संगीत या सिर्फ फूहड़ता? शिल्पी राज के 'एक दू तीन' और 'बिछुआ' गानों ने खोली भोजपुरी इंडस्ट्री की पोल. क्या व्यूज के लिए संस्कृति को बेचना सही है? खुद देख लीजिए...
भोजपुरी भाषा, जिसकी जड़ें बेहद समृद्ध रही हैं, कह सकते हैं कि समय के साथ आज डिजिटल युग में अपनी पहचान खोती जा रही है, शिल्पी राज के हालिया ट्रैक इस गिरावट के ताजा उदाहरण में से एक है. 18 जनवरी को रिलीज हुए ‘एक दू तीन’ गाने में भर भर कर द्विअर्थी शब्द आपको मिलेंगे. विडंबना यह है कि आजकल के युवा इस वीडियो पर कमेंट करके लिख रहे हैं कि यह वीडियो बवाल है… गाना बवाल है…
आपको बताते चलें कि शिल्पी राज का यह गाना होली को रिप्रेजेंट कर रहा है. होली जैसा पवित्र त्योहार, जो रंगों और भाईचारे का प्रतीक है, उस संस्कृति को ‘एक दू तीन’ जैसे गानों के जरिए खराब करने की कोशिश की जा रही है? जब गाने के बोल और फिल्मांकन में शालीनता की जगह द्विअर्थी संवाद (Double Meaning) ले लेते हैं, तो वह संगीत नहीं बल्कि केवल व्यूज बटोरने का एक सस्ता जरिया बन जाता है. वही आपको इस गाने में देखने को मिलेगा.
यही नहीं 8 जनवरी को रिलीज हुआ गाना ‘बिछुआ’ भी शिल्पी राज द्वारा ही गाया गया है. और इसमें भी लोगों का भर भरकर यही कमेंट है की यह गाना जबरदस्त है. और इस गाने के वीडियो ने व्यूज भी खूब बटोरे हैं. भले ही प्रशंसक इसे ‘जबरदस्त’ कहें, लेकिन गौर से देखने पर पता चलता है कि यहां कला से ज्यादा जोर अंग-प्रदर्शन और भड़काऊ डांस मूव्स पर दिया है. रिया राव के डांस स्टेप्स और गाने के बोलों में जो ‘फूहड़ता’ झलकती है, वह परिवार के साथ बैठकर सुनने लायक तो बिलकुल नहीं है.
यूट्यूब कमेंट्स में यूजर्स विजय चौहान को ‘भोजपुरी बाहुबली’ और ‘ग्लोबल स्टार’ जैसे टैग दे रहे हैं. यह विडंबना ही है कि जिस इंडस्ट्री को अपनी विरासत और मर्यादा के लिए पहचाना जाना चाहिए था, वहाँ ‘आग लगाने वाले’ गानों को सफलता का पैमाना माना जाता है. जब तक श्रोता इस तरह की अश्लीलता को ‘ब्लॉकबस्टर’ कहते रहेंगे, मेकर्स गंदगी परोसना बंद नहीं करेंगे.
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