Bee Sting Deaths Rising: देशभर में दिनों-दिन मधुमक्खियों का आतंक बढ़ता जा रहा है. ये संख्या असम में तेजी से बढ़ती दिख रही हैं. गर्मियों में मधुमक्खियों के काटने के मामले अधिक देखे जाते हैं. आईसीएमआर के डॉक्टर (ICMR Doctor) सुरजीत गिरी कहते हैं कि असम में हर साल 15-20 मौत मधुमक्खियों के काटने से हो रही है. इसको लेकर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है. आइए जानते हैं कैसे करें बचाव-
जानिए, गर्मियों में क्यों बढ़ जाता है मधुमक्खियों का हमला.
Bee Sting Deaths Rising: देशभर में दिनों-दिन मधुमक्खियों का आतंक बढ़ता जा रहा है. इनके हमले से बड़ी संख्या में घायल लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं. मधुमक्खी के काटने से कई लोगों की मौत भी हो जा रही है. ये संख्या असम में तेजी से बढ़ती दिख रही हैं. गर्मियों में मधुमक्खियों के काटने के मामले अधिक देखे जाते हैं. इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए डॉक्टर भी हैरान हैं. लोगों में भय का माहौल साफ देखा जा सकता है. आईसीएमआर के डॉक्टर (ICMR Doctor) सुरजीत गिरी कहते हैं कि असम में हर साल 15-20 मौत मधुमक्खियों के काटने से हो रही है. इसको लेकर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है. साथ ही पब्लिक हेल्थ सेक्टर को भी इलाज को लेकर सजग होना चाहिए. अब सवाल है कि आखिर, गर्मियों में मधुमक्खियों के हमले क्यों बढ़ जाते हैं? मधुमक्खी का डंक कितना खतरनाक? मधुमक्खियों के काटने के इलाज पर क्या कहते विशेषज्ञ? आइए जाते हैं इस बारे में-
गर्मियों में मधुमक्खियों के हमले बढ़ने का मुख्य कारण गर्मी का तनाव, भोजन (फूलों के पराग/मकरंद) की कमी और प्यास है, जिससे वे आक्रामक हो जाती हैं. दरअसल, मधुमक्खियों को फूल आकर्षित करते हैं. सरसों के फूलों की ओर आकर्षित होकर मधुमक्खियां पेड़ों पर अपना छत्ता बनाती हैं. गर्मी से पहले जब सरसों की कटाई शुरू होती है, तो तेज आवाज या थ्रेशर के धुएं से ये भड़क जाती हैं और हमला कर देती हैं. गर्मी में मधुमक्खियों की टीम नई जगह और गंध की तलाश में रहती हैं.
गर्मी में मधुमक्खियों की टीम नई जगह और गंध की तलाश में रहती है. ऐसे में कोई भी इनके भोजन में बाधा डालता है, तो ये हमला कर देती हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि मधुमक्खियां हर डंक के साथ जहर की थैली छोड़ती हैं. बता दें कि, मधुमक्खी 4 तरह की होती हैं. इनमें एपिस सेरेना इंडिका, एपिस फ्लोरिमा और रॉक बी प्रजाति पाली-मारवाड़ में पाई जाती हैं.
द सेंटिनल के साथ बातचीत में डॉ. सुरजीत गिरी (सांपों के विशेषज्ञ) ने बताया कि, मधुमक्खियों का हमला तुरंत मौत का कारण बन सकता है. हालांकि, असम में इसके सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन विभिन्न स्रोतों से पता चलता है कि राज्य में हर साल ऐसी घटनाओं के कारण लगभग 15–20 लोगों की मौत हो जाती है. अहम बात यह है कि इनमें से कई मौतों को रोका जा सकता है, बशर्ते आम लोग और स्वास्थ्य सेवा, दोनों ही सतर्क और जागरूक रहें.
डॉ. गिरी मधुमक्खियों के डंक की तुलना सांप के काटने से करते हैं. वे कहते हैं कि, कभी सांपों के काटने को भी लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया. पहले इसको केवल गरीब किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की समस्या माना जाता था. लेकिन, बदलते पर्यावरणीय हालात की वजह से, मधुमक्खियों के हमले के मामले अब सभी सामाजिक-आर्थिक वर्गों में बढ़ गए हैं.
उन्होंने बताया कि यह खतरा बहुत तेज़ी से बढ़ सकता है. गंभीर एलर्जी होने पर मरीज तुरंत बेहोश हो सकता है, और अगर इलाज में देरी हो तो 48 से 72 घंटों के भीतर किडनी फेल भी हो सकती है. त्वचा में रह गए डंक, धीरे-धीरे जहर छोड़ते रहते हैं. इससे जहर फैलता रहता है.
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