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Pandit Ravi Shankar किसके लिए प्लेन में बुक करते थे 2 सीट? किससे किया वादा- ना करेंगे डांस

Pandit Ravi Shankar Interesting Facts: महान संगीतकार और सितावादक पंडित रविशंकर ने एक दक्ष डांसर होने के बावजूद क्यों हमेशा के लिए दूरी बना ली, इसका खुलासा उन्होंने एक इंटरव्यू में खुद किया.

Pandit Ravi Shankar Interesting Facts: सितार का जिक्र होते ही पंडित रविशंकर का नाम सहज ही लोगों के जेहन में आता है. वह  इकलौते भारतीय सितारवादक थे, जिन्हें भारत के बाहर भी उतना ही सम्मान मिला. बनारस (उत्तर प्रदेश) की धरती पर  7 अप्रैल, 1920 को जन्म लेने वाले सितारवादक पंडित रविशंकर ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी समेत विदेश में भी अपने हुनर के जरिये देश के नाम रौशन किया. पंडित रविशंकर दुनिया के शायद इकलौते शख्स थे, जो हवाई सफर के दौरान प्लेन में 2 सीटें बुक करते थे. एक सीट खुद के नाम से और दूसरी सीट ‘सुरशंकर’ के नाम से. शर्त यह होती थी कि दोनों सीटें अगल-बगल की हों. विमान कंपनियां भी उनकी शर्त मानकर 2 सीटें बुक करती थीं. सुरशंकर उनके सितार का नाम था. 12 दिसंबर 2012 को अमेरिका के सैन डिएगो के अस्पताल में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन इससे पहले वह दुनिया को अनमोल संगीत की धरोहर दे गए. पंडित रविशंकर के बर्थडे पर इस स्टोरी में जानेंगे और् भी रोचक किस्से. 

किसके कहने पर छोड़ा नृत्य?

यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि सितार सीखने से पहले रविशंकर एक जाने-माने डांसर थे. एक बार प्रसिद्ध दरबारी संगीतकार उस्ताद अलाउद्दीन खान को सितार बजाते देखा-सुना तो वह इसके लिए दीवाने हो गए. इसके उन्होंने नृत्य करना हमेशा के लिए छोड़ दिया. हुआ यूं कि एक बार रविशंकर के भाई उदय ने चर्चित मैहर घराने के अलाउद्दीन खां साहब का संगीत सुना था. उन्होंने उनका संगीत इतना पसंद आया कि अलाउद्दीन खां को  अपने साथ यूरोप टूर पर ले जाने के लिए राजी कर लिया.

उस्ताद से किया वादा- डांस हमेशा के लिए छोड़ दिया

इस टूर पर भाई उदय के साथ रविशंकर भी गए. सितार बजाते देखा तो रविशंकर सितारवादक अलाउ्द्दीन खां के फैन हो गए. उन्होंने भी सितार सीखने की इच्छा जताई.  अलाउ्द्दीन खां साहब यह बात जानते थे कि एक ही विधा को सही और ईमानदारी से निभाया जा सकता है. ऐसे में सितार सिखाने के रविशंकर के सामने यह शर्त रख दी कि सितार सीखना है तो नृत्य हमेशा के लिए छोड़ना होगा. रविशंकर जाने माने डांसर थे, लेकिन सितार सीखने के लिए उन्होंने यह कुर्बानी दे दी. यह बात वर्ष 1938 की है. 

10 साल की उम्र में डांस में हो गए थे पारंगत

रविशंकर बहुत कम उम्र से ही संगीत और नृत्य से लगाव हो गया. 10 साल उम्र की रही होगी जब उन्होंने अपने भाई उदय के डांस ग्रुप को ज्वाइन किया. नृ्त्य तो वह कमाल का करते थे.  संगीत और नृत्य से लगाव रखने के कारण 10 साल उम्र में भाई के डांस ग्रुप का हिस्सा बने. उस्ताद अलाउ्द्दीन खां से उन्होंनने 18 साल की उम्र में सितार सीखना शुरू किया. मैहर के उलाउद्दीन खान से दीक्षा लेने के बाद संगीत में ऐसी रुचि जगी तो कुछ सालों में वह देश के सबसे चर्चित सितारवादक बन गए. 

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मास्क में बजाया सितार

भारतीय संगीत खासतौर से सितार को पंडित रविशंकर ने विदेश खासतौर से पश्चिमी देशों में खूब लोकप्रिय बनाया. विदेश यात्रा के दौरान वर्ष 1966 में चर्चित बीटल्स ग्रुप के जॉर्ज हैरिसन से रविशंकर से मुलाकात हुई. इसके बाद ट्यूनिंग ऐसी बनी को उन्होंने पंडित रविशंकर ने जॉर्ज हैरिसन, गिटारिस्ट जिमी हैंड्रिक्स और वायलिन एक्सपर्ट येहुदी मेनुहिन जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ मिलकर फ्यूजन म्यूजिक बनाया. यह देश-दुनिया में खूब सराहा गया.

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मिला भारत रत्न

संगीत के प्रति दीवानगी ही थी कि उन्होंने 4 नवंबर, 2012 को कैलिफोर्निया में अपनी बेटी अनुष्का शंकर के साथ परफॉर्मेंस दी. यह उनका आखिरी प्रोग्राम था. खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने ऑक्सीजन मास्क का साथ परफॉर्मेंस दी. उन्होंने अपने जीवन में तीन बार ग्रैमी अवॉर्ड मिले. देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया. भारत सरकार ने वर्ष 1986 से 1992 तक राज्यसभा में मनोनीत किया.  

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JP YADAV

जेपी यादव डेढ़ दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट और डिजिटल मीडिया, दोनों में समान रूप से पकड़ रखते हैं. मनोरंजन, साहित्य और राजनीति से संबंधित मुद्दों पर कलम अधिक चलती है. अमर उजाला, दैनिक जागरण, दैनिक हिंदुस्तान, लाइव टाइम्स, ज़ी न्यूज और भारत 24 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.कई बाल कहानियां भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं. सामाजिक मुद्दों पर 'रेडी स्टडी गो' नाटक हाल ही में प्रकाशित हुआ है. टीवी और थिएटर के प्रति गहरी रुचि रखते हुए जेपी यादव ने दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक 'गागर में सागर' और 'जज्बा' में सहायक लेखक के तौर पर योगदान दिया है. इसके अलावा, उन्होंने शॉर्ट फिल्म 'चिराग' में अभिनय भी किया है. वर्तमान में indianews.in में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत हैं.

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