भारतीय रेलवे आधुनिकीकरण के दौर में तेजी से कदम बढ़ा रहा है. हाल ही में इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे वीडियोज में दिखाया गया है कि पारंपरिक पेंटिंग की जगह अब ट्रेन के कोचों पर हाई-ग्रेड वाइनिल शीट्स चिपकाई जा रही हैं. यह बदलाव यात्रियों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
रेलवे कोच पर होगी वाइनिल रैपिंग
अगर कुछ दिनों में आपको भारत के स्टेशनों पर स्मूद फिनिशिंग वाली चमचमाती ट्रेनें दिख जाएं तो चौंकियेगा मत, क्योंकि भारतीय रेलवे ट्रेनों के कोच में हल्का-सा चेंज कर रहा है.
भारतीय रेलवे आधुनिकीकरण के दौर में तेजी से कदम बढ़ा रहा है. हाल ही में इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे वीडियोज में दिखाया गया है कि पारंपरिक पेंटिंग की जगह अब ट्रेन के कोचों पर हाई-ग्रेड वाइनिल शीट्स चिपकाई जा रही हैं. यह बदलाव यात्रियों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
रियल एस्टेट स्टोरीज और इंडिया ईगो जैसे इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर शेयर हुए वीडियोज में कर्मचारी बड़े प्रिंटेड वाइनिल शीट्स को कोच की सतह पर सावधानी से चिपकाते नजर आ रहे हैं. जबकि पहले रेल कोचों पर इंडस्ट्रियल पेंट से कई कोट लगाए जाते थे, जिसमें सरफेस तैयार करने, ड्राइंग टाइम और पीरियडिक रिपेंटिंग लगती थी. खिड़की के ग्रिल्स पर पेंट के छोटे-छोटे दाने दिखना आम था.
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, वाइनिल रैपिंग से स्मूद फिनिश मिलती है, ड्राइंग टाइम कम होता है और मेंटेनेंस साइकिल तेज हो जाती है. यह तरीका डिजाइन चेंजेस के लिए आसान है. साथ ही इससे ब्रांडिंग या स्पेशल थीम्स जल्दी अपडेट हो सकते हैं. इसके अलावा लंबे समय में मेंटेनेंस कॉस्ट भी घटती है और ट्रेनों को मॉडर्न लुक मिलता है.
एक वीडियो में दिखाया गया कि कैसे वाइनिल आसानी से लगाई जा रही है, जो पारंपरिक तरीके से तेज है. यह रेलवे नेटवर्क पर रोलिंग स्टॉक के रिफर्बिशमेंट को तेज करने का हिस्सा है.
वीडियो वायरल होते ही लोगों के रिएक्शन्स बंट गए. कुछ यूजर्स ने इसे आधुनिक कदम बताया, जबकि कुछ ने इसकी आलोचना की. एक यूजर ने लिखा, “अब ट्रेनें प्रोफेशनल लगेंगी.” लेकिन कई ने सवाल उठाए, “क्या यह सस्ता विकल्प तो नहीं? बिग बजट में भी क्वालिटी पर सवाल?” एक क्लिप में पैसेंजर ने वाइनिल का कोना उधेड़ा, जिससे ‘चीप’ लगने की शिकायत हुई. वहीं, रेलवे इसे एफिशिएंसी स्टेप बता रहा है.
वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने दावा किया कि यह प्रथा पूर्व रेल मंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल से चली आ रही है.पोस्ट में लिखा था, “यह प्रथा ममता बनर्जी के रेल मंत्री रहते हुए शुरू हुई थी.दुरंतो एक्सप्रेस उनके कार्यकाल में ही शुरू हुई थी और उस तरह से सभी ट्रेनों को पेंट करना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने उन्हें विनाइल से लपेटना शुरू कर दिया. अंतर मुश्किल से ही पता चलता है, यह किफायती, तेज और कम झंझट वाला तरीका है.”
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