बॉलीवुड के सबसे चहेते कॉमेडियन राजपाल यादव आज भले ही मुस्कुरा रहे हों, लेकिन उनके जीवन का एक काला अध्याय 'चेक बाउंस' के उस मामले से जुड़ा है जिसने उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था. साल 2010 में अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के लिए लिया गया 5 करोड़ का कर्ज और उसे न चुका पाने की कानूनी उलझन ने राजपाल को बेबस कर दिया था.
जब पूरी दुनिया राजपाल की मुश्किलों पर चर्चा कर रही थी, तब उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के एक गुरुकुल के 40 मासूम बच्चों ने अपनी खुशियां त्याग दी थी. उन बच्चों ने अपनी छोटी-छोटी पॉकेट मनी जोड़कर राजपाल की मदद के लिए पैसे भेजे थे. लेकिन आज वही बच्चे अपने पसंदीदा कलाकार से इस कदर नाराज है कि उनकी आंखों में आंसू है.
बच्चों ने तोड़ी थी अपनी गुल्लक
गुरुकुल सेवा ट्रस्ट के इन बच्चों ने राजपाल यादव की मदद के लिए एक गुल्लक (पिग्गी बैंक) में अपनी छोटी-छोटी बचत जमा की और 21 फरवरी को उसे डाक के जरिए एक्टर के पैतृक गांव भेज दिया. बच्चों ने साथ में एक भावुक पत्र भी लिखा था जिसमें उन्होंने राजपाल से मिलने की इच्छा जताई थी. जेल से बाहर आने के बाद जब राजपाल की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तो बच्चों ने एक वीडियो जारी कर कहा, राजपाल भैया, हमने अपनी बचत आपको भेजी थी, लेकिन आपने हमारे पत्र का जवाब तक नहीं दिया. हम आपसे बहुत नाराज है.
राजपाल यादव ने दी सफाई
खबर वायरल होने के बाद राजपाल यादव ने अपनी चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा कि वे अभी हाल ही में घर लौटे है और उन्हें अभी तक अपने परिवार के साथ भी ठीक से बैठने का समय नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि वे उन सभी लोगों की जानकारी जुटा रहे है जिन्होंने मुश्किल समय में उनकी मदद की.
'गुरुकुल के बच्चे मेरे अपने है'
शुरुआत में राजपाल को लगा था कि बच्चे किसी अनाथालय से है, जिस पर उन्होंने कहा था कि अगर बच्चों के पास आश्रम है तो वे अनाथ नहीं है. लेकिन जब उन्हें पता चला कि वे गुरुकुल के छात्र है, तो उन्होंने सम्मान प्रकट करते हुए कहा, मैं गुरु परंपरा में विश्वास रखने वाला व्यक्ति हूं. वे सभी बच्चे मेरे अपने है. मैं निश्चित रूप से उनसे मिलूंगा, उन्हें गले लगाऊंगा और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाऊंगा.
क्यों जेल गए थे राजपाल यादव?
आपको बता दें कि राजपाल यादव ने अपनी फिल्म 'अता पता लापता' (2010) के लिए 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. इसे न चुका पाने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा था. इसी कठिन दौर में इन स्कूली बच्चों ने उनके प्रति अपना समर्थन और प्यार दिखाया था.