International Nurses Day 2026: दुनियाभर में आज यानी 12 मई को इंटरनेशनल नर्सेस डे मनाया जाता है. यह दिन Florence Nightingale की जयंती के मौके पर मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य नर्सों के योगदान को सम्मान देना और उनकी भूमिका को समझना है. नर्सिंग एक ऐसा काम है जिसमें स्किल, धैर्य और इंसानियत तीनों की जरूरत होती है. आइए जानते हैं नर्स के योगदानों के बारे में-
नर्स दिवस पर पढ़िए उनका संघर्ष. (Canva)
International Nurses Day 2026: दुनियाभर में आज यानी 12 मई को इंटरनेशनल नर्सेस डे मनाया जाता है. यह दिन Florence Nightingale की जयंती के मौके पर मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य नर्सों के योगदान को सम्मान देना और उनकी भूमिका को समझना है. आमतौर पर लोगों को लगता है कि, अस्पताल में नर्स का काम सिर्फ इंजेक्शन लगाना होता है. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो यकीन मानिए कि आप गलत हैं. दरअसल, नर्सिंग एक ऐसा काम है जिसमें स्किल, धैर्य और इंसानियत तीनों की जरूरत होती है. जब आप अस्पताल में भर्ती होते हैं, तब बेशक आपका इलाज डॉक्टर करते हैं, लेकिन आपकी देखभाल की जिम्मेदारी नर्सों पर होती है. अस्पतालों में मरीजों की केयर से लेकर दवाओं का मैनेजमेंट और इमरजेंसी सेवाओं में नर्सों का महत्वपूर्ण योगदान होता है.
बता दें कि, नर्सिंग एक ऐसा काम है जिसमें स्किल, धैर्य और इंसानियत तीनों की जरूरत होती है. लेकिन इस पेशे में लंबे काम के घंटे भी एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं. कई नर्सें 12-12 घंटे की शिफ्ट करती हैं, जो स्टाफ की कमी, इमरजेंसी केस, ज्यादा मरीज और लगातार कागजी काम की वजह से और लंबी हो जाती हैं. ऐसे में कई बार उन्हें ठीक से खाना खाने या आराम करने का समय भी नहीं मिल पाता. धीरे-धीरे यह थकान उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाती है.
सीएचसी भंगेल नोएडा में कार्यरत ऋतु चौधरी कहती हैं कि, अस्पताल में नर्स का काम सिर्फ दवा देना या इंजेक्शन लगाना ही नहीं होता है. नर्सें मरीजों की पूरी देखभाल से जुड़ी होती हैं. मरीज का ब्लड प्रेशर, तापमान, ऑक्सीजन लेवल और दूसरी जरूरी कंडीशंस की मॉनिटरिंग करना भी ड्यूटी का हिस्सा होता है. डॉक्टर द्वारा बताए गए ट्रीटमेंट और दवाओं को सही समय पर मरीज तक पहुंचाना भी नर्सों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. कई बार मरीज की हालत में छोटे-छोटे बदलाव सबसे पहले नर्सें ही नोटिस करती हैं और तुरंत डॉक्टर को जानकारी देती हैं.
आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और नवजात शिशु विभाग जैसे सेंसिटिव डिपार्टमेंट में नर्सों की भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है. सीएचसी नोएडा में कार्यरत प्रिया मसीह कहती हैं कि, गंभीर मरीजों की लगातार निगरानी, मेडिकल उपकरणों को संभालना और इमरजेंसी कंडीशन में तेजी से प्रतिक्रिया देना उनके काम का अहम हिस्सा होता है. कई बार मरीज और उनके परिवार वाले मानसिक तनाव में होते हैं, ऐसे में नर्सें उन्हें भावनात्मक सहारा देने का काम भी करती हैं. जब मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज होते हैं, तो वह नर्सों के लिए काफी संतोषजनक होता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत रंग लाई है.
नर्सों का काम बेहद सम्मानजनक माना जाता है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी होती हैं. लंबे और थकाऊ ड्यूटी घंटे, रात की शिफ्ट, लगातार खड़े रहकर काम करना और एक साथ कई मरीजों की जिम्मेदारी संभालना शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कठिन हो सकता है. कई अस्पतालों में स्टाफ की कमी होने के कारण नर्सों पर काम का दबाव और बढ़ जाता है. इसके अलावा गंभीर मरीजों और मौत जैसी परिस्थितियों का सामना करना मानसिक तनाव का कारण बन सकता है. कई बार नर्सों को मरीजों या उनके परिजनों के गुस्से और भावनात्मक दबाव का भी सामना करना पड़ता है.
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