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एक ही नाम, अलग-अलग अंजाम: बॉलीवुड के ‘अंदाज़’ टाइटल का 75 सालों का सफर

बॉलीवुड में 'अंदाज़' नाम फिल्मों के लिए बहुत लकी रहा है. पिछले कई सालों में इस नाम से चार फिल्में बनीं, जिनमें से तीन (1949, 1971 और 2003) जबरदस्त हिट रही और उन्होंने खूब कमाई की. लेकिन 1994 में आई अनिल कपूर की फिल्म 'अंदाज़' को दर्शकों का उतना प्यार नहीं मिला और यह बॉक्स ऑफिस पर बस ठीक-ठाक (Average) ही रही.

बॉलीवुड में फिल्मों के नाम दोहराना कोई नई बात नहीं है, लेकिन ‘अंदाज़’ (Andaaz) एक ऐसा टाइटल है जिसके साथ बॉक्स ऑफिस का अनोखा रिकॉर्ड जुड़ा है. पिछले 75 सालों में इस नाम से चार बड़ी फ़िल्में बनीं, जिनमें से तीन ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया और ‘मैसिव हिट’ साबित हुई.  हालांकि, एक दौर ऐसा भी आया जब इस ‘लकी’ नाम का जादू थोड़ा फीका पड़ गया और फिल्म केवल औसत (Average) प्रदर्शन ही कर पाई.

तीन पीढ़ियों का सुपरहिट सफर: जब ‘अंदाज़’ ने बनाया रिकॉर्ड

इस सिलसिले की शुरुआत 1949 में हुई, जब महबूब खान की फिल्म ‘अंदाज़’ ने सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया.  दिलीप कुमार, राज कपूर और नरगिस जैसे दिग्गजों से सजी यह फिल्म अपने समय की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर रही.  इसके बाद 1971 में राजेश खन्ना और हेमा मालिनी का ‘अंदाज़’ आया, जिसने ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’ जैसे गानों के साथ बॉक्स ऑफिस पर फिर से कामयाबी के झंडे गाड़े.  साल 2003 में एक बार फिर अक्षय कुमार, प्रियंका चोपड़ा और लारा दत्ता की फिल्म ‘अंदाज़’ रिलीज हुई, जिसने न केवल प्रियंका और लारा को स्टार बनाया, बल्कि यह साल की सबसे बड़ी हिट्स में शुमार हुई.

1994 की खटास: जब फीका पड़ गया इस नाम का जादू

इतने शानदार और सुपरहिट रिकॉर्ड के बीच 1994 में रिलीज हुई ‘अंदाज़’ इस टाइटल की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई.  डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अनिल कपूर, जूही चावला और करिश्मा कपूर जैसे बड़े सितारे मुख्य भूमिका में थे.  हालांकि फिल्म के गाने उस दौर में काफी चर्चा में रहे और रेडियो पर खूब बजे, लेकिन कहानी और प्रस्तुति के मामले में यह दर्शकों को वह ‘अंदाज़’ नहीं दे पाई जिसकी उम्मीद की जा रही थी.  नतीजा यह हुआ कि जहां बाकी तीनों फ़िल्में ‘सुपरहिट’ रहीं, वहीं 1994 की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर केवल एवरेज (औसत) प्रदर्शन ही कर सकी.

नाम वही, पर बदल गया किस्मत का अंदाज़

फिल्म इंडस्ट्री में यह माना जाता है कि कुछ नाम निर्देशकों के लिए बहुत भाग्यशाली होते है, और ‘अंदाज़’ उन्हीं चुनिंदा नामों में से एक है जिसने तीन अलग-अलग दशकों (40s, 70s और 2000s) में सुपरस्टार्स दिए.  1949 ने दिलीप-राज की जोड़ी को अमर किया, 1971 ने राजेश खन्ना के स्टारडम को बढ़ाया और 2003 ने दो नई हीरोइनों को बॉलीवुड में स्थापित किया.  लेकिन 1994 का साल यह याद दिलाता है कि सिर्फ एक हिट नाम फिल्म को ब्लॉकबस्टर नहीं बना सकता, उसके लिए कहानी का दमदार होना भी उतना ही जरूरी है.
Mansi Sharma

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