वैज्ञानिकों ने आंखों के कैंसर के इलाज में एक क्रांतिकारी खोज की है. सूअर के वीर्य से निकाले गए एक अणु को आधार बनाकर बनी आई ड्रॉप्स चूहों में कैंसर ट्यूमर को रोकने में सफल रहीं हैं. हाल ही में यह शोध लाइव साइंस में प्रकाशित हुआ है जो कैंसर चिकित्सा में नया आयाम जोड़ सकता है.
सूअर के सीमन से हो सकता है आँखों के कैंसर का इलाज
वैज्ञानिकों ने आंखों के कैंसर के इलाज में एक क्रांतिकारी खोज की है. सूअर के वीर्य से निकाले गए एक अणु को आधार बनाकर बनी आई ड्रॉप्स चूहों में कैंसर ट्यूमर को रोकने में सफल रहीं.
हाल ही में यह शोध लाइव साइंस में प्रकाशित हुआ है जो कैंसर चिकित्सा में नया आयाम जोड़ सकता है. बता दें कि आंखों का कैंसर आंखों के अंदर या आसपास असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि (प्राथमिक) या शरीर के किसी अन्य हिस्से से फैलने (माध्यमिक) से संबंधित होता है, जिसके कारण अक्सर दृष्टि में परिवर्तन, काले धब्बे या आंखों का बाहर निकलना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.
आंखों के कैंसर के इलाज पर लंबे समय से चिकित्स्क शोध कर रहे हैं. जब उन्होंने सूअर के वीर्य का अध्ययन किया तो उन्हें उसमें एक्सोसोम्स नामक सूक्ष्म कण मिले. चिकित्सकों ने सूअर के वीर्य में पाए जाने वाले एक्सोसोम्स नामक सूक्ष्म कणों को आधार बनाया गया. ये कण नैनोस्कोपिक डिलीवरी व्हीकल की तरह काम करते हैं. शोधकर्ताओं ने इन एक्सोसोम्स में कीमोथेरेपी ड्रग्स लोड किए. आई ड्रॉप्स के रूप में डाली गई यह दवा आंख के गहरे हिस्सों तक पहुंच गई.
रेटिनोब्लास्टोमा नामक आंखों का कैंसर, जो बच्चों में आम है, इसका मुख्य लक्ष्य रहा है. सामान्य कीमोथेरेपी आंख के बाहर इंजेक्शन या सिस्टमिक तरीके से दी जाती है, जो स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है.
लाइव साइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में चूहों पर किये गए इस प्रयोग के बारे में बताया गया है. सबसे पहले चूहों को आंखों का कैंसर दिया गया. एक्सोसोम-आधारित आई ड्रॉप्स ने ट्यूमर ग्रोथ को 80% तक रोका और इसके साइड इफेक्ट्स भी न्यूनतम थे. सामान्य आई ड्रॉप्स आंख की सतह पर ही रह जाती हैं. ये कण कोशिका झिल्ली से घिरे होते हैं, जो उन्हें स्थिर रखते हैं.
एक्सोसोम्स लिपिड बाइलेयर से बने होते हैं, जो ड्रग्स को कैप्सूल की तरह ले जाते हैं. आंख में पहुँचकर ये कैंसर कोशिकाओं में घुस जाते हैं. ये कीमो ड्रग्स बाहर निकलकर ट्यूमर नष्ट करते हैं. यह विधि बच्चों के कैंसर में विशेष उपयोगी है, क्योंकि इंजेक्शन या सर्जरी से आंख की रोशनी जा सकती है. यह नॉन-इनवेसिव तरीका है.
यह खोज कैंसर चिकित्सा को सरल और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। सूअर के वीर्य से बनी यह आई ड्रॉप्स चूहों में सफल रही है, अब इंसानों पर इसके परीक्षण का इंतजार है.
बिहार के बेगूसराय के मंझौल अस्पताल से एक घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था…
Hijab in Islam : इस्लाम में हिजाब के महत्व, इसे पहनने के धार्मिक कारणों और…
पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आर विनय कुमार कर्नाटक की मेंस क्रिकेट टीम के नए हेड…
मध्य प्रदेश के भोपाल से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक…
Tricycle, 150 km journey: ओडिशा के नयागढ़ जिले के 73 वर्षीय सुकदेव नाहक टूटी हुई…
श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में ऋषभ पंत इतिहास रचने के करीब हैं. पंत टेस्ट…