केरल की पाला नगर पालिका में बड़ा सियासी उलटफेर. अपनी ही पार्टी के पार्षदों की बगावत के बाद LDF का अविश्वास प्रस्ताव पास, देश की सबसे युवा पालिका अध्यक्ष दीया बिनू पुलिक्काकंडम को गंवानी पड़ी कुर्सी. पढ़ें पूरी खबर.
अपनी ही पार्टी के पार्षदों की बगावत के बाद LDF का अविश्वास प्रस्ताव पास, देश की सबसे युवा पालिका अध्यक्ष दीया बिनू पुलिक्काकंडम को गंवानी पड़ी कुर्सी
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के नेतृत्व वाले एलडीएफ (LDF) द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पास होने के बाद मंगलवार को संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने पाला नगर पालिका की सत्ता गंवा दी. इसके साथ ही देश की सबसे युवा नगर पालिका अध्यक्ष दीया बिनू पुलिक्काकंडम को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी.
अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में कुल 17 वोट पड़े. यह उलटफेर तब हुआ जब कांग्रेस के चार पार्षदों ने अपनी ही पार्टी के ह्विप (Whip) का उल्लंघन करते हुए प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. सत्ताधारी मोर्चे के कुल पांच सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसकी वजह से यूडीएफ की सरकार गिर गई.
पार्टी लाइन से अलग जाकर वोट करने वाले बागी कांग्रेस पार्षदों ने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें पार्टी का ह्विप मिला ही नहीं था. उनका कहना था कि उन्होंने स्थानीय कांग्रेस कमेटी के फैसले के मुताबिक ही कदम उठाया है. इसके साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि नगर पालिका में सत्ता आगे भी कांग्रेस के पास ही रहेगी.
पद से हटाए जाने के बाद दीया बिनू ने बेहद संयमित प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि वह लोकतांत्रिक जनादेश का पूरा सम्मान करती हैं. दीया ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग, रिश्वतखोरी, भाई-भतीजावाद, सरकारी आदेशों के उल्लंघन या किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि का कोई आरोप उन पर नहीं लगा है.
दीया बिनू ने कहा, ‘मेरे खिलाफ एक भी ऐसा आरोप नहीं है जिसे सच साबित किया जा सके. मैंने अपनी ईमानदारी से कभी समझौता नहीं किया, न ही कानून का उल्लंघन किया और न ही जनता के पैसे का दुरुपयोग होने दिया.’
उन्होंने आगे कहा कि अध्यक्ष के रूप में लिया गया उनका हर फैसला कानून, पारदर्शिता और जनहित को ध्यान में रखकर ही लिया गया था. पाला नगर पालिका के अधिकारियों, कर्मचारियों, पार्षदों और जनता का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पद केवल जिम्मेदारी निभाने का जरिया है, न कि सत्ता का आनंद लेने की जगह.
दीया ने कहा कि पद तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन इंसान के नैतिक मूल्य हमेशा बने रहते हैं. वह आगे भी एक जनप्रतिनिधि के रूप में पूरी पारदर्शिता, कानून के दायरे और जन कल्याण के लिए काम करती रहेंगी.
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