Bhojpuri First Film History: भोजपुरी सिनेमा का इतिहास बेहद रोचक और दिलचस्प हैं, एक बॉलीवुड स्टार, जिसने की भोजपुरी सिनेमा की शुरूआत वो भी एक महान राजनेता की मदद से, आइये जानते हैं कैसे बनी पहली भोजपुरी की पहली फिल्म? कैसे हुई भोजपुरी सिनेमा की शुरूआत
कैसे हुई भोजपुरी सिनेमा की शुरूआत
Bhojpuri Cinema History: भोजपुरी सिनेमा की शुरुआत कैसे हुई इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है और किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. आज से करीब 60–61 पहले भोजपुरी भाषा को बड़े पर्दे पर आने की बात उठी थी, तब कई लगों यह बड़ा कदम बेहद जोखिम भरा लगा रहा था. लेकिन एक बॉलीवुड स्टार और एक राजनेता ने ऐसी चिंगारी जलाई, जिसने आज पूरी इंडस्ट्री खड़ी कर दी
जिसने भोजपुरी सिनेमा की शुरूआत की वो और कोई नहीं बल्कि बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और लेखक नज़ीर हुसैन थे, जिन्हें आज के समय में ‘भोजपुरी सिनेमा का जनक’ भी माना जाता है. नज़ीर हुसैन ने कई फिल्मों में काम किया है और अपनी बेहतरीन अदाकारी से लाखों लोगों का दिल जाता है और हिंदी सिनेमा में अपनी दमदार पहचान बनाई है. लेकिन नज़ीर हुसैन के दिल में अपनी मिट्टी और अपनी भाषा के लिए हमेशा के खास लगाव था, एक्टर चाहते थे की भोजपुरी भाषा को भी अहमियत मिले और वो सिनेमा के जरिए दुनिया तक पहुंचे
कहा जाता है कि एक बार नज़ीर हुसैन की मुलाकात भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से हुई. इस दौरान उनसे बातचीत में नज़ीर हुसैन भोजपुरी भाषा और उसकी संस्कृति का जिक्र किया. ऐसे में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उनसे कहा कि जब एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री मे इतनी भाषाओं में फिल्में बन रही हैं, तो भोजपुरी में क्यों नहीं बन सकती? यह बात नजीर हुसैन के दिल को छू गई और दिमाग में बस गई, यही वो पल था जब नज़ीर हुसैन ने ठान लिया की भोजपुरी में एक फिल्म जरूर बनानी चाहिए. लेकिन उस दौरान फिल्मों को बनाना आसान काम नहीं हुआ करता था, खासकर ऐसी भाषा में जिसकी कोई स्थापित फिल्म इंडस्ट्री ना हो. पैसों की दिक्कत, वितरण की समस्या और दर्शकों की प्रतिक्रिया को लेकर डर सब कुछ था नज़ीर हुसैन के मन में घुम रहा था, लेकिन एक्टर ने फिर भी हार नहीं मानी. उन्होंने एक बेहद दिलचस्प और दिल छू जाने वाली कहानी लिखी और 1963 में वो फिल्म बनाई, जिसका नाम था “गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो” यह भोजपुरी की पहली फिल्म मानी जाती है.
जब नज़ीर हुसैन की फिल्म “गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो” रिलीज हुई तब कोी भी नहीं जानता था कि यह इतिहास रच देगी. फिल्म की कहानी बेहद साधारण थी, लेकिन अपनी मिट्टी की खुशबू, गांव का दर्द, रिश्तों की गर्माहट और भोजपुरी बोली ने फिल्म को अमर बना दिया, दर्शकों के दिल में उतर गई. नज़ीर हुसैन की फिल्म “गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो” अपने दौर की मेगा हिट साबित हुई. फिल्म को देखने के लिए थिएटर खचाखच भर गए, लोग दूर-दूर से इसे देखने पहुंचे, पहली बार लोगों को महसूस हुआ कि उनकी अपनी भाषा भी बड़े पर्दे पर चमक सकती है. इस फिल्म की सफलता ने पूरी इंडस्ट्री की नींव रख दी और इसके बाद से भोजपुरी में फिल्म बनने का सिलसिला शुरू हो गया. नए कलाकार आए, नए निर्माता जुड़े और धीरे-धीरे आज भोजपुरी सिनेमा ने अपनी पहचान बनाना शुरी की और आज के समय में भोजपुरी किसी भी फिल्म इंडस्ट्री से कम नहीं है. देश ही नहीं विदेशों में भी इसका बोलबाला देखने को मिलता हैं, भोजपुरी की फिल्में ही नहीं भोजपुरी के गानों की दीवानगी लोगों के बीच देखने को मिलती है.
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