Noida Gang Rape Case: दिल्ली पुलिस ने ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के सफर के दौरान एक नाबालिग लड़की के साथ कथित गैंगरेप के मामले में स्लीपर बस के ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. पुलिस के मुताबिक, चार्जशीट 18 सितंबर को अदालत में दाखिल की गई थी और 24 सितंबर को अदालत ने इसका संज्ञान लिया. जांच के दौरान बस से कथित तौर पर सीमन सैंपल और बाल समेत कई जैविक साक्ष्य बरामद किए गए, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया.
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार घटना 4 अगस्त की रात की है. उत्तर प्रदेश की रहने वाली नाबालिग ग्रेटर नोएडा में एक स्लीपर बस में इस जानकारी के आधार पर सवार हुई थी कि बस नोएडा सेक्टर-63 जा रही है. हालांकि, बस में सवार होने के बाद उसे पता चला कि उसमें कोई दूसरा यात्री नहीं था. इसके बाद उसने बस से उतरने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि कंडक्टर ने उसे उतरने से रोक दिया और दरवाजा बंद कर दिया. पुलिस के मुताबिक, बस इसके बाद दिल्ली की ओर चली गई और नाबालिग के साथ बस के अंदर कथित तौर पर यौन हमला किया गया. बाद में उसे कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास उतार दिया गया, जहां उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
कुछ घंटों में बस तक पहुंची पुलिस
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कई टीमें गठित कर बस की तलाश शुरू की. जांचकर्ताओं ने रास्ते में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और कुछ ही घंटों में बस को तिमारपुर के एक पार्किंग एरिया में ट्रेस कर लिया. पुलिस ने ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किया. दोनों कानपुर के रहने वाले बताए गए हैं.
बस से मिले अहम फॉरेंसिक साक्ष्य
जांच के दौरान पुलिस ने बस की फॉरेंसिक जांच कराई. पुलिस के अनुसार, वाहन से कथित सीमन सैंपल और बाल के स्ट्रैंड समेत जैविक साक्ष्य बरामद किए गए. इन नमूनों को जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजा गया है. चार्जशीट में पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और अन्य लोगों समेत कुल 10 गवाहों का उल्लेख किया गया है.
बस में मिलीं कई सुरक्षा खामियां
पुलिस की जांच में बस से जुड़े कई कथित सुरक्षा और नियमों के उल्लंघन भी सामने आए. जांच के अनुसार, बस के खिलाफ 11 ट्रैफिक चालान लंबित थे. इनमें से सात चालान जुलाई में कथित ओवरस्पीडिंग के लिए जारी किए गए थे. इसके अलावा, बस का CCTV कैमरा काम नहीं कर रहा था और उसकी खिड़कियों पर पर्दे लगे हुए थे. जांचकर्ताओं के मुताबिक, बस में पैनिक बटन और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम जैसी जरूरी सुरक्षा सुविधाएं भी मौजूद नहीं थीं. पुलिस ने यह भी बताया कि दोनों आरोपियों को कथित तौर पर पुलिस वेरिफिकेशन के बिना नौकरी पर रखा गया था.
इस घटना के बाद दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के खिलाफ अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वत: संज्ञान लिया. सोमवार को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने स्लीपर बस मामले समेत महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों से जुड़ी खबरों पर सुनवाई की.
पीठ ने कहा कि ऐसे मामले कानून-व्यवस्था लागू करने वाली व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की तुलना 2012 के निर्भया केस से किए जाने का भी उल्लेख किया, जिसमें 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में क्रूर यौन हिंसा की गई थी.
फिलहाल, दिल्ली पुलिस की जांच और अदालत की कानूनी प्रक्रिया जारी है. आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर किया जाएगा.