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हिंदी सिनेमा सिर्फ अपनी दमदार फिल्मों के लिए ही नहीं बल्कि अपने शानदार गानों के लिए भी जाना जाता है. बॉलीवुड में हर तरह की स्थिति पर गाने बने हैं. जिन्हें आम लोगों के फंक्शन से लेकर बड़ी-बड़ी हस्तियों के कार्यक्रम में भी इस्तेमाल किया जाता है. कुछ चर्चित विदाई गीत भी हैं, जिसे शादियों में बेटियों के जाते वक्त बजाया जाता है. इस लिस्ट में बाबुल की दुआएं, बाबुल प्यारे जैसे गीत शामिल हैं. एक ऐसा मनहूस गाना भी है, जिसके बजते ही लोग अपने कान बंद कर लेते हैं. आखिर कौन सा वो विदाई गीत?
कौन सा है वो गाना?
साल 1991 में आई फिल्म सनम बेवफा का यह गाना है. उसका नाम है ‘मेरी जान चली दुश्मन के घर’. इस गाने को आवाज दी है लता मंगेशकर ने. वहीं इसकी धुन तैयार की है महेश-किशोर ने. इस फिल्म में सलमान खान, प्राण, पुनीत इस्सार, चांदनी जैसे कलाकार मौजूद है. आपको बता दें कि इस फिल्म का निर्देशन सावन कुमार तक ने किया था.
आखिर क्यों नहीं बजाया जाता ये गाना?
‘मेरी जान चली दुश्मन के घर’ गाने को प्राण और चांदनी के साथ फिल्माया गया था. गाने में प्राण का किरदार अपनी बेटी को विदा करता है. तभी यह गाना बजता है. इस गाने को किसी भी शादियों में इसलिए नहीं बजाया जाता है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर कहा जाता है कि बेटी चली दुश्मन के घर. वहीं भारत में दामाद को बहुत इज्जत दी जाती है और किसी को भी हम दु्श्मन नहीं कह सकते है. सबसे अहम बात है सीधे शब्दों में तो बिल्कुल नहीं. इसीलिए कोई भी बाप अपनी बेटी की शादी में ये गाना नहीं बजाता है.
ये विदाई गीत भी हैं मशहूर
हिंदी सिनेमा में ऐसे विदाई गीत हैं, जो काफी मशहूर हैं, इस लिस्ट में ‘बाबुल की दुआएँ लेती जा’, ‘ये बेटियां तो बाबुल की’, ‘बाबुल’ जैसे गीत शामिल हैं.