Guru Shukracharya Story: निर्देशक प्रशांत वर्मा की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘महाकाली’ एक बार फिर चर्चा में है. फिल्म निर्माताओं ने अक्षय खन्ना का नया लुक जारी किया है, जिसके बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है. पिछले साल ‘धुरंधर’ की रिलीज के बाद फिल्म का पहला पोस्टर सामने आया था और तभी से अक्षय खन्ना के किरदार को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं. फिल्म में वह असुरों के गुरु शुक्राचार्य की भूमिका में नजर आने वाले हैं. अक्षय खन्ना का यह किरदार इसलिए भी खास है, क्योंकि पौराणिक कथाओं में शुक्राचार्य को सिर्फ असुरों का गुरु नहीं, बल्कि बेहद विद्वान ऋषि, महान तपस्वी और संजीवनी विद्या के ज्ञाता के रूप में वर्णित किया गया है. ऐसे में फिल्म में उनके किरदार के जरिए पौराणिक कथा का कौन सा पक्ष दिखाया जाएगा, यह देखने वाली बात होगी.
अक्षय खन्ना के लुक ने बढ़ाई फिल्म को लेकर उत्सुकता
‘महाकाली’ के नए लुक में अक्षय खन्ना का अवतार काफी गंभीर और रहस्यमयी नजर आ रहा है. फिल्म निर्माताओं की ओर से जारी झलक के बाद सोशल मीडिया पर उनके किरदार को लेकर चर्चा तेज हो गई है. अक्षय खन्ना को शुक्राचार्य के रूप में देखना दर्शकों के लिए भी अलग अनुभव होने वाला है. शुक्राचार्य को पौराणिक परंपरा में असुरों का गुरु बताया जाता है. वह ज्ञान, तपस्या, नीति और विभिन्न दिव्य विद्याओं के लिए प्रसिद्ध थे. कहा जाता है कि उन्हें ऐसी विद्या का ज्ञान प्राप्त था, जिसके जरिए मृत व्यक्ति को भी दोबारा जीवित किया जा सकता था.
महर्षि भृगु के पुत्र थे शुक्राचार्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शुक्राचार्य महर्षि भृगु और माता ख्याति यानी काव्या के पुत्र थे. कुछ कथाओं में बताया गया है कि उन्होंने ऋषि अंगिरा के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी. वहीं उन्हें ऋषि अंगिरा के पुत्र बृहस्पति के साथ अध्ययन करने का अवसर मिला. कहा जाता है कि शुक्राचार्य को लगा कि ऋषि अंगिरा अपने पुत्र बृहस्पति को उनसे अधिक महत्व देते हैं. इससे आहत होकर उन्होंने आश्रम छोड़ दिया और बाद में महर्षि गौतम से शिक्षा प्राप्त की. आगे चलकर शुक्राचार्य ने अपनी तपस्या और ज्ञान के बल पर देवताओं के गुरु बृहस्पति के समान ही महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया.
देवयानी समेत चार संतानों का मिलता है उल्लेख
पौराणिक कथाओं में शुक्राचार्य के परिवार का भी उल्लेख मिलता है. उनके चार पुत्र बताए जाते हैं, जिनके नाम चंड, अमर्क, त्वाष्ट्र और धरात्र हैं. वहीं उनकी दूसरी पत्नी से पुत्री देवयानी के जन्म की कथा भी प्रसिद्ध है. देवयानी का उल्लेख महाभारत और विभिन्न पौराणिक परंपराओं में महत्वपूर्ण पात्र के रूप में मिलता है. हालांकि, अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में शुक्राचार्य के परिवार को लेकर विवरण अलग-अलग मिलता है.
मां की मृत्यु ने बदल दिया शुक्राचार्य का रुख
शुक्राचार्य के देवताओं के बजाय असुरों का साथ देने से जुड़ी एक बेहद रोचक पौराणिक कथा भी है. देवी भागवत पुराण से जुड़ी मान्यता के अनुसार एक बार युद्ध में देवताओं का पलड़ा भारी पड़ रहा था. अपनी रक्षा के लिए असुर महर्षि भृगु के आश्रम में पहुंचे. उस समय महर्षि भृगु और शुक्राचार्य वहां मौजूद नहीं थे. आश्रम में माता ख्याति यानी काव्या थीं. उन्होंने असुरों को शरण दी और अपनी शक्ति से उनके चारों ओर सुरक्षा कवच बना दिया. कथा के अनुसार देवता भी उस कवच को भेद नहीं सके. इसके बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता काव्या का वध किया. इस घटना से महर्षि भृगु और शुक्राचार्य बेहद दुखी और क्रोधित हुए. मान्यता है कि इसी घटना के बाद शुक्राचार्य का झुकाव असुरों की ओर और अधिक बढ़ गया.
भगवान शिव की कठोर तपस्या से मिला संजीवनी मंत्र
असुरों की बार-बार होने वाली हार से दुखी होकर शुक्राचार्य ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की. पौराणिक कथाओं में उनकी तपस्या को बेहद कठिन बताया गया है. मान्यता है कि उनकी साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा. तब शुक्राचार्य ने संजीवनी मंत्र का ज्ञान मांगा. यह वही दिव्य विद्या मानी जाती है, जिसके जरिए मृत व्यक्ति को फिर से जीवित किया जा सकता था. भगवान शिव ने उन्हें यह ज्ञान दिया, लेकिन इसके दुरुपयोग से सावधान भी किया. इसके बाद शुक्राचार्य युद्ध में मारे गए असुरों को संजीवनी विद्या के जरिए जीवित करने लगे. इससे देवताओं के लिए असुरों को परास्त करना और मुश्किल हो गया.
ज्योतिष में शुक्र ग्रह से जुड़ा है नाम
शुक्राचार्य का संबंध सिर्फ पौराणिक कथाओं तक सीमित नहीं है. वैदिक ज्योतिष में शुक्र को नवग्रहों में शामिल किया जाता है. शुक्र को वृषभ और तुला राशि का स्वामी माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं में शुक्र को प्रेम, सौंदर्य, कला, आकर्षण, भौतिक सुख-सुविधाओं और वैवाहिक जीवन से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में ‘महाकाली’ में अक्षय खन्ना के जरिए शुक्राचार्य का कौन सा रूप सामने आता है, इस पर दर्शकों की खास नजर रहेगी.