मिस यूनिवर्स इंडिया प्रतियोगिता में तिरंगे से प्रेरित गाउन पहनने पर भारतीय ध्वज संहिता का उल्लंघन करने के आरोप लगने के बाद आलोचनाओं का सामना करने के बाद, उर्वशी रौतेला ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने इसका उल्लंघन नहीं किया है.
उर्वशी रौतेला
हाल ही में उर्वशी रौतेला ने जयपुर में रविवार को आयोजित मिस यूनिवर्स इंडिया प्रतियोगिता में तिरंगे से प्रेरित पोशाक पहनकर सबका ध्यान आकर्षित किया. उनके गाउन में भारतीय ध्वज से प्रेरित केसरिया, सफेद और हरे रंग थे, और बीच में अशोक चक्र से प्रेरित अलंकरण भी था.
इस गाउन की व्यापक स्तर पर आलोचना हुई. लोगों ने इसे राष्ट्र ध्वज का अपमान बताया. अब उर्वशी रौतेला ने भी अपने बचाव में तर्क दिया है. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कहा.
उर्वशी रौतेला ने कहा कि यह अपने देश के प्रति उनका सम्मान व्यक्त करने का तरीका था. उन्होंने कहा, “मैं अपने देश को केवल राष्ट्रीयता के रूप में ही नहीं, बल्कि अपनी पहचान के एक हिस्से के रूप में अपने साथ रखती हूँ. मैं कुछ ऐसा पहनना चाहती थी जो लोगों को केवल यह न बताए कि मैं कहाँ से आई हूँ, बल्कि यह भी व्यक्त करे कि भारत मेरे लिए क्या मायने रखता है. इसी से प्रेरित होकर मैंने यह परिधान तैयार किया.” बता दें कि यह गाउन बेलारूसी डिजाइनर दारिया चेरमाशेन्तसेवा (DASHA Fashion Couture) द्वारा डिजाइन किया गया था और इसे बनाने में लगभग तीन महीने लगे. उर्वशी कहती हैं, “इसका सिल्हूट, रंगों का संयोजन, अलंकरण, बारीक कारीगरी और निर्माण, सभी को फैशन के नजरिए से देखा गया. इसलिए यह सिर्फ एक ड्रेस पर तीन रंग लगाने की बात नहीं थी. यह एक राष्ट्रीय भावना को कलात्मक अभिव्यक्ति में बदलने की बात थी.”
जहां कई लोगों ने अभिनेत्री के इस लुक को देशभक्ति का प्रतीक बताते हुए उनका समर्थन किया, वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने चिंता भी जताई. कई लोगों ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज के रंगों और प्रतीकों को निचले हिस्से के परिधान में शामिल करना और उसके कुछ हिस्सों को ज़मीन पर घसीटना भारत के ध्वज संहिता के तहत निर्धारित दिशानिर्देशों का उल्लंघन है. आलोचनाओं का जवाब देते हुए उर्वशी ने स्पष्ट किया, “भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और इस गाउन में कई स्पष्ट अंतर हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह गाउन राष्ट्रीय ध्वज की हूबहू प्रतिकृति नहीं है; यह तिरंगे से प्रेरित तत्वों का उपयोग करके बनाया गया एक फैशन डिज़ाइन है.”
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन और उपयोग भारत की ध्वज संहिता, 2002 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 द्वारा नियंत्रित होता है. अन्य नियमों के अलावा, राष्ट्रीय ध्वज को जमीन या फर्श को छूना या पानी में डुबोना नहीं चाहिए. 1971 के अधिनियम के तहत, राष्ट्रीय ध्वज को कमर के नीचे पहने जाने वाले परिधान, वर्दी या सहायक वस्तु के रूप में उपयोग करना, या इसे पोशाक सामग्री पर कढ़ाई या मुद्रित करना, ध्वज के प्रति अनादरपूर्ण कार्य माना जाता है. अधिनियम यह भी कहता है कि “भारतीय राष्ट्रीय ध्वज” शब्द में ध्वज या उसके किसी भी भाग का चित्र, रेखाचित्र या अन्य दृश्य निरूपण शामिल है. राष्ट्रीय ध्वज का सार्वजनिक रूप से अपमान करना या अनादर करना तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का कारण बन सकता है.
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