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अब एक ही रेगुलेटर संभालेगा देश का हायर एजुकेशन, जानें क्या है केंद्र सरकार का विकसित भारत शिक्षा अधीक्षण बिल

Education bill:  मोदी सरकार इस सप्ताह संसद में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा और अहम विधेयक पेश करने जा रही है. इस विधेयक का नाम विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 है. इसका मकसद देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करना है. इस बिल में प्रस्ताव है कि तीन काउंसिल वाला कमीशन हायर एजुकेशन के लिए सिंगल रेगुलेटर के तौर पर काम करेगा.

Education bill: मोदी सरकार इस सप्ताह संसद में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा और अहम विधेयक पेश करने जा रही है. इस विधेयक का नाम विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 है. इसका मकसद देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करना है. इस बिल में प्रस्ताव है कि तीन काउंसिल वाला कमीशन हायर एजुकेशन के लिए सिंगल रेगुलेटर के तौर पर काम करेगा, जिसका काम आउटकम-बेस्ड एक्रेडिटेशन लागू करना, एकेडमिक स्टैंडर्ड तय करना और इंस्टीट्यूशन को ग्रेडेड ऑटोनॉमी देना होगा. सरकार इस बिल को विंटर सेशन में पेश करने की योजना बना रही है ताकि एजुकेशन सिस्टम में बड़े बदलाव किए जा सकें.

क्या है बिल का मकसद?

शुक्रवार को कैबिनेट से मंज़ूर, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025  जिसे पहले हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ़ इंडिया (HECI) बिल कहा जाता था  का मकसद यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC), ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE), और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) की जगह लेना है. यह हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने को भी रेगुलेट करने की कोशिश करता है, और बिना सरकारी मंज़ूरी के यूनिवर्सिटी बनाने वालों पर ₹2 करोड़ का जुर्माना लगाएगा.

बिल के मुताबिक नया कमीशन यूनिवर्सिटी और दूसरे हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को “एक्रेडिटेशन और ऑटोनॉमी के एक मज़बूत और ट्रांसपेरेंट सिस्टम के ज़रिए इंडिपेंडेंट सेल्फ-गवर्निंग इंस्टीट्यूशन बनने और एक्सीलेंस को बढ़ावा देने” में मदद करेगा.बिल में कहा गया है कि पैनल एजुकेशन की क्वालिटी सुधारने के लिए स्कीम बनाएगा और सुझाव देगा और सेंटर और राज्यों को “हायर एजुकेशन के पूरे डेवलपमेंट” पर सलाह देगा, साथ ही यह “इंडिया को एक एजुकेशन डेस्टिनेशन के तौर पर प्रमोट करने के लिए एक रोड मैप” भी डेवलप करेगा.

हायर एजुकेशन कमीशन में होंगे तीन विंग

नए हायर एजुकेशन कमीशन में तीन विंग रेगुलेटरी काउंसिल, एक्रेडिटेशन काउंसिल और स्टैंडर्ड्स काउंसिल होंगे. बिल में प्रपोज़ल है कि 12 मेंबर वाले कमीशन में हर काउंसिल के प्रेसिडेंट, यूनियन हायर एजुकेशन सेक्रेटरी, स्टेट हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन के दो जाने-माने एकेडेमिशियन, पांच जाने-माने एक्सपर्ट और एक मेंबर सेक्रेटरी शामिल होंगे. बिल में कहा गया है कि सभी अपॉइंटमेंट सेंटर तीन मेंबर वाले सर्च पैनल के ज़रिए करेगा.

इसमें यह भी कहा गया है कि कमीशन या किसी भी काउंसिल का कोई भी ऑफिस बेयरर या एम्प्लॉई “इस एक्ट के तहत अच्छी नीयत से किए गए या किए जाने वाले किसी भी काम के लिए केस, प्रॉसिक्यूशन या दूसरी लीगल प्रोसीडिंग्स का सामना नहीं कर सकता.”

लग सकता है करोड़ो का जुर्माना

बिल में कहा गया है कि इसके नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर ₹10 लाख से ₹30 लाख तक का जुर्माना लग सकता है, और बार-बार गलती करने पर कम से कम ₹75 लाख की सज़ा या सस्पेंशन हो सकता है. इसमें यह भी कहा गया है कि “अगर कोई व्यक्ति केंद्र सरकार या संबंधित राज्य सरकार की मंज़ूरी के बिना कोई यूनिवर्सिटी या हायर एजुकेशनल संस्थान बनाता है, तो उस व्यक्ति पर दो करोड़ रुपये से कम की सज़ा नहीं होगी”.

यह प्रस्तावित एक्ट सभी राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, संसद द्वारा स्थापित दूसरे संस्थानों, भारत में यूनिवर्सिटी और कॉलेज, आर्किटेक्ट एक्ट, 1972 के तहत आने वाले संस्थानों, AICTE-रेगुलेटेड संस्थानों, ओपन और डिस्टेंस लर्निंग संस्थानों और दूसरी हायर एजुकेशन संस्थाओं पर लागू होगा.

सिंगल हायर एजुकेशन रेगुलेटर

एक सिंगल हायर एजुकेशन रेगुलेटर का कॉन्सेप्ट पहली बार 2018 में UGC एक्ट को बदलने के लिए HECI बिल के ड्राफ़्ट के साथ प्रस्तावित किया गया था, लेकिन सेंट्रलाइज़ेशन और यूनिवर्सिटी की ऑटोनॉमी के संभावित नुकसान की चिंताओं के कारण यह रुक गया. इस प्रपोज़ल को नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के तहत फिर से शुरू किया गया, और 2021 में धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनने के बाद एक सिंगल एजुकेशन रेगुलेटर के लिए ज़ोर बढ़ा. अभी, UGC नॉन-टेक्निकल हायर एजुकेशन को रेगुलेट करता है, AICTE टेक्निकल एजुकेशन की देखरेख करता है, और NCTE टीचर्स एजुकेशन के लिए रेगुलेटरी बॉडी है.

बिल में हायर एजुकेशन को रेगुलेट करने में तीनों विंग्स की अलग-अलग भूमिकाओं और ज़िम्मेदारियों की भी लिस्ट है. बिल में प्रपोज़ल दिया गया है कि 14 मेंबर वाली रेगुलेटरी काउंसिल गवर्नेंस और एक्रेडिटेशन की देखरेख करेगी, और यह पक्का करेगी कि “सभी हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स को पूरा एक्रेडिटेशन मिले और इस तरह उन्हें ग्रेडेड तरीके से ऑटोनॉमी मिले.” यह “कमर्शियलाइज़ेशन को रोकने के लिए एक सही पॉलिसी” बनाएगा साथ ही इंस्टीट्यूशन्स द्वारा फाइनेंस, ऑडिट, इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी, कोर्स, एजुकेशनल नतीजों और एक्रेडिटेशन की जानकारी के पब्लिक डिस्क्लोज़र पर भी नज़र रखेगा.

काउंसिल भारत में ऑपरेट करने के लिए कुछ खास विदेशी यूनिवर्सिटीज़ के लिए स्टैंडर्ड भी बताएगी और “अच्छा परफॉर्म करने वाली भारतीय यूनिवर्सिटीज़ को दूसरे देशों में कैंपस खोलने में मदद करेगी”.

बिल में प्रस्ताव है कि 14 सदस्यों वाली एक्रेडिटेशन काउंसिल “एक आउटकम बेस्ड इंस्टीट्यूशनल एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क बनाएगी जिसका इस्तेमाल हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को असेस और एक्रेडिट करने के लिए किया जाएगा.बिल के अनुसार, इंस्टीट्यूशनल एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क एजुकेशनल आउटकम, गुड गवर्नेंस, फाइनेंशियल प्रॉबिटी और स्टेबिलिटी के आधार पर एक्रेडिटेशन पैरामीटर तय करेगा, और एक्रेडिटेशन काउंसिल द्वारा बताए गए अनुसार एक्रेडिटिंग इंस्टीट्यूशन को गाइडेंस देगा.

स्टैंडर्ड्स काउंसिल, या विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद, “हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में एकेडमिक स्टैंडर्ड तय करेगी और ‘एक्सपेक्टेड लर्निंग आउटकम’ (‘ग्रेजुएट एट्रीब्यूट्स’) बनाएगी.” यह “हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को बनाने और चलाने के लिए साफ़ मिनिमम स्टैंडर्ड तय करेगी” और हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के स्टाफ के तौर पर किसी भी व्यक्ति को अपॉइंट करने के लिए क्वालिफिकेशन भी तय करेगी. बिल में यह भी प्रपोज़ल है कि यह वर्ल्ड-क्लास स्टैंडर्ड पाने के लिए इंटरनेशनलाइज़ेशन को बढ़ावा देगा, साथ ही भारतीय ज्ञान, कला और भाषाओं को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा का इंडियनाइज़ेशन भी करेगा.

बिल में कहा गया है कि कमीशन के चेयरपर्सन और हर काउंसिल के प्रेसिडेंट का टर्म शुरू में तीन साल का होगा, जिसे बढ़ाकर पांच साल किया जा सकता है, और वे दूसरे टर्म के लिए फिर से अपॉइंट किए जा सकेंगे. उन्हें भारत के प्रेसिडेंट हटा सकते हैं. कमीशन का अपना फंड होगा जिसे विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान फंड कहा जाएगा और केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर दी जाने वाली सभी रकमें कमीशन के पास होंगी.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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