Movies on Ramayana: भगवान राम का किरदार भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में कई अभिनेताओं ने निभाया है. अरुण गोविल, एनटी रामा राव, गुरमीत चौधरी और प्रभास से लेकर अब रणबीर कपूर तक राम के अलग-अलग रूप पर्दे पर दिखाई दिए हैं. खास बात यह है कि रामायण पर भारत ही नहीं, जापान, थाईलैंड, कंबोडिया और इंडोनेशिया में भी फिल्में और एनिमेशन बनाए गए. जानिए कैसे राम की कहानी ने भारतीय सिनेमा से निकलकर दुनिया के अलग-अलग देशों में अपनी जगह बनाई.
पर्दे पर कितनी बार बदले भगवान राम के रूप?
Movies on Ramayana: राम की कहानी सदियों पुरानी है, लेकिन हर दौर में इसकी लोकप्रियता बनी रही है. भारतीय जनमानस में भगवान राम आस्था, आदर्श और मर्यादा के प्रतीक हैं. यही वजह है कि सिनेमा और टेलीविजन पर राम की कहानी को कई बार अलग-अलग अंदाज में पेश किया गया. कभी अरुण गोविल ने राम के रूप में घर-घर में पहचान बनाई, तो कभी एनटी रामा राव और प्रभास जैसे अभिनेताओं ने यह किरदार निभाया. अब रणबीर कपूर भी फिल्म ‘रामायण’ में राम की भूमिका में नजर आ रहे हैं. खास बात यह है कि राम की कहानी भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि जापान, थाईलैंड, कंबोडिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में भी इस पर फिल्में और एनिमेशन बनाए गए.
भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर में पौराणिक कहानियां फिल्मकारों की पसंद थीं. दादा साहेब फाल्के ने 1917 में ‘लंका दहन’ फिल्म के जरिए रामायण के प्रसंग को पर्दे पर उतारा. मूक फिल्म में अन्ना सालुंके ने राम और सीता दोनों की भूमिका निभाई थी. इसके बाद 1943 में विजय भट्ट की ‘राम राज्य’ आई, जिसमें प्रेम अदीब ने राम का किरदार निभाया. दक्षिण भारतीय सिनेमा में एनटी रामा राव ने भी राम की भूमिका से खास पहचान बनाई. वह ‘लव कुश’ और ‘श्री राम पट्टाभिषेकम’ जैसी फिल्मों में नजर आए.
साल 1987 में रामानंद सागर की ‘रामायण’ का प्रसारण दूरदर्शन पर शुरू हुआ. इसमें अरुण गोविल ने राम, दीपिका चिखलिया ने सीता और सुनील लहरी ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई. धारावाहिक की लोकप्रियता ऐसी थी कि रविवार की सुबह लोग टीवी के सामने बैठ जाते थे. अरुण गोविल की शांत मुस्कान और सहज अभिनय ने राम की ऐसी छवि बनाई, जिसे दर्शक आज भी याद करते हैं. 2008 में गुरमीत चौधरी ने टीवी धारावाहिक ‘रामायण’ में राम की भूमिका निभाई. वहीं 2015 के ‘सिया के राम’ में आशीष शर्मा राम बने. इस धारावाहिक में कहानी को सीता के नजरिये से दिखाया गया.
1992 में भारत और जापान के सहयोग से ‘रामायण: द लीजेंड ऑफ प्रिंस रामा’ एनिमेशन फिल्म बनाई गई. जापानी फिल्मकार युगो साको और भारतीय एनिमेशन कलाकार राम मोहन इससे जुड़े थे. फिल्म में भारतीय महाकाव्य को जापानी एनिमेशन शैली में पेश किया गया. थाईलैंड में रामायण को ‘रामाकियन’ कहा जाता है. 2023 की फिल्म ‘मंत्रा वॉरियर: द लीजेंड ऑफ द एट मून्स’ में रामकथा को भविष्य की काल्पनिक दुनिया में दिखाया गया. इसमें आधुनिक तकनीक, रोबोटिक्स और विज्ञान-कथा के तत्व शामिल किए गए.
कंबोडिया में रामायण को ‘रीमकर’ कहा जाता है और राम को ‘प्रीह रीम’ के नाम से जाना जाता है. यहां रामकथा साहित्य, नृत्य और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा है. वहीं इंडोनेशिया में रामायण की लोकप्रियता वहां की कला और रंगमंच में दिखाई देती है. 2006 में निर्देशक गरिन नुग्रोहो की फिल्म ‘ओपेरा जावा’ आई, जिसमें रामायण के सीता हरण प्रसंग को आधुनिक समाज के संदर्भ में पेश किया गया.
अब नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं. इस फिल्म के जरिए रामकथा को बड़े पैमाने पर आधुनिक तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स के साथ पेश करने की कोशिश की गई है. इस तरह राम की कहानी ने सिनेमा में एक लंबा सफर तय किया है. हर देश और हर दौर ने इसे अपने नजरिये से प्रस्तुत किया, लेकिन रामकथा के प्रति लोगों का आकर्षण आज भी कायम है.
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