Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों का एलान हो गया है. सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. ऐसे में करीब 50 प्रतिशत महिला वोटरों को लुभाने के लिए बीजेपी ने करीब 37 लाख महिलाओं को 8 हजार रुपये देने का काम किया है. तो वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस भी महिला वोटरों को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर महिला वोटर्स किस पार्टी को वोट करेंगी?
असम में करीब 50 प्रतिशत महिला वोटरों के लिए अलग-अलग पार्टियों का एजेंडा क्या है?
Assam Election 2026: असम विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों का एलान हो गया है. सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी है. इस बीच असम में मौजूद करीब 50 प्रतिशत महिला वोटरों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर असम की 50 प्रतिशत महिला वोटर्स किस पार्टी के पक्ष में वोट करेंगी?
असम में महिला वोटरों की इतनी बड़ी संख्याओं को देखते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 37 लाख महिलाओं को 8 हजार रुपये देने का काम किया. ऐसे में सवाल उठता है कि असम में महिलाओं का असल मुद्दा क्या है?आइए आज हम इसी मुद्दे के बारे में बात करेंगे.
असम में महिलाओं के मुद्दे कई हैं. लेकिन वर्तमान राजनीति में इस पर बहस नहीं हो रही है. महिलाओं की बड़ी संख्या असम के चाय बागान में काम करती है. ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा एक अहम मुद्दा माना जाता है. इसके अलावा, अगर बात करें तो असम में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा वोट डालती हैं, फिर भी राजनीतिक सत्ता पर पुरुषों का ही दबदबा है. पिछले दो विधानसभा चुनावों में वोट डालने के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया, साल 2016 में 0.34 प्रतिशत अंकों की बढ़त और 2021 में 0.41 अंकों की बढ़त के साथ, इसके बावजूद उनकी यह चुनावी ताकत राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नहीं बदल पाई है.
असम की हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार ने महिलाओं को 8 हजार रुपये देकर महिला वोटरों को लुभाने का काम किया है. लेकिन क्या इसका फायदा मिलेगा? तो इसका जवाब आने वाले वक्त में पता चलेगा. बिहार में ठीक इसी तरह नीतीश कुमार ने महिलाओं को चुनाव से ठीक पहले 10 हजार रुपये देने का काम किया था. इस हिसाब से असम में महिलाओं को 8 हजार रुपये देकर हिमंत बिस्वा सरमा ने बड़ा दाव चला है. इसका फायदा बीजेपी को मिलने की संभावना है.
असम में भले ही महिला वोटरों की संख्या अधिक हो, लेकिन चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या कम हुई है और 126 सदस्यों वाले सदन में भी उनकी संख्या घट गई है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में बीजेपी और कांग्रेस समेत अलग-अलग पार्टियों की 91 महिला उम्मीदवारों में से सिर्फ 8 को ही जीत हासिल हुई थी. इसके बाद 2021 में 76 में से सिर्फ 6 महिलाएं ही विधानसभा पहुंच पाईं, जो महिलाओं की वोटिंग ताकत और राजनीतिक सत्ता में उनके हिस्से के बीच की खाई को दिखाता है.
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