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Causes of Blood Clots: सलीम खान को हुई बीमारी ब्लड क्लॉट क्या है, जानें इसके लक्षण और सावधानियां?

Causes of Blood Clots: सलमान खान के पिता सलीम को मंगलवार, 17 फरवरी को मुंबई के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. उन्हें ब्लड क्लॉट की शिकायत बताई गई. जानिए यह क्या होता है और इससे कैसे बच सकते हैं?

Causes of Blood Clots: सलमान खान के पिता सलीम को मंगलवार, 17 फरवरी को मुंबई के एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उन्हें लीलावती हॉस्पिटल ले जाया गया और सलमान खान को भी अपने पिता के पास वहां पहुंचते देखा गया. सलमान के अलावा परिवार के कई और सदस्य, अलवीरा अग्निहोत्री, आयुष शर्मा और दूसरे लोग भी देखे गए. हालांकि, परिवार की तरफ से कोई बयान नहीं आया है कि उन्हें असल में क्या हुआ लेकिन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जाने-माने स्क्रीनराइटर को ICU में भर्ती कराया गया था. 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सलीम खान को ब्लड क्लॉट होने का पता चला है. वह अभी ICU में ऑब्ज़र्वेशन में हैं, हालांकि उनके वाइटल पैरामीटर्स स्टेबल माने जा रहे हैं. हॉस्पिटल अथॉरिटीज़ और खान परिवार के सदस्यों से उनकी हालत के बारे में और जानकारी का इंतजार है. हाई ब्लड प्रेशर के कारण उन्हें ब्लड क्लॉट होने का पता चला. 

ब्लड क्लॉट क्या है?

ग्वालियर के डॉक्टर तोरन यादव के अनुसार, ब्लड क्लॉट, ब्लड सेल्स और दूसरी चीजों का एक सेमी-सॉलिड मास होता है. यह आपकी ब्लड वेसल्स में बनता है. अगर आपको चोट लगी है या आपकी सर्जरी हुई है, तो ब्लड क्लॉट आपको बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग से बचाते हैं. हालांकि, आपको दूसरे कारणों से भी ब्लड क्लॉट हो सकते हैं, जैसे कि कुछ मेडिकल कंडीशन होना. जब ऐसा होता है तो ब्लड क्लॉट से लक्षण हो सकते हैं और यह जानलेवा भी हो सकता है. लेकिन, शरीर में बनने वाले छोटो-छोटे खून के थक्के कभी-कभी जानलेवा भी हो सकते हैं. ये दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी की वजह बन सकते हैं. इन्हें नजरअंदाज करना काफी भारी पड़ सकता है. 

ब्लड क्लॉट क्या करते हैं?

अगर आपकी नाज़ुक ब्लड वेसल को कोई नुकसान पहुंचाता है, तो ब्लड क्लॉट बचाव की पहली लाइन होते हैं. अगर शेविंग करते समय आपको कट लग जाए, तो ब्लड क्लॉट की वजह से ही कुछ सेकंड या मिनट बाद ब्लीडिंग बंद हो जाती है. आपको दूसरे कारणों से भी ब्लड क्लॉट हो सकता है, जैसे कि लंबे समय तक बिना हिले-डुले रहना या ऐसी कोई मेडिकल कंडीशन होना जिससे ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ जाए. जब ​​ऐसा होता है, तो आपका खून वैसे नहीं बहता जैसा उसे बहना चाहिए.

ब्लड क्लॉट किससे बने होते हैं?

ब्लड क्लॉट प्लेटलेट्स और फाइब्रिन से बने होते हैं. प्लेटलेट्स सेल्स के छोटे, बिना रंग के टुकड़े होते हैं जो आपकी बोन मैरो बनाती है. फाइब्रिन एक ब्लड प्रोटीन है. यह चिपचिपा होता है और लंबे धागे जैसा दिख सकता है. प्लेटलेट्स और फाइब्रिन मिलकर आपकी ब्लड वेसल के घायल हिस्सों को सील करते हैं. 

जब हमारा ब्लड गाढ़ा होकर जमने लगता है तो उसे खून का थक्का या ब्लड क्लॉट कहते हैं. अधिकतर यह पैरों की नसों में बनते हैं. यदि यह थक्के या क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं तो यह ‘पल्मोनरी एम्बोलिज्म’ बन जाते हैं, जो काफी डेंजरस होते हैं क्योंकि यह खून और ऑक्सीजन को रोकते हैं. आपके दिमाग में ब्लड फ्लो को रोकने वाले ब्लड क्लॉट स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं. आपके दिल में ब्लड क्लॉट हार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार, यह तब होता है जब दिमाग में खून का थक्का पीड़ित के दिमाग की खून की नली को बंद कर देता है. इससे आसपास के ऊतर ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से वंचित हो जाते हैं. 

बुजुर्गों को रहना चाहिए सतर्क

यह बीमारी बुजुर्गों के लिए काफी खतरनाक हो सकती है. 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए इस बीमारी से ज्यादा खतरा होता है. यह बीमारी वक्त के साथ धमनियों में चर्बी के जमने, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, खराब जीवनशैली, लगातार 8-9 घंटे तक बैठे रहना और फैमिली जेनेटिक की वजह से होती है. बुजुर्ग ज्यादा सोचते रहते हैं, इसलिए भी यह परेशानी उनके साथ बड़ जाती है.

अचानक तेज सिरदर्द होना 
शरीर के एक तरफ कमजोरी या लकवा लग जाना
सुन्नता या झुनझुनी की अनुभूति होना
बोलने या भाषा समझने में कठिनाई से जूझना
नजर में बदलाव आने लगता है.
चक्कर आना या संतुलन खोना है.
भ्रम या आसपास की चीजों को समझने में कठिनाई
दौरे पड़ना
होश खोना

इस बीमारी इलाज क्या है?

इस बीमारी से बचना है तो सबसे पहले अपनी जीवनशैली को सुधारना होता है. इसके अलावा किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए. बिना डॉक्टर के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए. इसका एक प्रोपर ट्रीटमेंट होता है. नियमित व्यायाम, सही भोजन, पर्याप्त पानी, टेंशन फ्री लाइफ का होना भी काफी अहम है. समय-समय पर इसकी जांच भी करवाते रहना चाहिए.

डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता के लिए है और यह किसी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है. यह विभिन्न स्त्रोतों से ली गई है. पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी दवा या उपचार को लेने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लें.

Pushpendra Trivedi

मैं इंडिया न्यूज में सीनियर सब एडिटर की पोस्ट पर हूं. मैं यहां पर धर्म, लाइफस्टाइल, मनोरंजन, नेशनल, टेक एंड ऑटो और वायरल खबरों को एडिट करता हूं. मुझे पत्रकारिता और कंटेंट की फील्ड में 6 साल से ज्यादा का अनुभव है.

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