Arun Govil Birthday: 30 साल पहले आई रामानंद सागर की ऐतिहासिक धारावाहिक 'रामायण' में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले अरुण गोविल आज 68वां जन्मदिन है. आइये जानते हैं यहां आज उनके जन्मदिन पर उनके जीवन से जुड़ी दिलचस्प बातें
Arun Govil Birthday
Reel-Life Ram Arun Govil’s Untold Reality: 30 साल पहले आई रामानंद सागर की 'रामायण' में भगवान राम का रोल निभाने वाले अरुण गोविल को आज तक कोई नहीं भूल पाया है, लोग उन्हें अभी भी भगवान मानकर पूजते हैं. लेकिन अरुण गोविल के लिए रामानंद सागर की रामायण में राम बनना वरदान भी था और एक अभिशाप भी. जिस चेहरे को लोगों ने भगवान राम समझकर पूजा, उसी इंसान को असल जिंदगी में कई बार जज किया गया, लोगों से ताने मिले और काम से भी दूर कर दिया गया.
यह बात बेहद कम लोग लोग जानते हैं कि अरुण गोविल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं और वो महज 17 साल की उम्र में मुंबई आए थे एक सपना लेकर कि कुछ ऐसा करेंगे जिससे लोग उन्हें कभी भी भूल न पाएंगें. फिल्मों और टीवी में पहचान बनाने का उनमे जुनून था, लेकिन यह रास्ता आसान नहीं था. एक्टर का करियर धीमी रफ्तार से आगे बढ़ा. वह कई भूली-बिसरी फिल्मों में नजर आए और दूरदर्शन के शो 'विक्रम और बेताल' में लीड रोल में भी दिखाई दिए.
इसके बाद अरुण गोविल को रामानंद सागर की 'रामायण' में काम करने का मौका मिला. उन्हें सहज, सरल और धाराप्रवाह संस्कृत-हिंदी उच्चारण, और उनकी स्वाभाविक मुस्कान की वजह से इस रोमल के लिए चुना गया था. हालांकि शुरुआती ऑडिशन में वह रिजेक्ट हो गए थे और उन्हें भरत या लक्ष्मण का रोल ऑफर किया गया था; लेकिन राजकुमार बड़जात्या ने अरुण गोविल की मुस्कान को सही इस्तेमाल करने की सलाह दी, जिससे उन्हें यह प्रतिष्ठित भूमिका मिली और उन्होंने अपने किरदार से घर-घर में 'राम' के रूप में लोकप्रिय हासिल की. लोग उन्हें भगवान मानकर पूजा करने लगे. उनके सामने सिर झुकाने लगे, चरण छूने लगे, यह लोकप्रियता किसी सुपरस्टार से कहीं ऊपर थी, क्योंकि उनके प्रति लोगों की यह भक्ति थी.
लेकिन अरुण गोविल के लिए लोगों के बीच की इस दिव्य छवि की कीमत भी थी. दरअसल एक बार किसी ने उन्हें सिगरेट पीते हुए देख लिया, जिसके बाद उनके खिलाफ तगड़ा विरोध शुरू हो गया था. “भगवान राम धूम्रपान कैसे कर सकते हैं?” लोग भूल गए कि अरुण गोविल सिर्फ एक कलाकार हैं और सिर्फएक इंसान हैं. इसके बाद अरुण गोविल को अपने ही व्यवहार पर सफाई देनी पड़ी. सबसे बड़ा झटका तो रुण गोविल जब लगा तब फिल्ममेकरों ने उन्हें कास्ट करना बंद कर दिया. फिल्ममेकर्स का कहना था कि “आप राम हैं, आपको किसी और रोल में कैसे दिखाएं?”. ऐसे में अरुण गोविल को जिस किरदार ने उन्हें अमर बनाया, उसी ने उनकी एक्टिंग रेंज पर ताला लगा दिया. फिल्मों में हीरो, विलेन या आम इंसान जैसा कोई भी रोल उन्हें सूट नहीं करता था, क्योंकि दर्शक सिर्फ राम के किरदार में देखना चाहते थे. अरुण गोविल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में भी इस बात को स्विकारा है कि यह दौर उनके लिए बेहद कठिन था. एक तरफ अपार सम्मान, दूसरी तरफ करियर का ठहराव. जहां लोग उनके पैर छूते थे, वहीं इंडस्ट्री में लोगों ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया था. लेकिन इन सबके बाद भी, अरुण गोविल के चेहरे पर कभी शिकायत नहीं दिखी. उनका कहना है कि रामायण ने उन्हें जो प्रेम दिया, वह किसी भी अवॉर्ड या फिल्म से बड़ा है. 'रामायण' के बाद अरुण गोविल 'लव कुश', 'विश्वामित्र' और 'जय वीर हनुमान' जैसे कई दूसरे टेलीविजन शो में दिखे, जहां उन्हें पौराणिक रोल निभाते देखा गया.
बाद में अब अरुण गोविल राजनीति में सक्रिय है, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जुड़कर राजनीति में कदम रखा. 2024 में वे उत्तर प्रदेश के मेरठ लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने. अब वे संसद में एक जनप्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे हैं. अरुण गोविल अब सोशल मीडिया और मंचों के जरिए धर्म, संस्कृति, राष्ट्र और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार रखते हैं.
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