कुछ ऐसे गाने होते हैं, जो हमेशा के लिए यादगार बन जाते हैं. ऐसा ही एक गाना गुलजार साहब का भी है, जो उन्होंने अपनी पत्नी राखी से अलग होने के बाद लिखा था. ये गाना दिल टूटे आशिकों के लिए आज भी यादगार बना हुआ है.
तेरे बिना जिंदगी से कोई, सिकवा तो नहीं, गुलजार का सदाबहार गाना
Evergreen Sad Song of Gulzar: कुछ गाने सिर्फ सुने नहीं जाते, उन्हें महसूस किया जाता है. खासकर तब, जब दिल किसी अपने के दूर जाने का दर्द झेल रहा हो. बॉलीवुड में ऐसे कई नगमे हैं, जो सालों पुराने होने के बावजूद आज भी टूटे दिलों की आवाज बन जाते हैं. इन्हीं में से एक है फिल्म ‘आंधी’ का गाना ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं…’ 1975 में रिलीज हुए इस गीत को आज भी जब कोई दिल टूटा इंसान सुनता है तो उसे लगता है, जैसे उसके अपने जज्बातों को किसी ने शब्द दे दिए हों.
इस खूबसूरत गीत को लिखा था मशहूर गीतकार गुलजार ने और इसे अपनी आवाज से सजाया था किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने. गाने के हर शब्द में जुदाई, अधूरापन और रिश्ते के टूटने की टीस महसूस होती है लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस गीत के दर्द को गुलजार ने सिर्फ कल्पना से नहीं लिखा था. उनकी निजी जिंदगी का एक दौर भी इस विरह से जुड़ा हुआ था.
फिल्म ‘आंधी’ की शूटिंग के दौरान गुलजार पूरी टीम के साथ कश्मीर में थे. उनकी पत्नी राखी भी उस समय उनके साथ थीं. एक शाम फिल्म की पूरी टीम साथ बैठी थी. इसमें संजीव कुमार और सुचित्रा सेन भी मौजूद थे. बताया जाता है कि उस दौरान संजीव कुमार ने शराब पी रखी थी. जब सुचित्रा वहां से जाने लगीं तो संजीव कुमार ने उनका हाथ पकड़ लिया. स्थिति को बिगड़ता देखकर गुलजार बीच में आए और उन्होंने सुचित्रा को वहां से निकालकर उनके कमरे तक पहुंचाया. इसके बाद जब गुलजार अपने कमरे में लौटे तो राखी ने उनसे सवाल किया कि उन्हें सुचित्रा को कमरे तक छोड़ने जाने की जरूरत क्यों पड़ी. इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ. रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि गुस्से में गुलजार ने राखी पर हाथ उठा दिया. इस घटना ने उनके रिश्ते को गहरी चोट पहुंचाई.
गुलजार और राखी ने 1973 में शादी की थी. हालांकि शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के रिश्ते में खटास आने लगी और 1974 में दोनों अलग हो गए. इसी दौर में ‘आंधी’ फिल्म भी बन रही थी. यही वजह है कि जब गुलजार ने ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं…’ जैसे शब्द लिखे, तो उनमें सिर्फ फिल्मी कहानी नहीं बल्कि जिंदगी का दर्द भी नजर आया. गीत की पंक्तियों में शिकायत कम और उस रिश्ते की कसक ज्यादा महसूस होती है, जिसे चाहकर भी बचाया नहीं जा सका.
शायद यही कारण है कि यह गाना आज भी दिल टूटे आशिकों का सहारा बन जाता है. किसी का प्यार अधूरा रह गया हो, किसी रिश्ते का अंत हुआ हो या कोई अपना जिंदगी से दूर चला गया हो गुलजार के ये शब्द हर उस इंसान के दिल तक पहुंचते हैं, जिसने कभी जुदाई का दर्द महसूस किया है.
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