Ajit Pawar Plane Crash: अजित पवार के बाद कौन होगा महाराष्ट्र का नया Deputy CM? क्या सुनेत्रा पवार संभालेंगी विरासत या शरद पवार के पास होगी गुट की घर वापसी? जानिए NCP के भविष्य का पूरा सच.
Maharashtra Deputy CM News: महाराष्ट्र की राजनीति में 'पावर गेम' के माहिर खिलाड़ी अजित पवार का सफर एक ऐसे मोड़ पर आकर ठहर गया है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी. नगर निगम चुनावों में भारी जीत और विधायकों के अटूट समर्थन के साथ पार्टी मजबूत दिख रही थी. पिछले कुछ सालों में, अजित पवार NCP के अंदर एक मज़बूत पावर सेंटर बनकर उभरे थे. महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में उनके गुट का प्रदर्शन जहां पार्टी को 760 सीटें मिलीं और राज्य विधानसभा में 41 NCP विधायकों के बीच उनकी स्थिति ने संगठन पर उनकी पकड़ को और मज़बूत कर दिया था. NDA के साथ गठबंधन करने और उपमुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद पवार का राजनीतिक कद तेज़ी से बढ़ा था और पार्टी कार्यकर्ता और दूसरी पंक्ति के नेता उन्हें शरद पवार की विरासत का असली वारिस मानने लगे थे.
इस दुखद घटना का समय राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. पिछले कुछ सालों में, NCP गुटों के बीच संभावित सुलह के बारे में अंदरूनी चर्चाएं कई बार सामने आईं. बैठकें हुईं, और बैक-चैनल बातचीत का भी दावा किया गया. इन सबके बावजूद, अजित पवार का अपने खेमे में अधिकार काफी हद तक निर्विवाद हो गया था.
अजित पवार की पत्नी, सुनेत्रा पवार(Sunetra Pawar) राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि वह हार गईं. अपने पारिवारिक विरासत के कारण वह एक मजबूत दावेदार हैं, लेकिन उनमें अजित जैसी जन अपील की कमी है. उनके बेटे पार्थ(Parth Pawar), युवा हैं और 2019 का लोकसभा चुनाव हार गए थे. उनमें अनुभव की कमी है. इनके अलावा, पार्टी में प्रफुल्ल पटेल (पूर्व केंद्रीय मंत्री), छगन भुजबल (ओबीसी नेता), सुनील तटकरे (पार्टी अध्यक्ष), और धनंजय मुंडे जैसे मजबूत नेता हैं लेकिन कोई भी अजित जितना करिश्माई नहीं है. कुल मिलाकर गुट में कोई एक शक्तिशाली नेता नहीं है जो अजित की जगह ले सके. इससे गुट कमजोर हो सकता है. कुछ प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि बीजेपी इस गुट पर कब्ज़ा कर सकती है.
इस स्थिति में, ऐसी अटकलें भी हैं कि अजित पवार गुट शरद पवार(Sharad Pawar) के पास वापस लौट सकता है. शरद अनुभवी हैं और सुप्रिया सुले(Supriya Sule) राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हैं. अगर विलय होता है, तो शरद का गुट मजबूत हो सकता है क्योंकि अजित का गुट बिना नेता के बिखर सकता है. हालांकि यह भी सवाल है कि अजित पवार की पार्टी के नेता क्या चाहते हैं. यह भी निश्चित है कि अगर यह गुट विलय नहीं करता है और अलग रहता है तो एनसीपी पूरी तरह से कमजोर हो सकती है.
काफी हद तक, यह सब विधायकों की वफादारी और पारिवारिक फैसलों पर निर्भर करेगा. अजित पवार खुद पार्टी का चेहरा संगठनात्मक ताकत और महायुति गठबंधन में मुख्य पावर ब्रोकर थे. किसी अन्य नेता में उनके जैसा करिश्मा, जनसंपर्क कौशल और विधायकों पर नियंत्रण नहीं दिखता है. ये चेहरे एनसीपी के अजित गुट की बागडोर संभालने के दावेदार हो सकते हैं.
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