Bihar Government:बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर सख्त और साफ दिशा-निर्देश जारी कर दिया है.
Bihar Government New Rule
Bihar Government New Social Media Rule: बिहार के सरकारी अधिकारी सावधान हो जाएं, वरना आपकी नौकरी एक पल में चली जाएगी और आप बेबस हो जाएंगे. नीतीश कुमार कैबिनेट ने एक सख्त फैसला लिया है जिससे सरकारी कर्मचारी फेसबुक या व्हाट्सएप इस्तेमाल करने से पहले दो बार सोचेंगे. अगर कोई सरकारी अधिकारी सोशल मीडिया पर कुछ भी आपत्तिजनक पोस्ट करता है, तो उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा. इसलिए, सरकारी अधिकारियों को सावधान रहने की जरूरत है.
अब इस मामले को लेकर भाजपा के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा का बड़ा बयान सामने आया है. मिश्रा ने कहा कि “बिहार सरकार का यह निर्णय पूरी तरह से तार्किक है और प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करने वाला है. सरकारी कर्मचारी जनता की सेवा के लिए होते हैं, न कि सोशल मीडिया पर अनुशासनहीन गतिविधियों के लिए. कार्यस्थल से वीडियो बनाना न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि शासन की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है.”
में सरकारी कर्मचारी व पदाधिकारी सोशल मीडिया खाता बनाने से पहले सक्षम पदाधिकारी से अनुमति लेंगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई भी आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं करेंगे।कार्यस्थल से जुड़े वीडियो या रील बनाने पर पूरी तरह प्रतिबंध पर भाजपा का बयान
दरअसल, नीतीश कुमार कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है. उसने सरकारी कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कड़ा रुख अपनाया है. बिहार कैबिनेट की मीटिंग में फैसला किया गया कि फेसबुक, ट्विटर (X), और टेलीग्राम समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल करने वाले सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट, विवादित पोस्ट या सरकारी पॉलिसी पर अपनी निजी राय देना गंभीर गलत काम माना जाएगा.
नए नियमों के तहत अब कोई भी सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से पहले अपनी अथॉरिटी से इजाजत लेगा. बिना नाम बताए या नकली नाम से अकाउंट चलाना पूरी तरह से मना होगा. सरकार ने साफ़ किया है कि कर्मचारी सोशल मीडिया के ज़रिए कोई पर्सनल फ़ायदा नहीं उठा पाएँगे. इसके अलावा, काम की जगह से जुड़े वीडियो बनाना, लाइव स्ट्रीमिंग करना या सोशल मीडिया पर कोई भी सरकारी एक्टिविटी शेयर करना पूरी तरह से मना होगा. किसी भी सरकारी प्रोसेस, डॉक्यूमेंट या चर्चा को पब्लिक फ़ोरम पर लाना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.
सरकारी कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सोशल मीडिया के जरिए सरकारी पॉलिसी, फैसलों या सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों पर पर्सनल कमेंट न करें. सीनियर अधिकारियों के ख़िलाफ़ गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल करना या विवादित मैसेज पोस्ट करना भी सज़ा के दायरे में आएगा. सरकार ने साफ़ किया है कि सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग, भड़काऊ, विवादित या बांटने वाली पोस्ट सर्विस कोड ऑफ़ कंडक्ट का उल्लंघन मानी जाएगी. ऐसे मामलों में डिपार्टमेंटल कार्रवाई की जाएगी.
ये सभी प्रावधान बिहार सरकारी सेवक आचरण नियम, 1976 के तहत लागू किए जाएंगे. नियम 9 के सब-रूल (2) के बाद एक नया सब-रूल (3) जोड़ने का प्रस्ताव है, जो मीडिया प्लेटफॉर्म और इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लीकेशन के इस्तेमाल से संबंधित होगा. एडिशनल चीफ सेक्रेटरी बी. राजेंद्र के मुताबिक, सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है और साफ गाइडलाइन के जरिए एडमिनिस्ट्रेटिव अनुशासन और गरिमा बनाए रखना चाहती है.
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