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चेस्ट इंफेक्शन कितना खतरनाक? जिसकी वजह से शरद पवार को हॉस्पिटल में कराना पड़ा भर्ती, जानिए बढ़ती उम्र के जोखिम

Sharad Pawar chest infection: पिछले दिनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) प्रमुख शरद पवार की तबीयत बिगड़ने से उन्हें पुणे के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मेडिकल चेकअप के बाद 85 वर्षीय शरद पवार में चेस्ट इंफेक्शन की पुष्टि हुई थी. ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि, आखिर चेस्ट इंफेक्शन क्या है? क्यों होता हैं यह इंफेक्शन? बढ़ती उम्र में चेस्ट इंफेक्शन के जोखिम क्या हैं? इस बारे में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. नरेश कुमार ने जानकारी दी-

Sharad Pawar chest infection: पिछले दिनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) प्रमुख शरद पवार की तबीयत बिगड़ने से उन्हें पुणे के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मेडिकल चेकअप के बाद 85 वर्षीय शरद पवार में चेस्ट इंफेक्शन की पुष्टि हुई थी. ऐसे में लोग जानना चाहते हैं कि, आखिर चेस्ट इंफेक्शन क्या है? क्यों होता हैं यह इंफेक्शन? बढ़ती उम्र में चेस्ट इंफेक्शन के जोखिम क्या हैं? इसके लक्षण और बचाव क्या हैं? ये सवाल आपके भी हो सकते हैं. आखिर सच्चाई क्या है- यही जानने के लिए India News ने लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल, नई दिल्ली में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. नरेश कुमार से बात की-

क्यों होता है चेस्ट इंफेक्शन?

डॉ. नरेश कुमार कहते हैं कि, चेस्ट में इंफेक्शन बैक्टीरिया या वायरस की वजह से हो सकता है. इसके चलते कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यह परेशानी होने पर सबसे अधिक दिक्कत सांस लेने में होती है. चेस्ट में इंफेक्शन का कारण अधिकतर ब्रोंकाइटिस वायरस होता है. यह किसी भी इनफेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में आने से शरीर में फैल सकता है. 

किन लोगों में चेस्ट इंफेक्शन का खतरा अधिक?

चेस्ट इंफेक्शन का खतरा ज्यादातर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, धूम्रपान करने वालों, गर्भवती महिलओं या मोटापे से शिकार लोगो में ज्यादा पाया जाता है. चेस्ट इंफेक्शन में ज्यादा खांसी के साथ गले में बलगम फसने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है. खांसी के साथ तेज बुखार चेस्ट इंफेक्शन का संकेत हो सकते हैं. 

बुजुर्गों में चेस्ट इंफेक्शन का खतरा अधिक क्यों?

डॉक्टर कहते हैं कि, बुजुर्गों और बच्चों में चेस्ट इंफेक्शन का खतरा सबसे अधिक होता है. क्योंकि, बच्चों में इम्युनिटी बन रही होती है और बुजुर्गों में कमजोर हो चुकी होती है. यही कारण है कि बुजुर्ग इस बीमारी के गिरफ्त में अधिक आते हैं. वृद्ध लोगों में यह समस्या निमोनिया या ब्रोंकाइटिस का रूप ले सकती है, जो कभी-कभी घातक भी हो सकती है इस दौरान बीमारी को हील कर पाना मुश्किल होता है. हालांकि, हेल्दी लाइफस्टाइल और खानपान से परेशानी को कंट्रोल किया जा सकता है. 

चेस्ट इंफेक्शन के लक्षण

  • खांसी के साथ गीला बलगम आना.
  • बोलते समय गले में घरघराहट होना.
  • हेल्थ लाइन के अनुसार,  बुखार और सिर दर्द चेस्ट इन्फेक्शन के लक्षण होते हैं.
  • गले में घुटन और सांस लेने में परेशानी होना.
  • सीने में हर समय बेचैनी होना.
  • मांसपेशियों और पूरी बॉडी में पेन होना.
  • हर समय कमजोरी और थका हुआ महसूस होना.
  • पीला और हरा बलगम आना.

बुजुर्गों में चेस्ट इंफेक्शन के लक्षण

  • दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, जिसमें बलगम (हरा, पीला या जंग के रंग का) आ सकता है.
  • सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द.
  • 102°F (38.9°C) से अधिक का बुखार, ठंड लगना या कंपकंपी.
  • अत्यधिक थकान, कमजोरी और ऊर्जा में कमी।
  • स्पष्ट लक्षण न दिखना (कई बार बुजुर्गों में बुखार नहीं आता, केवल भ्रम (confusion) या सुस्ती जैसे लक्षण दिखते हैं).

चेस्ट इंफेक्शन से बचाव के तरीके

  • बुखार या दर्द होने पर डॉक्टर से परामर्श की गई एंटीबैक्टीरियल दवाई ले सकते हैं.
  • ठीक प्रकार से अपनी बॉडी को रिलैक्स करें और जितना हो सके आराम करें.
  • गले से बलगम निकालने के लिए ओटीसी डिकॉन्गेस्टेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • ज्यादा से ज्यादा लिक्विड चीजों का सेवन करें और खुद को हाइड्रेटेड रखें. इससे बलगम गले में नहीं फंसेगा और सांस लेने में आसानी होगी.
  • दिन में दो से तीन बार इनहेलर या स्टीम ज़रूर लें.
  • रात में सोते वक्त सीधे लेटने से बचें. ऐसा करने से चेस्ट में बलगम जमा हो सकता है. सोते समय सिर के नीचे तकिया रख सकते हैं.
  • गले में तकलीफ होने पर हल्का गर्म पानी में शहद और नींबू डालकर पीने से राहत मिलती है.
  • स्मोकिंग करने से बचें और धुएं वाली जगह पर न जाएं.

छाती में इंफेक्शन होने से क्या होता है?

छाती में संक्रमण से कभी-कभी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जैसे निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, या फेफड़ों के फोड़े. ये उन व्यक्तियों में अधिक आम हैं जिन्हें अंतर्निहित श्वसन संबंधी समस्याएं या कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली है.

छाती में संक्रमण का दर्द कहां स्थित होता है?

कुछ लोगों को सांस लेते और छोड़ते समय सीने में तेज दर्द होता है. ऐसा अक्सर फेफड़े और पसलियों के बीच की पतली परत, जिसे प्लूरा कहते हैं, में संक्रमण और सूजन के कारण होता है. इस सूजन को प्लूरिसी कहते हैं, जिसके कारण सांस लेते समय फेफड़ों की गति सुचारू रूप से नहीं हो पाती.

छाती का संक्रमण साफ होने में कितना समय लगता है?

सीने में संक्रमण के लक्षण आमतौर पर सात से दस दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं. आपकी खांसी और बलगम तीन सप्ताह तक रह सकते हैं. यदि आपको फेफड़ों की कोई बीमारी है, तो आपको गंभीर सीने में संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है.

Lalit Kumar

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