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डायलिसिस एक्सेस: भारत में CKD मरीजों के लिए Vascular Surgeon की बढ़ती आवश्यकता

नई दिल्ली,13 अगस्त: भारत में Chronic Kidney Disease (CKD) और End-Stage Kidney Disease (ESKD) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर वर्ष हजारों नए मरीजों को…

नई दिल्ली,13 अगस्त: भारत में Chronic Kidney Disease (CKD) और End-Stage Kidney Disease (ESKD) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर वर्ष हजारों नए मरीजों को हीमोडायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। डायलिसिस की सुविधाएँ बढ़ रही हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण चुनौती आज भी बनी हुई है—समय पर सुरक्षित और टिकाऊ vascular access की उपलब्धता तथा प्रशिक्षित Vascular Surgeons की कमी।

Indian Journal of Vascular and Endovascular Surgery में प्रकाशित “Arteriovenous Access: The Unsung Hero of Vascular Surgery – An Indian Perspective” में भी इस बात पर बल दिया गया है कि भारत में dialysis access की सबसे बड़ी चुनौतियों में समय पर विशेषज्ञ तक पहुँच और vascular access सेवाओं का सीमित प्रसार शामिल है।

वास्तविक समस्या यह है कि अधिकांश मरीज Vascular Surgeon के पास तब पहुँचते हैं जब डायलिसिस पहले ही शुरू हो चुकी होती है। कई मरीज महीनों तक temporary catheter के सहारे डायलिसिस करवाते रहते हैं, कुछ की नसें बार-बार catheter के कारण खराब हो जाती हैं और कई मरीज पहली AV Fistula के फेल होने के बाद ही विशेषज्ञ तक पहुँचते हैं। यदि CKD के उन्नत चरण (Stage 4–5) में ही referral हो जाए, तो समय रहते उपयुक्त vascular access की योजना बनाई जा सकती है।

Hemodialysis के लिए सबसे विश्वसनीय access Arteriovenous Fistula (AVF) माना जाता है। जब अपनी नसें उपयुक्त न हों, तब AV Graft उपयोगी विकल्प हो सकता है। तत्काल डायलिसिस की आवश्यकता होने पर Permcath लगाया जाता है, जबकि temporary catheter केवल आपातकालीन परिस्थितियों के लिए होना चाहिए।

Vascular Surgeon की भूमिका केवल AV Fistula बनाना नहीं है। वे मरीज की नसों का मूल्यांकन कर सबसे उपयुक्त access की योजना बनाते हैं, AV Fistula एवं AV Graft तैयार करते हैं, आवश्यकता होने पर Permcath स्थापित करते हैं तथा access से जुड़ी जटिलताओं का उपचार करते हैं। Fistula में stenosis होने पर fistula angioplasty तथा thrombosed या dysfunctional fistula में open surgical salvage द्वारा अनेक access को दोबारा कार्यशील बनाया जा सकता है, जिससे कई बार नई fistula बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

समय पर Vascular Surgeon के पास पहुँचने से catheter dependence कम होती है, संक्रमण का जोखिम घटता है, central venous complications से बचाव होता है और मरीज को अधिक सुरक्षित एवं टिकाऊ dialysis access मिल पाता है।

भारत में Dialysis Care को मजबूत बनाने के लिए केवल डायलिसिस केंद्रों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। उतनी ही आवश्यकता है कि CKD मरीजों का समय पर Vascular Surgeon के पास referral हो, vascular access के प्रति जागरूकता बढ़े और इस क्षेत्र में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाई जाए। यही भविष्य में बेहतर dialysis outcomes की आधारशिला होगी।

Disclaimer: यह article केवल general information के लिए है और medical advice, diagnosis या treatment का substitute नहीं है। किसी भी medical decision के लिए Vascular Surgeon, से consultation जरूर लें।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

Indianews Webdesk

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