Urinary Tract Infection: महिलाओं में यूटीआई यानी मूत्र पथ का संक्रमण (Urinary Tract Infection) होना एक आम समस्या है, जो ईकोलाई बैक्टीरिया के मूत्र पथ में प्रवेश करने से होती है. आमतौर पर इसकी वजह फ्रिक्वेंटली अनप्रोटेक्टेड सेक्स करना, मेनोपॉज, गर्भनिरोधक का अत्यधिक उपयोग, लो इम्यूनिटी, एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक उपयोग, शुगर की समस्या आदि हैं. लेकिन, एक 40 साल की महिला में यूटीआई होने की वजह ने सभी को चौंका दिया. जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर-
40 वर्षीय महिला को इस गंदी आदत से यूटीआई की समस्या. (Canva)
Urinary Tract Infection: महिलाओं में यूटीआई यानी मूत्र पथ का संक्रमण (Urinary Tract Infection) होना एक आम समस्या है, जो ईकोलाई बैक्टीरिया के मूत्र पथ में प्रवेश करने से होती है. अधिकांश महिलाओं को अपने जीवन में कभी न कभी यूटीआई (UTI) होता ही है. बता दें कि, यह मूत्राशय और इसकी नली में बैक्टीरिया के संक्रमण (Bacterial Infection) की वजह से होता है. हालांकि, यह संक्रमण पुरुषों में भी हो सकता है लेकिन उनकी तुलना में महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, आमतौर पर इसके होने से फ्रिक्वेंटली अनप्रोटेक्टेड सेक्स करना, मेनोपॉज, गर्भनिरोधक का अत्यधिक उपयोग, लो इम्यूनिटी, एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक उपयोग, शुगर की समस्या और मूत्राशय को पूरी तरह से खाली न करना आदि हैं. लेकिन, एक 40 साल की महिला में यूटीआई होने की वजह ने सभी को चौंका दिया.
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एक 40 वर्षीय महिला को 6 महीने से बार-बार मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) की शिकायत थी, जबकि उनकी जीवनशैली में कोई समस्या नहीं थी. संक्रमण इतना बढ़ गया था कि वे गुर्दे की विफलता कगार पर थी. जालंधर के यूरोलॉजिस्ट डॉ. वरिंदर विर्दी ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में इस पूरे मामले को लिखा. वे लिखते हैं कि “वह 40 वर्ष की थीं. कॉर्पोरेट में काम करती थीं. लंबे समय तक काम करती थीं. अनुशासित जीवन जीती थीं. उन्हें डायबिटीज नहीं थी. प्रतिरक्षा प्रणाली में कोई समस्या नहीं थी. गुर्दे की पथरी नहीं थी. प्रेग्नेंसी भी नहीं थी. फिर भी… 6 महीने तक उन्हें बार-बार मूत्र मार्ग संक्रमण होता रहा.”
एंटीबायोटिक्स लेने के बाद भी, जिससे उन्हें कुछ समय के लिए आराम मिला, उनका मूत्र संक्रमण बार-बार उभरता रहा. डॉ. वरिंदर ने विस्तार से बताया, “उन्हें लगा कि यह तनाव की वजह से है. उन्हें लगा कि यह ऑफिस के काम के घंटों का असर है. उन्हें लगा कि महिलाओं में यह आम बात है. फिर एक रात…तेज बुखार, ठंड लगना, उल्टी, कमजोरी. जब तक वह अस्पताल पहुंचीं, संक्रमण उनके गुर्दों तक पहुंच चुका था. वह यूरोसेप्सिस से जूझ रही थीं. आईसीयू में भर्ती होने से बस एक कदम दूर. अंग विफलता से बस एक कदम दूर.” हालांकि वह बच गई. डॉक्टर कहते हैं कि, गहन जांच से पता चला कि इसका कारण न तो उसका काम था, न उसकी जीवनशैली, न स्वच्छता में लापरवाही, बल्कि उसकी एक गलत आदत थी. जिसकी वजह से वह संक्रमण का शिकार हो गई.
डॉ. वरिंदर के मुताबिक, महिला “पिछले 6 महीनों से अपनी एक दोस्त की सलाह पर हर 3-4 दिन में वजाइनल वॉश का इस्तेमाल कर रही थी. उसे नहीं पता था कि अत्यधिक सफाई से शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली नष्ट हो जाती है. उसे यह भी नहीं पता था कि इंटिमेट वॉश से यूटीआई का खतरा बढ़ सकता है. वह बस ‘साफ’ रहना चाहती थी. साफ होने का मतलब हमेशा सुरक्षित रहना नहीं होता. बता दें कि, यूटीआई हमेशा गंदगी के कारण नहीं होता है. अगर आपको इस स्टोरी ने डरा दिया है, तो इसका यही मकसद था. क्योंकि अगली बार, यह आपके किसी प्रियजन के साथ भी हो सकता है.”
वजाइनल वॉश का इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह योनि के प्राकृतिक pH संतुलन और स्वस्थ बैक्टीरिया (लैक्टोबैसिली) को बिगाड़ सकता है. इससे बैक्टीरियल वेजिनोसिस (BV), यीस्ट इन्फेक्शन (थ्रश) और यूटीआई (UTI) जैसे संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है, साथ ही जलन और सूखापन भी हो सकता है. इसलिए इनका नियमित और अंदरूनी इस्तेमाल टालना चाहिए. केवल बाहरी हिस्से (वल्वा) की सफाई गुनगुने पानी और हल्के साबुन से ही करनी चाहिए, और डॉक्टर की सलाह पर ही कोई नया उत्पाद इस्तेमाल करना चाहिए.
यूटीआई की समस्या होने पर सबसे पहले मूत्र संबंधी समस्याएं देखने को मिलती है. इसके अलावा, मूत्रमार्ग और मूत्राशय की परत में सूजन, पेशाब करने में दर्द या जलन महसूस होना, बार-बार पेशाब आना, पेशाब से बदबू आना, पेशाब से खून आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, हल्का बुखार, कभी-कभी ठण्ड के साथ कंपकंपी आना, जी मिचलाना आदि इसके लक्षण हैं.
– टॉयलेट के उपयोग के बाद अपने जनांगों को अच्छी तरह आगे से लेकर पीछे तक जरूर पोछें. यह आदत गूदा (Anus) से मूत्र मार्ग (Urethra) में इकोलाई (E.coli) बैक्टीरिया के प्रवेश के जोखिम को कम कर देती है.
– अगर आप दिनभर अच्छी मात्रा में पानी पीते हैं तो यूरीन के साथ सारे बैक्टीरिया फ्लश हो जाते हैं. ऐसे में महिलाओं को भरपूर पानी पीने की आदत डालनी चाहिए.
– अगर आपको पेशाब लगी है तो उसे रोकें नहीं. हर 3 से 4 घंटे में यूरीन पास जरूर करें. प्रेगनेंट महिलाओं को तो इस बात का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है.
– सेक्शुअल ऐक्टिविटी के बाद यूटीआई की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे में सेक्स के पहले और बाद में जरूर टॉयलेट जाएं और पेशाब करें. हो सके तो जनांगों को पानी से साफ भी करें.
– पीरियड के दौरान खुशबूदार पैड, टैम्पॉन आदि की जगह नॉर्मल पैड सेहत के लिए ज्यादा बेहतर है. इसके अलावा, गुप्तांगों के आसपास खुशबू वाले पाउडर, डियोड्रेंट स्प्रे, खुशबूदार साबुन, खुशबूदार तेल आदि कतई प्रयोग में ना लाएं.
– प्रोबायोटिक भोजन यानी दही, फरमेंटेड फूड आदि को भोजन में शामिल करें. ये आपके गट में मौजूद गुड बैक्टीरिया को बढ़ाएंगे जो आपको संक्रमण से बचाने का काम करेंगे.
– क्रैनबेरी यूटीआई से बचाव में बहुत ही कारगर फल है. इसका प्रयोग बरसों से घरेलू उपचार में किया जाता है. इसमें कई तत्व हैं जो यूटीआई के संक्रमण की संभावना को दूर रखते हैं.
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