Bee Corridors: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक बेहतरीन शुरूआत की है. जिसके तहत नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया नेशनल हाईवे के हिस्सों पर बी कॉरिडोर बनाएगा. जिसके तहत हाईवे के आसपास एक ऐसा कॉरिडोर तैयार किया जाएगा. जहां फूल वाले पेड़-पौधे लगाए जाएंगे.
एनएचएआई ने नेशनल हाईवे की जमीनों पर बी कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है.
Bee Corridors Benefits: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) नेशनल हाईवेज के हिस्सों पर पॉलिनेटर या ‘बी कॉरिडोर’ बनाएगा. इस पहल के तहत, फूल वाले पेड़-पौधे लगाने पर फोकस किया जाएगा, ताकि साल भर नेक्टर और पॉलेन देने वाली लगातार हरियाली बनी रहे. एनएचएआई ने कहा कि यह कदम हाईवेज के किनारे सजावटी पौधों से इकोलॉजिकल प्लांटेशन की ओर एक बदलाव है.
इस प्लान के तहत, NHAI अपनी प्लांटेशन एक्टिविटीज को इस तरह से अलाइन करेगा कि पेड़ों, झाड़ियों, जड़ी-बूटियों और घासों के मिक्स वाले डेडिकेटेड पॉलिनेटर कॉरिडोर बनाए जा सकें.
प्रजातियों के चुनाव का मकसद यह पक्का करना होगा कि लगभग लगातार खिलने का साइकिल बनाए रखने के लिए अलग-अलग मौसमों में फूल खिलें. जानकारी के अनुसार, नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसी देसी प्रजातियां लगाई जाएंगी. यह डिजाइन फूल वाले खरपतवारों को भी उगने देगा और सूखी लकड़ी और खोखले तने बनाए रखेगा, जो पॉलिनेटर्स को सपोर्ट कर सकते हैं. इसके अलावा, अथॉरिटी ने कहा कि इस पहल का मकसद मधुमक्खियों और दूसरे पॉलिनेटर्स पर असर डालने वाले इकोलॉजिकल स्ट्रेस को दूर करना है, जिसका पॉलिनेशन सर्विस और खेती की प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ता है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फल, सब्जियां, तिलहन और दालों जैसी फसलों के पॉलिनेशन के लिए मधुमक्खियां जरूरी हैं. हेल्दी पॉलिनेटर आबादी ज्यादा फसल की पैदावार, बेहतर क्वालिटी की उपज, बागवानी की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करती है. इस तरह बी कॉरिडोर परोक्ष रूप से भारत की एग्रीकल्चरल इकॉनमी और किसानों की इनकम में मदद करते हैं.
नेशनल हाईवे अलग-अलग इकोलॉजिकल जोन से होकर गुजरते हैं. सड़क किनारे प्लांटेशन बिखरे हुए हैबिटैट के बीच बायोडायवर्सिटी लिंकेज बनाने का एक खास मौका देते हैं. बी कॉरिडोर इकोलॉजिकल कनेक्टर के तौर पर काम कर सकते हैं, देसी पेड़-पौधों और जानवरों को सपोर्ट कर सकते हैं और इकोसिस्टम की मज़बूती को मज़बूत कर सकते हैं. हाईवे के किनारे फूलों वाले प्लांटेशन कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन, धूल कम करने, माइक्रोक्लाइमेट रेगुलेशन, बेहतर एयर क्वालिटी में भी मदद करते हैं और यह पहल भारत के बड़े ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाइमेट लक्ष्यों को पूरा करती है.
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