Parliament Winter Session : संसद के शीतकालीन सत्र की सोमवार (1 दिसंबर) से शुरुआत हो चुकी है. सत्र शुरु होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रेस वार्ता की. इस दौरान उन्होंने विपक्षी सांसदों को हिदायत भी दे डाली.
Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र की सोमवार 1 दिसंबर से शुरु हो चुकी है. इस दौरान सदन में केंद्र सरकार 14 नए बिल पेश कर सकते हैं. हर बार की तरह इस बार भी सदन की शुरुआत जोरदार हंगामे से साथ होने की आशंका है. इस सत्र में विपक्ष में कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है, जिनमें बिहार चुनाव, दिल्ली बम धमाका और SIR समेत कई मुद्दे शामिल है. विपक्षी दलों ने एक सुर में सर्वदलीय बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चर्चा की मांग की है.
सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रेस वार्ता की. इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों को प्रेस के साथ साझा किया और साथ ही विपक्ष को सदन शांति से चलने देने का अल्टीमेटम भी दे डाला. PM नरेंद्र मोदी ने कहा, “यह विंटर सेशन सिर्फ़ एक रस्म नहीं है…भारत ने डेमोक्रेसी को जिया है. डेमोक्रेसी का जोश और उत्साह बार-बार इस तरह से दिखाया गया है कि डेमोक्रेसी में भरोसा और मज़बूत होता जा रहा है.”
PM नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, “मैं इस विंटर सेशन में सभी पार्टियों से गुज़ारिश करता हूं कि हार का डर बहस का मैदान न बने. पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर हमें देश के लोगों की ज़िम्मेदारी और उम्मीदों को बहुत बैलेंस और ज़िम्मेदारी के साथ निभाना चाहिए, साथ ही भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए…”
पीएम मोदी ने कहा कि “इस सेशन में इस बात पर फ़ोकस होना चाहिए कि यह पार्लियामेंट देश के बारे में क्या सोचती है, देश के लिए क्या करना चाहती है. इन मुद्दों पर फ़ोकस होना चाहिए. अपोज़िशन को भी अपनी ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए. उन्हें ऐसे मुद्दे उठाने चाहिए, मज़बूत मुद्दे. उन्हें हार की निराशा से उबरना चाहिए. और बदकिस्मती से, कुछ पार्टियाँ ऐसी हैं जो हार को पचा नहीं पा रही हैं. और मैं सोच रहा था कि बिहार के रिज़ल्ट आए इतना समय हो गया है, तो शायद वे थोड़ा शांत हो गए होंगे. लेकिन कल जो मैंने सुना, उससे लगता है कि हार ने उन्हें परेशान कर दिया है…”
विपक्ष को अल्टीमेटम देते हुए PM नरेंद्र मोदी ने कहा, “जिसे ड्रामा करना है, कर सकता है. यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए. ज़ोर पॉलिसी पर होना चाहिए, नारों पर नहीं. यह सत्र संसद देश के लिए क्या करना चाहती है, संसद देश के लिए क्या करने वाली है, इन मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए.”
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