Jharkhand High Court | Jharkhand News In Hindi: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद सरकार की ओर से रद्द की गई भर्ती परीक्षाओं में से JPSC की 11वीं और 13वीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती परीक्षा को रद्द करने के फैसले पर झारखंड हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है. अदालत के इस आदेश के बाद सरकार के उस फैसले पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसके तहत आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को स्वीकार करते हुए बड़ी संख्या में भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया था.
करीब 25 दिन के आंदोलन के बाद सरकार ने लिया था फैसला
दरअसल, भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र करीब 25 दिनों तक लगातार प्रदर्शन कर रहे थे. छात्रों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर कई मांगें उठाई गई थीं. लंबे समय तक चले आंदोलन के बाद सरकार ने छात्रों की मांगों को स्वीकार करने की दिशा में कदम उठाया और कुल 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था. इसके साथ ही सरकार ने 6 भर्ती परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था. वहीं, 17 भर्ती परीक्षाओं की जांच की जिम्मेदारी सीआईडी को सौंपने का निर्णय भी लिया गया था. सरकार के इस फैसले के बाद छात्रों के आंदोलन को समाप्त करने की दिशा में रास्ता साफ हुआ था, लेकिन अब हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से पूरा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने पर हाई कोर्ट की रोक
सरकार के इस फैसले के खिलाफ कुछ अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सोनम कुमारी, अवधेश कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं. इन याचिकाओं में सरकार द्वारा भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के आदेश को निरस्त करने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके तहत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया था. उनका कहना था कि परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े उम्मीदवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस तरह परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले पर विचार किया जाना चाहिए.
सभी याचिकाओं को एक साथ टैग कर हुई सुनवाई
भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के खिलाफ दाखिल अलग-अलग याचिकाओं को झारखंड हाई कोर्ट ने एक साथ टैग किया. इसके बाद अदालत में इन सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई की गई. अदालत ने सुनवाई के दौरान सरकार के फैसले पर रोक लगाते हुए मामले में सरकार से जवाब मांगा है. अदालत ने सरकार को 15 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब सरकार को अदालत के सामने यह बताना होगा कि आखिर किन आधारों पर इतनी बड़ी संख्या में भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया और इस फैसले के पीछे सरकार की क्या दलील है.