Heart Disease: अधिक्तर लोग ऐसा सोचते हैं कि जब तक हम जवान हैं, हमें हृदय रोग जैसी समस्याओं के बारे में टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. इसमें डॉक्टर ने हार्ट डिजीज का सच बताया.
3 साल के बच्चे भी सुरक्षित नहीं, हृदय रोग का डरावना सच
Heart Disease: जब आप जवान होते हैं, तो खुद को बेहतर, निरोग महसूस करना बहुत आसान होता है. जैसे कि दिल की बीमारी जैसी गंभीर समस्याएं अभी दशकों दूर हैं, और इनके बारे में चिंता करने की आपको जरूरत 50 साल की उम्र के बाद ही पड़ेगी. हालांकि, यह सोच भ्रामक हो सकती है. असल में, दिल की सेहत की नींव बहुत पहले ही पड़नी शुरू हो जाती है, और आपकी रोजमर्रा की आदतों के जरिए धीरे-धीरे इसका आकार बनता है.
डॉ. जेरेमी लंदन, जो 25 वर्षों के अनुभव वाले एक बोर्ड-सर्टिफाइड कार्डियोथोरेसिक सर्जन हैं, हृदय रोग से जुड़ी एक आम गलतफहमी को दूर कर रहे हैं. 17 अप्रैल को शेयर किए गए एक इंस्टाग्राम वीडियो में, उन्होंने बताया कि हृदय रोग कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो बुढ़ापे में अचानक हमें अपनी चपेट में ले लेती है, बल्कि, यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो बहुत पहले ही शुरू हो जाती है. एक ऐसी प्रक्रिया जिसे हम पहले से ही अपने भीतर लिए घूमते हैं और जिसके लक्षण तीन साल की उम्र से ही दिखाई देने शुरू हो सकते हैं.
यह मान लेना बहुत आसान होता है कि जवानी हमें सुरक्षा देती है, कि दिल की बीमारी जैसी समस्याएं जिंदगी में बहुत बाद में चिंता का कारण बनती हैं. हालांकि, जैसा कि डॉ. जेरेमी बताते हैं, यह प्रक्रिया 50 साल की उम्र में शुरू नहीं होती है. यह ज्यादातर लोगों की सोच से कहीं पहले शुरू हो सकती है. असल में, ऑटोप्सी स्टडीज से पता चला है कि फैटी स्ट्रीक्स जो एथेरोस्क्लेरोसिस के शुरुआती चरणों का संकेत हैं, तीन साल तक के छोटे बच्चों की धमनियों में भी पाए गए हैं.
वह कहते हैं, “अगर मैं आपसे कहूं कि दिल की बीमारी 50 साल की उम्र में शुरू नहीं होती है, बल्कि असल में यह तीन साल की उम्र से ही शुरू हो सकती है, तो आपको कैसा लगेगा? कई ऑटोप्सी स्टडीज से पता चला है कि तीन साल तक के बच्चों की धमनियों में भी फैटी स्ट्रीक्स (वसा की परतें) पाई जाती हैं, और ये एथेरोस्क्लेरोसिस की शुरुआती अवस्थाएं होती हैं.”
हार्ट सर्जन एक आम गलतफहमी की ओर ध्यान दिलाते हैं: कि एथेरोस्क्लेरोसिस यानी धमनियों का कड़ा होना कोई ऐसी चीज नहीं है जो किसी गंभीर बीमारी की तरह अचानक हमें अपनी चपेट में ले ले. असल में, यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो कुछ हद तक शरीर के अंदर स्वाभाविक रूप से शुरू होती है. यह अचानक सामने नहीं आती, बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ती है, और कई कारक इसमें योगदान देते हैं और इसकी गति को तेज करते हैं.
वे समझाते हैं, “एक हार्ट सर्जन के तौर पर, मैं आपको बता सकता हूं कि एथेरोस्क्लेरोसिस कई दशकों के दौरान विकसित होता है. फिर भी, हममें से अधिक्तर लोग यह मान लेते हैं कि दिल की बीमारी और धमनियों का कड़ा होना ऐसी स्थितियां हैं जो हमें जीवन के बाद के पड़ाव में होती हैं. सच तो यह है कि यह कुछ ऐसा है जो पहले से ही हमारे अंदर मौजूद होता है.”
कई ऐसे कारक हैं जो एथेरोस्क्लेरोसिस के बढ़ने की गति को तेज करते हैं. और इनमें से ज्यादातर हमारे नियंत्रण में होते हैं. खराब खान-पान, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर और सुस्त जीवनशैली जैसी आदतें धमनियों के अंदर धीरे-धीरे जमाव पैदा करती हैं. डॉ. जेरेमी इस बात पर जोर देते हैं कि ये रोजमर्रा के चुनाव जिन्हें समय के साथ लगातार दोहराया जाता है, धीरे-धीरे दिल की बीमारी के विकास को बढ़ावा देते हैं.
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी तरह का सलाह चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर या एक्सपर्ट से सलाह लें.
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