Parathyroid Adenoma Surgery in Karnal: डॉ. हरि कृष्ण राठी ने पैराथाइरॉइड एडेनोमा नाम की बीमारी के लिए एक दुर्लभ और तकनीकी रूप से जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जो करनाल क्षेत्र में अपनी तरह की पहली जटिल सर्जरी है.
डॉ. हरि कृष्ण राठी ने पहली बार की पैराथायरॉयड एडेनोमा की सफल सर्जरी
Parathyroid Adenoma Surgery in Karnal: डॉक्टर हरि कृष्ण राठी ने पैराथायरॉयड एडेनोमा नामक रोग की एक दुर्लभ और तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया. यह करनाल क्षेत्र में अपनी तरह की पहली जटिल सर्जरी मानी जा रही है. मरीज लंबे समय से प्रसिद्ध हार्मोन रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय कालरा की नियमित चिकित्सकीय निगरानी में था जहां रोग का सटीक निदान किया गया. रोग की पुष्टि के बाद मरीज को अंतिम उपचार के लिए सर्जरी हेतु डॉ. राठी के पास भेजा गया.
डॉ. राठी ब्रेस्ट, हार्मोनल और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के सुपर-स्पेशलिस्ट हैं. उन्होंने ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) नई दिल्ली से ट्रेनिंग ली है. पिछले साल उन्होंने डॉ. संदीप चौधरी के इरोस हॉस्पिटल में डिपार्टमेंट हेड के तौर पर काम शुरू किया.
पूरी मेडिकल जांच और सभी जरूरी टेस्ट के बाद, मरीज को सर्जरी के लिए तैयार किया गया. लगभग एक घंटे तक चली यह सर्जरी बीमारी के नेचर और शरीर में उसकी जगह की वजह से बहुत मुश्किल थी. सभी मुश्किलों के बावजूद डॉ. राठी की सर्जिकल स्किल्स और बहुत ध्यान से की गई टेक्नीक ने पैराथाइरॉइड एडेनोमा को सक्सेसफुली हटा दिया. ऑपरेटिंग रूम टीम में डॉ. रजत, डॉ. पूनम, डॉ. आरती, नर्स परमजीत और सपोर्ट स्टाफ मेंबर करण शामिल थे. डॉ. राठी ने सक्सेसफुल सर्जरी में उनकी कोऑर्डिनेटेड कोशिशों के लिए पूरी टीम को बधाई दी.डॉ. राठी ने सफल सर्जरी के लिए पूरी टीम को उनके समन्वित प्रयासों के लिए बधाई दी.सर्जरी के बाद, मरीज़ और उसके परिवार ने इलाज से पूरी तरह खुश होकर डॉ. राठी और पूरी मेडिकल टीम को धन्यवाद दिया.
पैराथाइरॉइड एडेनोमा गर्दन में पैराथाइरॉइड ग्लैंड का एक बिनाइन, अक्सर नॉन-कैंसरस ट्यूमर होता है, जो शरीर में कैल्शियम लेवल को रेगुलेट करता है. अगर इसका इलाज न किया जाए, तो इससे हड्डियों में दर्द, किडनी में पथरी, बहुत ज्यादा थकान और शारीरिक कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं. ये लक्षण खून में कैल्शियम लेवल बढ़ने की वजह से होते हैं. समय पर डायग्नोसिस और सर्जरी से इस बीमारी का पूरा इलाज मुमकिन है, जिससे मरीज़ नॉर्मल और हेल्दी जिंदगी जी सकता है.
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