The Kerala Story 2 Controversy: आखिर मेकर्स ने रातों-रात फिल्म का टीजर क्यों हटाया? हाई कोर्ट को फिल्म दिखाने से इनकार के पीछे क्या है असली वजह? जानिए पूरा सच.
हाई कोर्ट को फिल्म दिखाने से इनकार के पीछे क्या है असली वजह
The Kerala Story 2 Controversy: फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ अपनी रिलीज से पहले ही कानूनी और राजनीतिक विवादों में फंस चुकी है. साल 2023 की नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म के इस सीक्वल पर जबरन धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील विषय को दिखाने का आरोप है. केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार को फिल्म के निर्माताओं को निर्देश दिया था कि फिल्म को शुक्रवार (रिलीज के दिन) से पहले अदालत के लिए कोच्चि में प्रदर्शित किया जाए. हालांकि, निर्माताओं ने कोर्ट को फिल्म दिखाने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई कल तक के लिए टाल दी है. कोर्ट की इस सख्ती के बाद मेकर्स ने फिल्म का टीजर भी वापस ले लिया है. सुनवाई के दौरान जस्टिस बेचू कुरियन ने टिप्पणी की कि ‘केरल के लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.’
अब बात आती है कि इस फिल्म को लेकर याचिकाकर्ता की आपत्ति क्या है? दरअसल, कन्नूर के रहने वाले 26 वर्षीय जीवविज्ञानी (Biologist) श्रीदेव नंबूदिरी ने फिल्म के सेंसर सर्टिफिकेट को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है. उनकी मुख्य दलीलें ये हैं कि फिल्म का टाइटल ‘केरल’ पर आधारित है, जबकि ट्रेलर के अनुसार इसकी कहानियां राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे अन्य राज्यों की भी हैं. याचिकाकर्ता का कहना है कि फिल्म केरल और वहां के लोगों को गलत तरीके से पेश कर रही है, जिससे राज्य की छवि खराब हो रही है और सांप्रदायिक सद्भाव को खतरा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म को पास करते समय राष्ट्रीय अखंडता और नैतिकता के मानकों का ठीक से पालन नहीं किया.
ट्रेलर के मुताबिक, फिल्म में तीन हिंदू लड़कियों की कहानी दिखाई गई है जो मुस्लिम युवकों के साथ प्रेम संबंधों में आने के बाद जबरन धर्म परिवर्तन और धोखे का शिकार होती हैं. फिल्म में यह भी दावा किया गया है कि अगले 25 वर्षों में भारत को ‘इस्लामिक स्टेट’ बनाने की साजिश रची जा रही है. निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह का कहना है कि फिल्म पूरी तरह से सच्ची घटनाओं और शोध पर आधारित है. उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से अपील की है कि वे इस ‘सच्चाई’ को स्वीकार करें. निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद केरल राज्य को निशाना बनाना नहीं, बल्कि समाज में फैली एक ‘बुराई’ को उजागर करना है. उन्होंने फिल्म को ‘प्रोपेगेंडा’ कहने वालों को जवाब देते हुए कहा कि वे पीड़ितों के साथ खड़े रहेंगे.
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