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दुर्गा खोटे: वह पहली पढ़ी-लिखी एक्ट्रेस, जिन्होंने ‘बदनामी’ के डर को छोड़ सिनेमा को बनाया महान

दुर्गा खोटे भारतीय सिनेमा की First Educated Actress थी. 26 की उम्र में Widowed होने के बाद, उन्होंने बच्चों के लिए फिल्मों में कदम रखा. उस दौर में एक्टिंग को Prostitution जैसा बुरा माना जाता था. उन्होंने अपनी Dignity से समाज की सोच बदली और 200 फिल्मों में काम कर Superstar बनीं .

First Educated Actress : आज हम फिल्मों में काम करने वाली हीरोइनों को बहुत सम्मान देते है, लेकिन 100 साल पहले ऐसा नहीं था. उस दौर में फिल्मों में काम करना समाज में बहुत बुरा माना जाता था. ऐसी मुश्किल घड़ी में दुर्गा खोटे ने सिनेमा की दुनिया में कदम रखा और इसे एक सम्मानित पेशा बनाया. 

18 में शादी और 26 की उम्र में बड़ा संकट
दुर्गा खोटे एक बहुत ही पढ़े-लिखे और अमीर परिवार से थी.  वह अपने जमाने की पहली ऐसी अभिनेत्री थी जिन्होंने ग्रेजुएशन (BA) किया था. उनकी शादी सिर्फ 18 साल की उम्र में हो गई थी. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जब वह 26 साल की थी, तब उनके पति का अचानक निधन हो गया. दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई और घर चलाने के लिए पैसे नहीं थे. उस समय उनके पास दो ही रास्ते थे या तो वह किस्मत को कोसती रहें या हिम्मत दिखाकर काम करे. 

जब एक्टिंग को माना जाता था ‘वेश्यावृत्ति’
90 साल पहले समाज का मानना था कि अच्छे घर की महिलाओं को फिल्मों में काम नहीं करना चाहिए. उस समय एक्टिंग को बहुत ही घटिया नजर से देखा जाता था और इसकी तुलना गलत कामों से की जाती थी. लेकिन दुर्गा खोटे ने समाज की परवाह नहीं की. उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को पालने के लिए मेहनत करना कोई शर्म की बात नहीं है.

200 फिल्मों का सफर और ‘माँ’ के यादगार रोल
दुर्गा खोटे ने अपने फिल्मी करियर में लगभग 200 फिल्मों में काम किया. उन्हें सबसे ज्यादा शोहरत अपनी ‘माँ’ वाली भूमिकाओं से मिली. फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ में उन्होंने रानी जोधाबाई का जो किरदार निभाया, उसे आज भी लोग याद करते है. 

क्यों खास हैं दुर्गा खोटे?

उन्होंने साबित किया कि पढ़ी-लिखी महिलाएं भी फिल्मों में नाम कमा सकती है. उनके आने के बाद ही कुलीन परिवारों की लड़कियों ने फिल्मों में आना शुरू किया. भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें दादा साहब फाल्के जैसे सबसे बड़े सम्मान से नवाजा गया. दुर्गा खोटे ने अपनी पूरी जिंदगी गरिमा के साथ जी. उन्होंने दिखाया कि एक विधवा महिला अगर ठान ले, तो वह न केवल अपना घर चला सकती है, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकती है. 

Mansi Sharma

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