Nepal Flood: बिहार के पश्चिमी चंपारण में गंडक नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से 36 बैराज गेट खोल दिए गए हैं. नदी किनारे के इलाकों को खाली कराया जा रहा है. हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद हाई अलर्ट पर हैं, जबकि गृह मंत्री अमित शाह भी हालात पर करीब से नज़र रखे हुए हैं.
नेपाल बाढ़ से बिहार में खतरा
Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने अब बिहार की चिंता बढ़ा दी है. नेपाल से आने वाली नदियों में पानी बढ़ने के साथ ही बिहार के नौ जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा नजर पश्चिमी चंपारण पर है. यह वही चंपारण है, जिसने बिहार को देश-दुनिया में अलग पहचान दिलाई और महात्मा गांधी के सत्याग्रह से इसका नाम इतिहास में दर्ज हुआ. अब नेपाल में बाढ़ का पानी बढ़ा तो सबसे पहले इसी जिले पर इसका असर पड़ सकता है. प्रशासन ने हालात को देखते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया है और गंडक नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है.
बिहार के पश्चिमी चंपारण में गंडक नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से 36 बैराज गेट खोल दिए गए हैं. नदी किनारे के इलाकों को खाली कराया जा रहा है. हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद हाई अलर्ट पर हैं, जबकि गृह मंत्री अमित शाह भी हालात पर करीब से नज़र रखे हुए हैं. बुधवार को अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दोनों राज्यों में नदियों का पानी बढ़ने की संभावना के बारे में बात की. शाह ने कहा कि नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही दिल दहला देने वाली है. उन्होंने कहा कि उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से इस आपदा के बारे में बात की है.पश्चिम चंपारण बाढ़ के अनुमानित रास्ते पर पहला बड़ा भारतीय ज़िला है. पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुज़फ़्फ़रपुर और वैशाली को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है.
त्रिशूली नदी एक बड़े नदी नेटवर्क का हिस्सा है. देवघाट पर, यह काली गंडकी से मिलकर नारायणी नदी बनाती है, जो किसी भी बड़े उछाल को नीचे की तरफ़ ले जाती है.नारायणी फिर बिहार में वाल्मीकिनगर के पास भारत में आती है, जहाँ यह गंडक नदी बन जाती है.इसका मतलब यह नहीं है कि त्रिशूली में बाढ़ आने से भारत में भी अपने आप बाढ़ आ जाएगी. हालाँकि, इससे गंडक बेसिन के आस-पास के ज़िलों पर कड़ी नज़र रखी जाती है क्योंकि वे नेपाल में ऊपर की तरफ़ से आने वाली किसी भी बड़ी बाढ़ की लहर के सबसे सीधे संपर्क में आते हैं.
जहां प्रधानमंत्री और गृह मंत्री हाई अलर्ट पर हैं, वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हरकत में आ गए हैं. हालात को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ इमरजेंसी मीटिंग की. इस बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर की निगरानी का आदेश दिया है. राज्य सरकारों से निर्देश मिलने के बाद, वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर तैनात किया गया है और वे लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं.
बिहार के जिन नौ जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है, उनमें पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, सीवान, सारण, शिवहर, सीतामढ़ी और वैशाली शामिल हैं.
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