दुनिया में एक ऐसा देश है जो अपने खाने की चीजें खुद उगाता है. उसको बाहर से कोई भी चीज मगवाने की जरूरत नहीं है. आपको जानकर हैरानी होगी कि, इस लिस्ट में न तो अमेरिका का नाम है और न ही भारत का. यह देश है जो अपने दम पर सातों फूड ग्रुप्स में आत्मनिर्भर है. आइए जानते हैं इस देश के बारे में-
यह देश अपने खाने की सभी चीजें खुद उगाता है. (Canva)
दुनियाभर के देशों में अपनी एक अलग समस्या है. फिर चाहे वह भौगोलिक स्थिति हो, आर्थिक हो या फिर सामाजिक स्थिति. इस संकट का वहां के देश पर देखने को मिलता है. जहां यूरोप से लेकर मिडिल ईस्ट तक, कहीं न कहीं जंग चलती ही रहती है. ऐसे कठिन वक्त में हर देश सिर्फ अपनी तरक्की की सोच रहा है. तो ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है कि अगर कल को ग्लोबल ट्रेड रुक जाए तो कौन-सा देश खुद को साबित कर पाएगा? जब इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की, तो जवाब चौंकाने वाला मिला. दुनियाभर में सिर्फ एक ही देश है जो अपने दम पर सातों फूड ग्रुप्स में आत्मनिर्भर है. वह अपनी जरूरत का सारा भोजन खुद उगा रहा है और इतना पैदा कर रहा है जो उसकी पूरी आबादी के लिए पर्याप्त है. बाहर से वह कुछ भी नहीं मंगा रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि, इस लिस्ट में न तो अमेरिका है और न ही भारत. यह देश बेहद छोटा है और यहां की 40 फीसदी आबादी भारतीय मूल के लोगों की है. ये लोग एक जमाने में वहां भेजे गए थे. अब वहां के स्थायी बासिंदे हैं. क्या आप अंदाज लगा सकते हैं कि वो देश कौन सा है. तो आइए जानते हैं वह कौन सा देश है जो अपने खाने की हर चीज खुद उगाता है और बाहर से कुछ भी नहीं मंगवाता है?
दक्षिण अमेरिका के इस देश का नाम है गुयाना. इसकी कुल आबादी केवल 8 लाख है, जिसमें भारतीय मूल के लोगों की तादाद ही 3.2 लाख से 3.5 लाख के बीच है. 19सदी में जब भारत ब्रिटिश राज के अधिक था, तब यहां बड़े पैमाने पर लोगों को भारत से वहां गन्ना बागानों में काम करने के लिए भेजा गया था.इस देश की खेती और संसाधनों की प्लानिंग इतनी संतुलित है कि अगर दुनिया का हर बॉर्डर बंद हो जाए, तो भी ये देश अपने लोगों को हर जरूरी फूड ग्रुप- अनाज, दालें, फल, सब्जियां, दूध, मांस और मछली… पूरी तरह उपलब्ध करा सकता है.
दक्षिण अमेरिका का ये देश क्षेत्रफल के लिहाज से भारत के गुजरात के बराबर है. हालांकि, आबादी के लिहाज से खासा कम, क्योंकि वर्तमान में गुजरात की आबादी 6 करोड़ के आसपास है. इस देश का 85 प्रतिशत भाग घने, दुर्गम वर्षावनों से ढका हुआ है. इस देश ने चुपचाप वह उपलब्धि हासिल कर ली है जो पृथ्वी पर कोई अन्य देश हासिल नहीं कर पाया. उसने सभी जरूरी खानपान में आत्मनिर्भरता पा ली है. यह खुलासा नेचर फूड नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अभूतपूर्व शोध से हुआ हैजिसमें 186 देशों का विश्लेषण करके यह पाया गया कि अगर कोई भी देश चाहे तो अपने घरेलू उत्पादन से ही अपनी आबादी का पेट भर सकता है.
1. स्टार्च वाले मुख्य फूड्स: इस श्रेणी में अनाज जैसे चावल, मक्का, गेहूं और कंद-मूल जैसे आलू, कसावा, शकरकंद को शामिल किया जाता है. गुयाना चावल के उत्पादन में बहुत समृद्ध है. अपनी जरूरत से ज्यादा चावल पैदा करता है.
2. फलियां, मेवे और बीज: इसमें दालें, सोयाबीन, मूंगफली और कई प्रकार के बीज आते हैं.
3. सब्जियां: सभी प्रकार की हरी और अन्य सब्जियां.
4. फल: स्थानीय स्तर पर उगने वाले फल.
5. डेयरी: दूध, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पाद
6. मांस: मुर्गी पालन, पोर्क, बीफ आदि.
7. मछली: समुद्री और मीठे पानी की मछली.
1. अनाज में आत्मनिर्भर. चावल और गेहूं में भारत न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि दुनिया का बड़ा निर्यातक भी.
2. डेयरी में आत्मनिर्भर. दुनिया का नंबर 1 दूध उत्पादक देश.
3. मछली में आत्मनिर्भर. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक. अपनी जरूरतें पूरी करता है.
4. फल और सब्जियों में आत्मनिर्भर. इस मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है.
5. मांस में मिश्रित स्थिति.
6. फलियों और दालों में आंशिक निर्भर. अपनी खपत पूरी करने के लिए 10-15% आयात करता है.
7. मेवे और तिलहन में निर्भर. अपनी जरूरत का लगभग 55-60% खाद्य तेल बाहर से मंगाता है.
पिछले कुछ वर्षों में गुयाना की सरकार ने कृषि क्षेत्र में अपने बजट को लगभग 468 फीसदी तक बढ़ा दिया. गुयाना केवल चावल या चीनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने मक्का, सोयाबीन और डेयरी के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर काम किया. अगर आज दुनिया के व्यापारिक रास्ते बंद हो जाएं, तो गुयाना इकलौता देश होगा जो अपने नागरिकों को भूखा नहीं रहने देगा. उन्हें संतुलित आहार देता रहेगा. गुयाना ने अपनी प्राकृतिक धरोहर को नष्ट किए बिना बल्कि अपनी सीमित कृषि भूमि का अधिकतम उपयोग करके खाद्य आत्मनिर्भरता हासिल की है. जबकि दक्षिण अमेरिका के अधिकांश देशों में खेती और पशुपालन के लिए भूमि साफ करने के कारण वनों की कटाई हो रही है, गुयाना ने अपने मूल वन क्षेत्र का 85 प्रतिशत से अधिक संरक्षित रखा है.
दाल पूरी: यह गुयाना का सबसे लोकप्रिय व्यंजन है. यह बिल्कुल वैसी ही होती है जैसी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बनाई जाती है. यह एक नरम रोटी है जिसके अंदर पीली पिसी हुई दाल, हल्दी और जीरे के साथ भरी जाती है. वहां इसे अक्सर करी के साथ खाया जाता है.
‘कढ़ी’ और ‘भजिया’: वहां के स्ट्रीट फूड में आपको ये भारतीय स्वाद खूब मिलेगा.बेसन के छोटे-छोटे पकोड़े होते हैं, जो बिल्कुल भारत के ‘भजिया’ या ‘पकोड़े’ जैसे दिखते हैं. इन्हें आम की चटनी के साथ परोसा जाता है. दक्षिण भारत के ‘वड़ा’ या उत्तर भारत के ‘दाल वड़ा’ की तरह बारा व्यंजन है.
रोटियां: गुयाना में रोटी खाने का बहुत चलन है, लेकिन वहां के नाम थोड़े अलग हैं, इसको सदा रोटी कहते हैं, जो हमारी साधारण तवा रोटी जैसी होती है. भारत के पराठा या रूमाली रोटी की तरह एक और रोटी होती है, जिसको बश-अप-शर्ट कहते हैं, यह बहुत नरम और परतों वाली होती है। इसका नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह “फटी हुई कमीज” जैसी दिखती है.
गुयानी करी: वहां करी बनाने का तरीका भारतीय मसालों हल्दी, धनिया, जीरा पर ही आधारित है. वहां ‘चिकन करी’, ‘डक करी’ और ‘पनीर करी’ बहुत प्रसिद्ध है. अंतर केवल इतना है कि वे इसमें स्थानीय कैरिबियन मिर्च का इस्तेमाल करते हैं, जिससे इसका स्वाद थोड़ा तीखा और अलग हो जाता है.
सात भाजी: ये गुयाना के हिंदू परिवारों में शादियों और पूजा के अवसरों पर बनाया जाने वाला सबसे खास भोजन है. इसमें केले के पत्ते पर 7 अलग-अलग तरह की सब्जियां जैसे कद्दू, आलू, सहजन, पालक आदि को चावल और दाल पूरी के साथ परोसी जाता है. .ये दक्षिण भारतीय ‘साद्य’ या उत्तर भारतीय ‘भंडारे’ की थाली जैसा अनुभव देता है.
मीठे व्यंजन: पर्मिगी भारत की ‘सेवई’ या ‘खीर’ ही है. गुयाना में शक्करपारे जैसी एक मिठाई को सीधा ‘मिठाई’ ही कहा जाता है.
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