमाई दुनिया में ऐसे बहुत कम कलाकार होते हैं, जो किसी भी किरदार को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लेते हैं. कुछ ऐसे ही थे अभिनेता अमजद खान. उन्हें लोग उनके नाम से नहीं, बल्कि ‘शोले’ में ‘गब्बर सिंह’ के किरदार से जानते थे. उस भूमिका ने दर्शकों के मन में ऐसी छाप छोड़ी थी कि लोगों को उन्हें किसी और भूमिका में देखना मुश्किल हो गया था. वे जहां भी जाते थे, लोग उन्हें ‘गब्बर सिंह’ कहकर ही पुकारते थे. 1992 में अमजद खान ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. लेकिन क्या आपको पता है कि एक्टर की मरने से पहले अंतिम इच्छा क्या थी, जिसका जिक्र उन्होंने एक इंटरव्यू में किया था. 

क्या थी अंतिम इच्छा?

एक इंटरव्यू के दौरान अमजद खान से पत्रकार ने पूछा कि जीवन के अंतिम समय में वह अपने आपको किस हालत में देखना चाहते हैं. और किस तरह से मरना पसंद करेंगे. इस पर अभिनेता ने जवाब दिया कि वह चाहते हैं कि उनके हाथ में चाय की ग्लास हो दूसरे हाथ में पेंशन की सिगरेट हो. इसके अलावा उन्होंने कहा कि मेरे बच्चे मेरे चारों तरफ हो और मैं शूटिंग करता रहूं और गिर जाऊं. फिर कभी ना उठूं. 

एक नजर अमजद खान के करिय पर

अमजद खान के कुछ सबसे यादगार किरदार, जिन्होंने एक अभिनेता के रूप में उनकी बहुमुखी प्रतिभा को साबित किया. इस लिस्ट में ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘कुरबानी’, ‘याराना’, ‘लव स्टोरी’ और ‘उत्सव’ जैसे फिल्में शामिल हैं. एक बेहतरीन अभिनेता होने के अलावा, अमजद खान एक नेकदिल इंसान भी थे. उन्होंने फिल्म जगत में कभी किसी के बारे में बुरा नहीं कहा और हमेशा लोगों की मदद करने के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास किया. 

कब और कैसे हुआ था निधन?

अमजद खान का निधन 27 जुलाई, 1992 को, महज़ 51 साल की उम्र में हो गया था. उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई थी. उनके निधन की खबर  से हर कोई स्तब्ध हो गया था. हिंदी सिनेमा के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका था, क्योंकि लोगों ने, हर दौर के सबसे बहुमुखी अभिनेताओं में से एक को खोने के बाद, भारी मन से कहा, ‘सो जा बेटा, अब गब्बर नहीं आएगा.’

Kamesh Dwivedi

पिछले चार वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्यरत. जी न्यूज और अमर उजाला डिजिटल में सेवाएं दे चुके हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई. वायरल-ट्रेंडिंग कंटेंट के साथ मनोरंजन की खबरों में रुचि. क्रिकेट, राजनीति के अलावा कविताएं लिखने और पढ़ने का भी शौक है.

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