CM Yogi Japan Visit: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने जापान दौरे के दौरान एक पब्लिक इवेंट में हिस्सा लिया. जहां उन्हें जैन परंपरा से ताल्लुक रखने वाली साध्वी तुलसी ने सीएम को भेंट में मूर्ति दी. आइए जानते हैं कि इस मूर्ति की खासियत क्या है.
जापान दौरे पर सीएम योगी को साध्वी तुलसी ने भगवान महावीर की खास मूर्ति भेंट की.
CM Yogi Japan Visit: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समय जापान के दौरे पर हैं. जापान में वो जहां भी जा रहे हैं. वहां काफी गर्मजोशी से स्वागत किया जा रहा है. सीएम योगी द्वारा दिया जा रहा भाषण भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. भगवा वस्त्र पहनकर सीएम योगी जिस तरह से हिंदुत्व के बारे में बोल रहे हैं. वो लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है. सीएम योगी ने शासन में अपने अनुभव के बारे में भी लोगों को बता रहे हैं.
योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे के दौरान जापानी लोग सीएम योगी कोे लेकर इसलिए भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, क्योंकि कैसे एक संत एक राज्य का मुखिया होने के बावजूद जमीनी स्तर पर सनातन धर्म से जुड़े ङी रहते हैं और उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के साथ-साथ अपनी संस्कृति को भी बचा रहे हैं.
उत्तर प्रदेश का शासन संभालने के बावजूद सीएम योगी कैसे अपनी संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं. इन्हीं सब चीजों को देखने के लिए जापान में सीएम योगी से आध्यात्मिक गुरु भी मिल रहे हैं. इसी क्रम में गुुरुवार को एक पब्लिक इवेंट के दौरान जैन श्वेतांबर संप्रदाय की एक साध्वी ने सीएम योगी से मुलाकात की और उन्हें जैन परंपरा के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की मूर्ति भेंट की. साध्वी तुलसी ने कहा कि वह जैन परंपरा में विश्वास करती हैं और जापान में तीर्थंकरों की शिक्षाओं को फैलाने में लगी हुई हैं. वह हिंदू धर्म में मौजूद सहनशीलता का संदेश भी फैलाती हैं.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर रहे हैं. उनका जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व वैशाली के कुंडलपुर या कुंडिनपुर (वर्तमान बिहार) में हुआ माना जाता है. उनके बचपन का नाम वर्धमान था. 30 वर्ष की आयु में उन्होंने राजसी जीवन त्यागकर सत्य और आत्मज्ञान की खोज शुरू की. लगभग 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद उन्हें कैवल्य ज्ञान प्राप्त हुआ.
महावीर स्वामी ने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों का उपदेश दिया. उनका मानना था कि हर जीव में आत्मा है और किसी को भी कष्ट पहुंचाना पाप है. उन्होंने समानता, करुणा और आत्मसंयम पर आधारित जीवन जीने की प्रेरणा दी. 72 वर्ष की आयु में पावापुरी में उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया. उनका संदेश आज भी शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाता है.
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